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लेखा की जांच में चार लाख रुपये का मिला अंतर
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सीतापुर। संयुक्त विकास आयुक्त ने ब्लॉक महमूदाबाद की लेखा परीक्षा दल द्वारा की गई पड़ताल की रिपोर्ट जारी किया है। लेखा की जांच में चार लाख नौ हजार 722 रुपये का अंतर पाया गया है। चार सौ मनरेगा एमआर शून्य किए जाने पर स्टेशनरी व समय का अपव्यय बताया है।
सहायक अनुदान पंजिका भाग-2 के अनुसार माह मार्च 2019 के अंत में विभिन्न योजनाओं में एक करोड़ 57 लाख 16 हजार 434 रुपये का अंतिम अवेशष पाया गया। इसका खर्च इसी वित्तीय बरस में होना चाहिए था। जिस राशि का खर्च ब्लॉक स्तर पर संभव न हो तो संबंधित राशि को डीआरडीए अन्यथा संबंधित विभाग को समर्पित कराने के निर्देश दिए हैं।
जिससे अवशेष राशि का उपभोग उन परियोजनाओं पर किया जा सके जो कि धनाभाव के कारण प्रभावित हो रही हैं। अनुदान पंजिका के अनुसार एक करोड़ 57 लाख 16 हजार 434 रुपये अवशेष है। बैंक पास बुक के अनुसार एक करोड़ 61 लाख 22 हजार 402 रुपये शेष है।
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इस प्रकार चार लाख नौ हजार 722 रुपये का अंतर पाया गया। अंतर का कारण अनाहरित चेकें हैं। ब्लॉक में बीते वित्तीय बरस में सम्प्रेक्षण तिथि तक अकुशल श्रमिकों के लिए कुल 20305 मस्टर रोल जारी किए गए। जिसके सापेक्ष 19889 मस्टर रोलों का उपभोग सुनिश्चित किया गया एवं 388 मस्टर रोलों को शून्य किया गया।
इतनी अधिक संख्या में एमआर को शून्य करने से समय एवं स्टेशनरी का अपव्यय किया गया। वरिष्ठ लेखा परीक्षक अनुराग कुमार श्रीवास्तव ने निर्देश दिए हैं कि बीडीओ द्वारा भविष्य में उन्हीं कार्यों के लिए एमआर जारी किए जाए जो कार्य किए जाने योग्य हो।
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सहायक अनुदान पंजिका भाग-2 के अनुसार माह मार्च 2019 के अंत में विभिन्न योजनाओं में एक करोड़ 57 लाख 16 हजार 434 रुपये का अंतिम अवेशष पाया गया। इसका खर्च इसी वित्तीय बरस में होना चाहिए था। जिस राशि का खर्च ब्लॉक स्तर पर संभव न हो तो संबंधित राशि को डीआरडीए अन्यथा संबंधित विभाग को समर्पित कराने के निर्देश दिए हैं।
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जिससे अवशेष राशि का उपभोग उन परियोजनाओं पर किया जा सके जो कि धनाभाव के कारण प्रभावित हो रही हैं। अनुदान पंजिका के अनुसार एक करोड़ 57 लाख 16 हजार 434 रुपये अवशेष है। बैंक पास बुक के अनुसार एक करोड़ 61 लाख 22 हजार 402 रुपये शेष है।
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इस प्रकार चार लाख नौ हजार 722 रुपये का अंतर पाया गया। अंतर का कारण अनाहरित चेकें हैं। ब्लॉक में बीते वित्तीय बरस में सम्प्रेक्षण तिथि तक अकुशल श्रमिकों के लिए कुल 20305 मस्टर रोल जारी किए गए। जिसके सापेक्ष 19889 मस्टर रोलों का उपभोग सुनिश्चित किया गया एवं 388 मस्टर रोलों को शून्य किया गया।
इतनी अधिक संख्या में एमआर को शून्य करने से समय एवं स्टेशनरी का अपव्यय किया गया। वरिष्ठ लेखा परीक्षक अनुराग कुमार श्रीवास्तव ने निर्देश दिए हैं कि बीडीओ द्वारा भविष्य में उन्हीं कार्यों के लिए एमआर जारी किए जाए जो कार्य किए जाने योग्य हो।