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परिक्रमा पूरी कर शुरू की घर वापसी
अमर उजाला ब्यूरो/ सीतापुर
Updated Tue, 22 Mar 2016 09:06 PM IST
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परिक्रमा के बाद डुबकी लगाते लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा को निकले श्रद्धालुओं ने मंगलवार को मिश्रिख होली मेले से घर वापसी शुरू कर दी। परंपरा रही है कि होलिका दहन के दिन श्रद्धालु घरों को वापसी करते हैं। ऐसे में मिश्रिख में डेरा डाले श्रद्धालुओं ने विभिन्न वाहनों से अपने घरों का रुख किया।
10 मार्च की भोर डंका बजने के बाद नैमिष से लोगों ने 84 कोसी परिक्रमा के लिए प्रस्थान किया। विभिन्न पड़ावों पर डेरा डालते हुए श्रद्धालुओं का दल 19 मार्च को मिश्रिख पहुंच गया था। यहां पर श्रद्धालुओं ने डेरा डालकर रामधुन शुरू कर दी थी, जहां संत व महंतों ने डेरा डाला था, वहीं क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने पंच कोसी परिक्रमा प्रारंभ कर दी थी।
परंपरा है कि होली दहन के साथ मिश्रिख होली परिक्रमा मेले का समापन होता है। इसी परंपरा के तहत मंगलवार को श्रद्धालुओं ने अपने डेरों को उजाड़ना शुरू कर दिया। श्रद्धालुओं ने यहां दधीचि कुंड में स्नान किया और उसके बाद महर्षि दधीचि के मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की।
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मंगल कामना करने के बाद श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली, बसों व किराए के वाहनों में सवार होकर भगवान श्रीराम का जयघोष लगाते हुए अपने घरों के लिए रवाना हो गए। हर तरफ मार्ग भक्ति रंग में रंगे हुए नजर आ रहे थे।
संत महंत बुधवार को करेंगे कूच
जहां घर-परिवार वाले श्रद्धालु मंगलवार को ही मेले से अपने घरों के लिए कूंच कर गए। वहीं संत व महंतों ने डेरा डाल रखा है। संत व महंत मिश्रिख में होलिका दहन करने के बाद रंग खेलकर अपने मठ, आश्रमों में वापसी करेंगे। दधीचि की नगरी में संत व महंतों की होली देखने का अलग ही आनंद होता है।
मिश्रिख में बुधवार की भोर होलिका दहन की परंपरा निभाई जाएगी। संत व महंत होलिका तापने के साथ रंगों की होली खेलेंगे। संत व महंत दधीचि कुंड में डुबकी लगाएंगे, मंदिरोें में पूजा अर्चना करेंगे, जिसके बाद वे अपने मठ व आश्रमों को रवाना होंगे।
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10 मार्च की भोर डंका बजने के बाद नैमिष से लोगों ने 84 कोसी परिक्रमा के लिए प्रस्थान किया। विभिन्न पड़ावों पर डेरा डालते हुए श्रद्धालुओं का दल 19 मार्च को मिश्रिख पहुंच गया था। यहां पर श्रद्धालुओं ने डेरा डालकर रामधुन शुरू कर दी थी, जहां संत व महंतों ने डेरा डाला था, वहीं क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने पंच कोसी परिक्रमा प्रारंभ कर दी थी।
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परंपरा है कि होली दहन के साथ मिश्रिख होली परिक्रमा मेले का समापन होता है। इसी परंपरा के तहत मंगलवार को श्रद्धालुओं ने अपने डेरों को उजाड़ना शुरू कर दिया। श्रद्धालुओं ने यहां दधीचि कुंड में स्नान किया और उसके बाद महर्षि दधीचि के मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की।
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मंगल कामना करने के बाद श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली, बसों व किराए के वाहनों में सवार होकर भगवान श्रीराम का जयघोष लगाते हुए अपने घरों के लिए रवाना हो गए। हर तरफ मार्ग भक्ति रंग में रंगे हुए नजर आ रहे थे।
संत महंत बुधवार को करेंगे कूच
जहां घर-परिवार वाले श्रद्धालु मंगलवार को ही मेले से अपने घरों के लिए कूंच कर गए। वहीं संत व महंतों ने डेरा डाल रखा है। संत व महंत मिश्रिख में होलिका दहन करने के बाद रंग खेलकर अपने मठ, आश्रमों में वापसी करेंगे। दधीचि की नगरी में संत व महंतों की होली देखने का अलग ही आनंद होता है।
मिश्रिख में बुधवार की भोर होलिका दहन की परंपरा निभाई जाएगी। संत व महंत होलिका तापने के साथ रंगों की होली खेलेंगे। संत व महंत दधीचि कुंड में डुबकी लगाएंगे, मंदिरोें में पूजा अर्चना करेंगे, जिसके बाद वे अपने मठ व आश्रमों को रवाना होंगे।