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Sitapur News: सीतापुर की पेट यार्न से बनी डिजाइनर दरियां वैश्विक बाजार में छाईं

Fri, 09 Oct 2026 01:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Fri, 09 Oct 2026 01:12 AM IST
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Designer durries made from PET yarn in Sitapur have taken the global market by storm
खैराबाद में प्लास्टिक बोतल को रीसाइक्लिंग करके धागे से बनी पेटयार्न की दरियां ।
उदय सिंह/जयमल सिंह
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सीतापुर। जिन प्लास्टिक की बोतलों को बेकार समझकर कचरे में फेंक दिया जाता है, उन्हीं से तैयार धागे से सीतापुर के हुनरमंद बुनकर डिजाइनर दरियां बना रहे हैं। पेट यार्न से बनी हस्तनिर्मित दरियां वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। अमेरिका की वॉलमार्ट कंपनी से मिले पांच करोड़ रुपये के ऑर्डर को यहां के निर्यातक पूरा करने में जुटे हैं। यूरोपीय देशों में भी इन दरियों की मांग बढ़ रही है। निर्यातकों को भविष्य में करीब 20 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।

सीतापुर की हस्तनिर्मित डिजाइनर दरियों की वैश्विक बाजार में पहले से पहचान है। अब रीसाइकिल प्लास्टिक से बने पेट यार्न से तैयार दरियां विदेशी खरीदारों को आकर्षित कर रही हैं। प्लास्टिक की बोतलों को रीसाइकिल कर पहले फाइबर और फिर धागा तैयार किया जाता है। इसी धागे से स्थानीय बुनकर ऑर्डर के अनुसार डिजाइनर दरियां बुनते हैं।
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निर्यातकों के मुताबिक, विदेशी खरीदार प्लास्टिक की बोतलों से तैयार धागे से बनी दरियां देखकर हैरान रह जाते हैं। जब उन्हें इनके हस्तनिर्मित होने की जानकारी मिलती है तो वे इन्हें पसंद करते हैं। निर्यातक हरियाणा के पानीपत से 170 रुपये प्रति किलो की दर से पेट यार्न मंगाते हैं। सीतापुर में प्रतिमाह करीब 20 हजार किलो पेट यार्न की दरियां तैयार की जा रही हैं।
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सहायक आयुक्त उद्योग संजीव सिंह ने बताया कि पेट यार्न से बनी दरियों की विदेशों में मांग बढ़ रही है। सरकार की ओर से निर्यातकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

बारिश में खराब नहीं होतीं पेट यार्न की दरियां

स्टालियन होम फैशन के निर्यातक सुनील मिश्र ने बताया कि पेट यार्न से बनी दरियां बारिश में खराब नहीं होतीं। गंदी होने पर इन्हें धोया भी जा सकता है। कपड़े के धागे से बनी दरियों की तुलना में ये अधिक टिकाऊ होती हैं। इन्हीं खूबियों के कारण अमेरिका और यूरोपीय देशों में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। भविष्य में करीब 20 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।

ऐसे तैयार होता है पेट यार्न

प्लास्टिक की बोतलों को रीसाइकिल कर पहले उनके चिप्स बनाए जाते हैं। इसके बाद प्लांट में इनसे फाइबर और फिर धागा तैयार किया जाता है। इस धागे से कारपेट, दरी, बाथ मैट और शॉल समेत कई उत्पाद बनाए जाते हैं। पेट यार्न से बने उत्पादों की देश-विदेश में अच्छी मांग है। रीसाइकिल प्लास्टिक से तैयार उत्पाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


हस्तकला के दम पर चीन को चुनौती

अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में सीतापुर की हस्तनिर्मित दरियों की मांग बनी हुई है। यहां के बुनकर अपनी पारंपरिक हस्तकला और आकर्षक डिजाइन के दम पर चीन में मशीनों से बनने वाली दरियों को चुनौती दे रहे हैं। दरी निर्यातक हाफिज अकरम ने बताया कि चीन की तुलना में सीतापुर की हस्तनिर्मित दरियों को अमेरिका, यूरोपीय और खाड़ी देशों में अच्छी मांग मिल रही है।
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