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सीतापुर: एनओसी के बिना साल भर से अटका डाई हाउस प्रोजेक्ट

Tue, 14 Feb 2023 11:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Feb 2023 11:42 PM IST
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Dye house project stuck for a year without NOC
खैराबाद/सीतापुर। जिले में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तहत 28 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। जिला प्रशासन सभी प्रोजेक्टों को जल्द धरातल पर उतारने का दावा कर रहा है। इसके उलट सदर तहसील प्रशासन की सुस्ती से डाई हाउस व ईटीपी प्लांट के लिए धारा 80 की एनओसी एक साल से आवेदक को नहीं मिल पा रही है।
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लिहाजा 15 करोड़ का प्रोजेक्ट नौ दिन चले अढ़ाई कोस वाली कहावत चरितार्थ कर रहा है। यह आलम तब है जब डाई हाउस का प्रोजेक्ट ओडीओपी के तहत लगाया जाना है। डीएम के समक्ष भी समस्या उठाई गई। फिलहाल आवेदक को आश्वासन ही मिल सका।
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शासन की ओर से सीतापुर का दरी उद्योग एक जिला एक उत्पाद में चयनित है। दरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास भी कर रही है। ओडीओपी के तहत सरकार ने दरी उद्योग से संबंधित प्रोजेक्ट लगाने पर अनुदान देने का ऐलान किया था। सीतापुर हैंडलूम दरी ऐसोसिएशन की ओर से 2021 में डाई हाउस व ईटीपी प्लांट लगाने के लिए 15 करोड़ के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव शासन को सौंपा था। इसकी मंजूरी भी मिल गई थी।
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इस प्रोजेक्ट में समिति को 2 करोड़ रुपये का निवेश करना था जबकि शासन को 13 करोड़ रुपये देने थे। शासन से मंजूरी मिलने के बाद समिति ने दो वर्ष पूर्व पाठकपुर में 65 लाख की 16 बीघा जमीन खरीदी थी। समिति ने फरवरी 2022 में जमीन को व्यावसायिक लैंड घोषित किए जाने को लेकर धारा 80 में आवेदन किया।
अब तक समिति को सदर तहसील से एनओसी नहीं मिल पाई है। समिति के पदाधिकारी एक साल से धारा 80 के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं। विगत रविवार को उद्योग बंधु की बैठक में समिति के निदेशक इश्तियाक हुसैन उर्फ नब्बन ने जिलाधिकारी अनुज सिंह के सामने यह मामला उठाया तो बस आश्वासन मिला।

सीतापुर का होगा पहला डाई हाउस
सीतापुर के दरी उद्योग की विदेशों तक पहचान है। यहां लगभग 50 ईकाइयां संचालित हैं। दो लाख से अधिक बुनकर इस कारोबार से जुड़े हैं। जिले में एक भी डाई हाउस नहीं है। इसके चलते दरी कारोबारियों को अपना मैटीरियल हरियाणा में डाई कराना पड़ता है। जिसमें उनका समय भी खराब होता है और अतिरिक्त खर्च का बोझ भी वहन करना पड़ता है।
हैंडलूम दरी एसोसिएशन ने इसी समस्या को देखते हुए 15 करोड़ का प्रोजेक्ट (डाई हाउस व ईटीपी प्लांट) लगवाने की कवायद शुरू की थी। जिले का यह पहला डाई हाउस होगा। दरी कारोबारियों को उम्मीद जगी थी कि यह प्रोजेक्ट लगने से उन्हें पानीपत हरियाणा के चक्कर नहीं काटने पड़ेगे। दरी कारोबारी सगीर अहमद, शाहिद, जलीस अंसारी, सौरभ महेंद्र, शफीक, हनीफ आदि का कहना है कि डाई हाउस लगने से बड़ी सहूलियत मिलेगी।

बहुत कठिन है डगर पनघट की...
15 करोड़ के प्रोजेक्ट में एक वर्ष बाद भी धारा अस्सी की एनओसी नहीं मिल पाई है। अभी प्रदूषण, फायर आदि कई विभागों की एनओसी लेनी बाकी है। ऐसे मे समिति के लिए यह प्रोजेक्ट शुरू करना आसान नहीं। दरी कारोबारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता में शामिल ओडीओपी के तहत लगाए जाने वाले प्रोजेक्ट को लेकर ही अफसर गंभीर नहीं हैं।

6 लाख दो एनओसी लो....यही रेट है
खैराबाद क्षेत्र के पाठकपुर मे डाई हाउस व ईटीपी प्लांट लगने के लिए 16 बीघा भूमि की धारा 80 कराने को लेकर राजस्व विभाग के अफसर व कर्मी अपनी जेब गर्म करने के चक्कर में हैं। समिति के एक सदस्य ने बताया कि एक कानूनगो ने 40 हजार रुपये बीघा की मांग की है। यानी 16 बीघा के लिए कुल 6 लाख 40 हजार रुपये बनते हैं। कानूनगो का कहना है कि धारा 80 की एनओसी दिए जाने को लेकर यही रेट चल रहा है। हालांकि समिति ने कह दिया कि सरकार का प्रोजेक्ट है तो पैसा भी सरकार देगी।


जल दोहन से मिलेगी निजात
डाईहाउस के साथ ईटीपी प्लांट लगने से प्रदूषण से तो मुक्ति मिलेगी ही, साथ ही जल दोहन से भी निजात मिलेगी। ईटीपी प्लांट रंगाई के बाद निकले दूषित पानी को फिर से स्वच्छ बनाता है जिससे पानी दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
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