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बाढ़ लील गई खेत, अब रोटी का संकट
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। इस साल आई भीषण बाढ़ ने तबाही की नई इबारत दर्ज करा दी है। इलाके में सैकड़ों लोगों के घर व खेत बाढ़ लील गई। हालात सुधरने पर बाढ़ पीड़ित अब गांव लौटने लगे हैं लेकिन अपना सब कुछ गंवाने वाले इन ग्रामीणों के सामने गुजर-बसर करने का संकट खड़ा हो गया है।
सरयू नदी की तलहटी में बसे अखरी, अंगरौरा व शुकुलपुरवा ग्राम पंचायतों के बाशिंदों की जीविका का मुख्य साधन खेती-किसानी ही है। बाढ़ में सबसे अधिक प्रभावित इसी गांव के लोग हुए हैं। अधिकांश लोगों के घर व खेत कटान की जद में आकर सरयू में समा गए। इनके सामने अपनी बिखरी जिंदगी को समेटकर नए सिरे से शुरुआत करने की चुनौती है। जिन लोगों के खेत कटने से बच गए, उनकी फसलें बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ में खेत महीने भर तक डूबे रहे। पानी हटने पर खेतों में तीन से चार फीट तक रेत जमी नजर आ रही है। रेत में दबकर फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। सरकारी मदद अभी तक मिली नहीं है। बाढ़ पीड़ितों को अब रोजी-रोटी की चिंता सता रही है।
कटान में चली गई जमीन
ब्लॉक रामपुर मथुरा के अंगरौरा में रहने वाला चंदन अपनी दो एकड़ जमीन पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण करता था। बाढ़ में उसकी सारी जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। अब दस सदस्यों के परिवार की जीविका चलाने का संकट खड़ा हुआ है। अभी तक इन्हें कोई सरकारी सहायता भी नहीं मिली है।
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परिवार का कैसे होगा गुजारा
सरयू की बाढ़ अंगरौरा निवासी रामू तिवारी की सात बीघा कृषि योग्य भूमि लील गई। खेती से ही रामू के परिवार का गुजारा होता था। अब इनके पास महज तीन बीघा खेती बची है। परिवार के सात सदस्यों की गुजर-बसर कैसे होगा, यह सवाल इनके लिए चुनौती बना हुआ है। सरकारी सहायता अभी मिल नहीं पाई है।
जिनके घर कटान में नष्ट हो गए हैं, उनके लिए आवासीय भूमि की तलाश की जा रही है। कृषि भूमि कटान का सर्वे कराकर पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों के जीवनयापन के लिए संबंधित गांवों में होने वाले मनरेगा कार्यों में उन्हें प्राथमिकता पर काम दिलाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
- प्यारेलाल मौर्य, एसडीएम महमूदाबाद
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सरयू नदी की तलहटी में बसे अखरी, अंगरौरा व शुकुलपुरवा ग्राम पंचायतों के बाशिंदों की जीविका का मुख्य साधन खेती-किसानी ही है। बाढ़ में सबसे अधिक प्रभावित इसी गांव के लोग हुए हैं। अधिकांश लोगों के घर व खेत कटान की जद में आकर सरयू में समा गए। इनके सामने अपनी बिखरी जिंदगी को समेटकर नए सिरे से शुरुआत करने की चुनौती है। जिन लोगों के खेत कटने से बच गए, उनकी फसलें बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ में खेत महीने भर तक डूबे रहे। पानी हटने पर खेतों में तीन से चार फीट तक रेत जमी नजर आ रही है। रेत में दबकर फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। सरकारी मदद अभी तक मिली नहीं है। बाढ़ पीड़ितों को अब रोजी-रोटी की चिंता सता रही है।
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कटान में चली गई जमीन
ब्लॉक रामपुर मथुरा के अंगरौरा में रहने वाला चंदन अपनी दो एकड़ जमीन पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण करता था। बाढ़ में उसकी सारी जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। अब दस सदस्यों के परिवार की जीविका चलाने का संकट खड़ा हुआ है। अभी तक इन्हें कोई सरकारी सहायता भी नहीं मिली है।
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परिवार का कैसे होगा गुजारा
सरयू की बाढ़ अंगरौरा निवासी रामू तिवारी की सात बीघा कृषि योग्य भूमि लील गई। खेती से ही रामू के परिवार का गुजारा होता था। अब इनके पास महज तीन बीघा खेती बची है। परिवार के सात सदस्यों की गुजर-बसर कैसे होगा, यह सवाल इनके लिए चुनौती बना हुआ है। सरकारी सहायता अभी मिल नहीं पाई है।
जिनके घर कटान में नष्ट हो गए हैं, उनके लिए आवासीय भूमि की तलाश की जा रही है। कृषि भूमि कटान का सर्वे कराकर पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों के जीवनयापन के लिए संबंधित गांवों में होने वाले मनरेगा कार्यों में उन्हें प्राथमिकता पर काम दिलाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
- प्यारेलाल मौर्य, एसडीएम महमूदाबाद