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Sitapur News: सतुवाही अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
Fri, 17 Apr 2026 11:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:54 PM IST
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नैमिषारण्य चक्रतीर्थ में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
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नैमिषारण्य। सतुवाही अमावस्या पर्व पर नैमिषारण्य स्थित चक्रतीर्थ और आदि गंगा गोमती नदी में ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं स्नान शुरू कर दिया। दोपहर तक करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ व गोमती नदी में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद पूजन व दान किया।
सतुवाही अमावस्या के दिन सत्तू दान करने का विशेष महत्व होने की वजह से श्रद्धालुओं परंपरा के अनुसार सतुआ का दान किया। इसके बाद पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध आदि पितृकर्म भी किए। इस पर्व के लिए बृहस्पतिवार से ही श्रद्धालुओं का नैमिषारण्य में आगमन शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद आदिशक्ति मां ललिता देवी मंदिर, सूत गद्दी, देव-देवेश्वर मंदिर, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, व्यास गद्दी, देवपुरी आदि मंदिरों में माथा टेका और पूजा-अर्चना कर मनौती मांगी। सत्तू दान का महत्व होने की वजह से जौ का सत्तू 80 से 100 रुपये प्रति किलो तथा चने का सत्तू 100 से 130 रुपये प्रति किलो की दर से बिका।
अब दान में कम मिलता है सत्तू
तीर्थ पुरोहित त्रिलोकीनाथ ने बताया कि अब सतुवाही अमावस्या पर दान में उतना सत्तू नहीं मिलता, जितना पहले मिलता था। पहले 10 से 15 रुपये प्रतिकिलो दाम पर सत्तू मिल जाता था। मौजूदा समय में सत्तू महंगा होने की वजह से लोग कम दान करते हैं।
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सतुवाही अमावस्या के दिन सत्तू दान करने का विशेष महत्व होने की वजह से श्रद्धालुओं परंपरा के अनुसार सतुआ का दान किया। इसके बाद पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध आदि पितृकर्म भी किए। इस पर्व के लिए बृहस्पतिवार से ही श्रद्धालुओं का नैमिषारण्य में आगमन शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद आदिशक्ति मां ललिता देवी मंदिर, सूत गद्दी, देव-देवेश्वर मंदिर, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, व्यास गद्दी, देवपुरी आदि मंदिरों में माथा टेका और पूजा-अर्चना कर मनौती मांगी। सत्तू दान का महत्व होने की वजह से जौ का सत्तू 80 से 100 रुपये प्रति किलो तथा चने का सत्तू 100 से 130 रुपये प्रति किलो की दर से बिका।
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अब दान में कम मिलता है सत्तू
तीर्थ पुरोहित त्रिलोकीनाथ ने बताया कि अब सतुवाही अमावस्या पर दान में उतना सत्तू नहीं मिलता, जितना पहले मिलता था। पहले 10 से 15 रुपये प्रतिकिलो दाम पर सत्तू मिल जाता था। मौजूदा समय में सत्तू महंगा होने की वजह से लोग कम दान करते हैं।
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