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सदर सीट पर चुनावी जंग तेज, गरमाई सियासत

Fri, 04 Feb 2022 12:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Feb 2022 12:24 AM IST
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Electoral battle intensifies in Sadar seat, politics heats up
सीतापुर। चुनावी बिगुल बजने के साथ ही तेज होती सियासत को सदर विधानसभा की सीट ने और रोमांचक बना दिया है। भाजपा की ओर से राकेश राठौर गुरु पर दांव लगाया गया है। इसके बाद बगावत पर उतरे भाजपा नेता साकेत मिश्रा गुरुवार को निर्दल प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल कर चुनावी रण में कूद पड़े हैं। उनके चुनावी समर में खुलकर सामने आने के बाद इस सीट पर सियासत और गरमा गई है। अब ऐसे में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के सामने बाहरियों के साथ बागी साकेत से भी मुकाबला करना एक चुनौती जरूर है।
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सदर की सीट सबसे चर्चित हो गई है। 2017 में भाजपा के टिकट से सदर विधानसभा क्षेत्र से जीते विधायक राकेश राठौर के पार्टी छोड़कर सपा में जाने के बाद इस सीट पर कई दावेदारों ने नजरें गड़ा रखी थी। विधायक राकेश के जाने से दावेदारी के लिए रास्ता साफ हो गया था। काफी संख्या में लोगों ने दावेदारी ठोकी थी, उसमें कुछ चर्चित चेहरे भी थे। टिकट को लेकर सभी के अपने-अपने दावे थे, लेकिन एक फरवरी की रात पार्टी की ओर से जारी गई सूची ने जिले की सियासत का तापमान बढ़ गया।
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पार्टी ने राकेश राठौर गुरु को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतार दिया, जिनके नाम की चर्चा दूर-दूर तक नहीं थी। भाजपा ने अप्रत्याशित फैसला देकर सभी को चौंका दिया। राकेश राठौर गुरु को बतौर प्रत्याशी कई भाजपाइयों ने नहीं स्वीकारा, लेकिन किसी ने अंदरखाने विरोध किया तो कोई खुलकर सामने आया।
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खुलकर विरोध करने वालों में भाजपा नेता साकेत मिश्रा पहले नंबर पर रहे। वजह, वह भी सदर या महोली से टिकट मिलने की उम्मीद लगाए थे। उनके दावों पर नजर डालें तो पार्टी ने भरोसा भी दिया था, लेकिन परिणाम भरोसे के उलट आए। ऐसे में उन्होंने बगावती तेवर अख्तियार कर लिया।
बुधवार को ही साकेत मिश्रा ने इसके संकेत दे दिए थे। गुरुवार को पूरी तैयारी के साथ उन्होंने निर्दल प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल कर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है। ऐसे में सदर सीट को लेकर सियासत का तापमान बढ़ गया है। राकेश राठौर गुरु के दांव पर साकेत का पैंतरा अब सियासत की सज चुकी पिच पर क्या गुल खिलाता है, देखना बड़ा दिलचस्प होगा।
पहले भी बगावत करते रहे हैं नेता
टिकट न मिलने के बाद बगावती तेवर अख्तियार करने वाले साकेत भाजपा के कोई पहले नेता नहीं हैं। इससे पहले भी जिले में नेताओं ने बगावत की है। उसी में सबसे पहला नाम सपा सरकार में बिसवां से विधायक हुए रामपाल यादव का आता है। बेटे जितेंद्र यादव के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष के टिकट के लिए वह बागी हो गए थे।
पार्टी के मना करने के बाद भी उन्होंने बेटे को जिला पंचायत अध्यक्षी का चुनाव लड़ाया था। चुनाव जीत भी लिया था, लेकिन इसके बदले उन्हें इसका खामियाजा भी कई तरह से चुकाना पड़ा था। हालांकि, इस सब के पीछे उन्होंने आरोप एमएलसी पर जड़ा था।
सियासी घटनाक्रम से विपक्ष खुश
टिकट न मिलने के बाद भाजपा में मचे सियासी घटनाक्रम को देखकर मुख्य विपक्षी पार्टी सपा के लोग अंदर ही अंदर खुश हैं। उनकी हर घटनाक्रम पर नजर है। सियासी जानकारों की माने तो विपक्ष इस बात से खुश है कि इस फूट का लाभ वोटों के रूप में उसे मिलेगा। अब मिलता है या नहीं... देखना दिलचस्प होगा।

चुनाव लड़ते हैं या वापस लेंगे नामांकन
विरोध का बिगुल फूंककर चुनाव लड़ने की मंशा से गुरुवार को नामांकन पत्र दाखिल करने वाले भाजपा नेता साकेत मिश्रा चुनाव लड़ेंगे या फिर पर्चा वापस लेंगे, इसकी भी चर्चाएं तेज हैं। इंतजार सात फरवरी का रहेगा, जिस दिन पर्चे वापस लिए जाएंगे।
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