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श्रद्धालुओं ने तीसरे पड़ाव पर जमाया डेरा
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तीसरे पड़ाव हरदोई जिले के नगवां कोथावां की ओर जाते परिक्रमार्थी। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। 84 कोसी परिक्रमा अपनी आस्था व भव्यता के साथ तीसरे पड़ाव हरदोई जनपद के नगवां कोथावां पहुंची। परिक्रमार्थियों के कोथावां पहुंचते ही वहां पर मेले जैसा माहौल दिखाई दिया। स्थानीय निवासियों की ओर से परिक्रमार्थियों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। परिक्रमा में साधु संत पूजा पाठ करते हुए दिखाई दिए।
शनिवार भोर को परिक्रमा सुबह दूसरे पड़ाव हरैय्या से चलकर कोथावां के पावन हत्याहरण तीर्थ पहुंची। श्रद्धालुओं ने पावन हत्याहरण तीर्थ में स्नान कर तीर्थ पुरोहितों को दक्षिणा दी। नगवां कोथावां नागवंशीय राजाओं का स्थान माना जाता है। नगवां पद्वनाभ नागराज का स्थान है। यह गोमती नदी से आठ किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में स्थित है।
श्रद्धालुओं ने परिक्रमा पथ पर विरजा तीर्थ, गिरजा तीर्थ, हत्याहरण तीर्थ व नर्मदेश्वर महादेव का दर्शन पूजन किया। दोपहर होते-होते कोथावां में मेले जैसा माहौल दिखाई दिया। अब वह यहां पर रातभर रुककर भजन कीर्तन करेंगे। रविवार भोर को वह अपने चौथे पड़ाव गिरधरपुर उमरारी के लिए प्रस्थान करेंगे।
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कथाओं को सुनने में मस्त रहे श्रद्धालु
तीसरे पड़ाव पर पुष्कर मठ, दंडी आश्रम, अस्सी घाट बनारस के तत्वावधान में भागवत महापुराण कथा व संत समागम के तहत संतोष शाहाबादी के पंडाल में भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा व्यास पंडित दीपेश पाठक ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा के प्रसंगों का श्रवण कराया। हत्याहरण तीर्थ में राम के प्रसंग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राम के लिए राज्य छोड़कर जंगल जाने का वरदान मांगने वाली कैकेयी के प्रति राम के मन में कभी कोई दुर्भाव नहीं रहा।
उनका जीवन मानवीय मूल्यों की सीख देता है। उन्होंने कहा कि प्रभु की भावना हमेशा सर्वश्रेष्ठ रही है। वन से लौटकर भी वे सीधे कैकेयी से मिलने उनके भवन में गए। झांसी की मंदाकिनी ने प्रभु की उदारता का बखान करते हुए कहा कि वे दीनबंधु हैं। इसी तरह तमाम कथाएं पड़ाव पर चलती रही।
आज इन तीर्थस्थलों का दर्शन करेंगे श्रद्धालु
परिक्रमा रविवार को अगले पड़ाव गिरधरपुर उमरारी के लिए प्रस्थान करेगी। 84 कोसीय परिक्रमा के तहत चौथे पड़ाव की इस यात्रा में परिक्रमार्थी परिक्रमा मार्ग में साध्यामृत, गोपी तीर्थ, सिद्ध तीर्थ, निर्मोबन तुम्बुरु आदि प्रमुख तीर्थ और धर्मस्थलों के दर्शन प्राप्त करेंगे। वहां पर पूजा अर्चना करेंगे।
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शनिवार भोर को परिक्रमा सुबह दूसरे पड़ाव हरैय्या से चलकर कोथावां के पावन हत्याहरण तीर्थ पहुंची। श्रद्धालुओं ने पावन हत्याहरण तीर्थ में स्नान कर तीर्थ पुरोहितों को दक्षिणा दी। नगवां कोथावां नागवंशीय राजाओं का स्थान माना जाता है। नगवां पद्वनाभ नागराज का स्थान है। यह गोमती नदी से आठ किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में स्थित है।
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श्रद्धालुओं ने परिक्रमा पथ पर विरजा तीर्थ, गिरजा तीर्थ, हत्याहरण तीर्थ व नर्मदेश्वर महादेव का दर्शन पूजन किया। दोपहर होते-होते कोथावां में मेले जैसा माहौल दिखाई दिया। अब वह यहां पर रातभर रुककर भजन कीर्तन करेंगे। रविवार भोर को वह अपने चौथे पड़ाव गिरधरपुर उमरारी के लिए प्रस्थान करेंगे।
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कथाओं को सुनने में मस्त रहे श्रद्धालु
तीसरे पड़ाव पर पुष्कर मठ, दंडी आश्रम, अस्सी घाट बनारस के तत्वावधान में भागवत महापुराण कथा व संत समागम के तहत संतोष शाहाबादी के पंडाल में भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा व्यास पंडित दीपेश पाठक ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा के प्रसंगों का श्रवण कराया। हत्याहरण तीर्थ में राम के प्रसंग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राम के लिए राज्य छोड़कर जंगल जाने का वरदान मांगने वाली कैकेयी के प्रति राम के मन में कभी कोई दुर्भाव नहीं रहा।
उनका जीवन मानवीय मूल्यों की सीख देता है। उन्होंने कहा कि प्रभु की भावना हमेशा सर्वश्रेष्ठ रही है। वन से लौटकर भी वे सीधे कैकेयी से मिलने उनके भवन में गए। झांसी की मंदाकिनी ने प्रभु की उदारता का बखान करते हुए कहा कि वे दीनबंधु हैं। इसी तरह तमाम कथाएं पड़ाव पर चलती रही।
आज इन तीर्थस्थलों का दर्शन करेंगे श्रद्धालु
परिक्रमा रविवार को अगले पड़ाव गिरधरपुर उमरारी के लिए प्रस्थान करेगी। 84 कोसीय परिक्रमा के तहत चौथे पड़ाव की इस यात्रा में परिक्रमार्थी परिक्रमा मार्ग में साध्यामृत, गोपी तीर्थ, सिद्ध तीर्थ, निर्मोबन तुम्बुरु आदि प्रमुख तीर्थ और धर्मस्थलों के दर्शन प्राप्त करेंगे। वहां पर पूजा अर्चना करेंगे।