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बाढ़ का सताने लगा डर, आशियाने की चिंता

Wed, 25 May 2022 12:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2022 12:07 AM IST
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Fear of flood started, concern for housing
रेउसा में सड़क किनारे छप्पर बनाता ग्रामीण। -संवाद - फोटो : SITAPUR
रेउसा/सीतापुर। तराई इलाके के लोगों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। वे अभी से अपने आशियाने बनाने में जुट गए हैं। सड़कों के किनारे छप्पर तैयार होने लगे हैं। अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं, लेकिन ग्रामीण अपनी तैयारी में लग गए हैं।
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प्रत्येक वर्ष जिले के बिसवां, महमूदाबाद व लहरपुर तहसील में बाढ़ आती है। यह बाढ़ जून से अगस्त माह के बीच आती है। इसकी चपेट में सौ से अधिक गांव आ जाते है। हजारों लोग बेघर हो जाते है। बाढ़ में गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। इस साल प्री मानसून बरसात शुरू हो गई है। अब इस बरसात को देखकर लोगों की धड़कने बढ़नी लगी हैं।
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शारदा व घाघरा नदियों के जलस्तर पर ग्रामीण निगाह बनाए हुए हैं। वे अभी से सुरक्षित जगहों पर आशियाना बनाने में जुट गए हैं। सबसे अधिक भयभीत रेउसा विकासखंड की ग्राम पंचायत गोलोक कोडर के लोग होते हैं। इस ग्राम पंचायत में 20 मजरे आते हैं। ये मजरे शारदा नदी के किनारे बसे हुए हैं। जब भी बाढ़ आती है तो इस ग्राम पंचायत के सभी मजरे प्रभावित होते हैं।
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मंगलवार को नगीनापुरवा के मनोहर लाल चहलारी घाट पुल पर सड़क किनारे छप्पर बना रहे थे। मनोहर लाल ने कहा कि हर वर्ष बाढ़ का मंजर हम लोग झेलते रहते हैं। करीब 20 मजरे के लोग हर वर्ष प्रभावित होकर बेघर हो जाते हैं। घरों में पानी भर जाता है। हजारों बीघे खेती जलमग्न हो जाती है। वे बोले, अभी ठिकाना ढूंढकर बना लेंगे तो आने वाले समय में बाढ़ से निजात पाने की राह आसान हो जाएगी। बाढ़ के समय काफी लोग सड़क के किनारे अपना आशियाना बनाते है। उस समय जगह की दिक्कत होगी।

नहीं भूले हैं मंजर
बाढ़ पीड़ित केशन का कहना है कि पिछले बरस आई बाढ़ से खेत नदी की कटान में समा गया था। फसल डूब गई थी। इससे फसल का मुनाफा तो दूर लागत तक नहीं निकल पाई थी। केशन का कहना है कि इसी वजह से इस बार खेत में कोई फसल नहीं बोई है। खेत परती पड़ा हुआ था। पिछले बरस काफी नुकसान हुआ था। इस साल मजदूरी करके पेट पाल रहे है। कोटे से राशन मिल जाता है, इससे मदद मिलती है।
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