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जनपद में भी 31 नवजात की हो चुकी मौत
Updated Wed, 06 Sep 2017 02:15 AM IST
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एक माह में 31 नवजात की हो चुकी मौत
सीतापुर। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के बाद फर्रुखाबाद के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 49 बच्चों की मौत का ताजा मामला सामने आया है।
नवजात बच्चों की मौत के मामले में जनपद के आंकड़े भी परेशान करने वाले हैं। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में पिछले माह 31 नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है।
इनकी मौत प्रसव के पांच दिन के अंदर हुई है। इन्हें सांस लेने में तकलीफ, कम वजन व पीलिया जैसी समस्याएं थीं। जनपद में नवजात की जान बचाने के लिए केवल महिला चिकित्सालय में ही व्यवस्था है।
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यहां पर नवजात की केयर के लिए एसएनसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई) स्थापित है। इकाई के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई से 21 अगस्त के बीच 31 नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है।
अधिकतर उन बच्चों की मौत हुई है जिनका जन्म महिला चिकित्सालय से इतर सीएचसी या अन्य चिकित्सालयों में हुआ है। चिकित्सकों का कहना है इस यूनिट तक आते-आते उन्हें इंन्फेक्शन सहित कई अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं।
भरपूर करते है प्रयास
नवजात की देखभाल के लिए यूनिट स्थापित है। रही बात एक माह में 31 बच्चों की मौत की तो लगभग हर जनपद का यही आंकड़ा रहता है। यहां पर आने वाले बहुत से बच्चों को तत्काल चिकित्सा देकर जान बचाई जाती है। वहीं कुछ बच्चों की बीमारी के चलते मौत हो जाती है।
डॉ. धुव्रराज सिंह, सीएमओ
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सीतापुर। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के बाद फर्रुखाबाद के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 49 बच्चों की मौत का ताजा मामला सामने आया है।
नवजात बच्चों की मौत के मामले में जनपद के आंकड़े भी परेशान करने वाले हैं। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में पिछले माह 31 नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है।
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इनकी मौत प्रसव के पांच दिन के अंदर हुई है। इन्हें सांस लेने में तकलीफ, कम वजन व पीलिया जैसी समस्याएं थीं। जनपद में नवजात की जान बचाने के लिए केवल महिला चिकित्सालय में ही व्यवस्था है।
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यहां पर नवजात की केयर के लिए एसएनसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई) स्थापित है। इकाई के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई से 21 अगस्त के बीच 31 नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है।
अधिकतर उन बच्चों की मौत हुई है जिनका जन्म महिला चिकित्सालय से इतर सीएचसी या अन्य चिकित्सालयों में हुआ है। चिकित्सकों का कहना है इस यूनिट तक आते-आते उन्हें इंन्फेक्शन सहित कई अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं।
भरपूर करते है प्रयास
नवजात की देखभाल के लिए यूनिट स्थापित है। रही बात एक माह में 31 बच्चों की मौत की तो लगभग हर जनपद का यही आंकड़ा रहता है। यहां पर आने वाले बहुत से बच्चों को तत्काल चिकित्सा देकर जान बचाई जाती है। वहीं कुछ बच्चों की बीमारी के चलते मौत हो जाती है।
डॉ. धुव्रराज सिंह, सीएमओ