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Sitapur News: वैज्ञानिक तरीके से करें खेती, बढ़ेगी पैदावार

Sat, 11 Oct 2025 01:01 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Oct 2025 01:01 AM IST
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Do farming in a scientific way, yield will increase
सीतापुर। धान की सीधी बोआई (डीएसआर) तकनीक को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र कटिया की ओर से शुक्रवार को एक दिवसीय प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन हुआ। इसमें कृषि यंत्रों, बीज पैकेटों, प्रदर्शन प्लॉटों और तकनीकी पोस्टरों की प्रदर्शनी लगाई गई। इससे किसानों को तकनीक का प्रयोग करने की बेहतर ढंग से जानकारी मिली।
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केवीके अध्यक्ष डॉ. दया एस श्रीवास्तव ने कहा कि कृषि अब केवल परंपरा नहीं बल्कि विज्ञान बन चुकी है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेत तैयार करें, फसल का पोषण संतुलित रखें और खरपतवार नियंत्रण करें तो उपज में 20-25 फीसदी की वृद्धि निश्चित है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसानों के बीच जागरूकता फैलाने का सर्वोत्तम माध्यम हैं।
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कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शस्य वैज्ञानिक डॉ. शिशिर कांत सिंह ने कहा कि डीएसआर तकनीक आज की जलवायु परिस्थितियों में कृषि का भविष्य है। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बोआई से खेत की तैयारी में समय और लागत दोनों की बचत होती है। मुख्य अतिथि व प्रायोजक कंपनी के हेड, रिसर्च एंड डेवलपमेंट डाॅ. सुमंत होला ने किसानों से कहा कि किसान क्राॅफ्ट कंपनी सदैव किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल बीज बेचना नहीं, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। कार्यक्रम में किसानों के बीच प्रश्नोत्तरी कराई गई और पुरस्कृत भी किया गया।
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सिंचाई में जल की होगी बचत
यह तकनीक लेजर लैंड लेवलर, रोटावेटर और सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से खेत को समतल कर सीधा बीज डालने की पद्धति है। इसमें 20-25 फीसदी तक सिंचाई जल की बचत और तकरीबन 25-30 फीसदी तक मजदूरी में कमी आती है। शस्य वैज्ञानिक ने किसानों को सावधान करते हुए बताया कि डीएसआर में सफल परिणाम के लिए खेत की समतलता, उचित नमी और खरपतवार नियंत्रण अति आवश्यक है। कार्यक्रम के संयोजक व नोडल डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह, प्रक्षेत्र प्रबंधक व कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि यह आयोजन किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और खेत से खेत तक वैज्ञानिक खेती के संदेश को पहुंचाने का एक प्रयास है। कार्यक्रम में क्षेत्र के 82 प्रगतिशील किसान, सात बीज विक्रेता, कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
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