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दो घंटे तक कांबिग, नहीं लगा भेड़िए का सुराग
Updated Wed, 12 Sep 2018 12:19 AM IST
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वन विभाग की टीम ने सदरपुर इलाके के ग्रामीणों को सतर्कता बरतने की दी हिदायत
थानगांव (सीतापुर)। सदरपुर थानाक्षेत्र के बसुदहा गांव में वन विभाग की टीम ने मंगलवार को भी कॉम्बिंग की। इस दौरान टीम को हमलावर जानवर के पैरों के निशान मिले हैं। अफसरों ने गहनता से छानबीन की। हालांकि हमलावर जानवर का कोई सुराग टीम के हाथ नहीं लगा है।
जंगली जानवर के हमले का तरीका और ग्रामीणों द्वारा उसके संबंध में दी गई जानकारियों के आधार पर विभागीय अफसर भेड़िया होने की बात कह रहे हैं। अफसरों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। मंगलवार की दोपहर करीब 12 बजे वन विभाग की टीम बसुदहा गांव पहुंची।
उप वन अधिकारी रुस्तम परवेज की अगुवाई में बिसवां रेंजर रामानंद अवस्थी, वन दरोगा अमित कटियार, हिमांशु वर्मा, फारेस्टर प्रद्युम्न त्रिपाठी की टीम को गांव के बाहर खेतों में हमलावर जानवर के पैरों के निशान मिले हैं। टीम ने निशान का बारीकी से अवलोकन किया।
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करीब दो घंटे तक इलाके में कॉम्बिंग के दौरान हमलावर का कोई सुराग नहीं मिला। टीम ने गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक कर सतर्कता बरतने की हिदायत दी है। बच्चों को अकेला न छोड़ने की बात कहकर खेतों में समूह में जाने की बात कही है।
अफसरों ने ग्रामीणों को आश्वस्त कराया कि वह बराबर इलाके में निगाह बनाए हुए हैं। डीएफओ डॉ. अनिरुद्ध पांडेय ने बताया कि बाढ़ आने पर जंगली जानवरों की खोह में पानी भर जाने से वह खेतों में शरण लेते हैं। यह गांव नदी की तलहटी में है।
इसलिए कोई जानवर वहां पहुंच गया। ग्रामीणों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, हमलावर जानवर भेड़िया होने की संभावना अधिक है। क्योंकि भेड़िया अपने शिकार पर हमला करने के बाद उसे अपना निवाला बना लेता हैं। शिकार का कोई अवशेष नहीं मिलता। हम लगातार गांव व आसपास क्षेत्र में निगाह रख रहे हैं।
नवजात को कुत्तों ने बनाया निवाला
लहरपुर। कोतवाली तालगांव इलाके के फत्तेपुर में तालाब के किनारे मंगलवार को बच्चों ने नवजात शिशु पड़ा देखा। उसे कुत्ते नोंच रहे थे। बच्चों ने गांव में सूचना दी। ग्रामीणों के मौके पर पहुंचने से पहले कुत्ते नवजात का शव लेकर भाग गए थे। इस घटना से गांव में अटकलों का बाजार गर्म है।
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थानगांव (सीतापुर)। सदरपुर थानाक्षेत्र के बसुदहा गांव में वन विभाग की टीम ने मंगलवार को भी कॉम्बिंग की। इस दौरान टीम को हमलावर जानवर के पैरों के निशान मिले हैं। अफसरों ने गहनता से छानबीन की। हालांकि हमलावर जानवर का कोई सुराग टीम के हाथ नहीं लगा है।
जंगली जानवर के हमले का तरीका और ग्रामीणों द्वारा उसके संबंध में दी गई जानकारियों के आधार पर विभागीय अफसर भेड़िया होने की बात कह रहे हैं। अफसरों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। मंगलवार की दोपहर करीब 12 बजे वन विभाग की टीम बसुदहा गांव पहुंची।
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उप वन अधिकारी रुस्तम परवेज की अगुवाई में बिसवां रेंजर रामानंद अवस्थी, वन दरोगा अमित कटियार, हिमांशु वर्मा, फारेस्टर प्रद्युम्न त्रिपाठी की टीम को गांव के बाहर खेतों में हमलावर जानवर के पैरों के निशान मिले हैं। टीम ने निशान का बारीकी से अवलोकन किया।
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करीब दो घंटे तक इलाके में कॉम्बिंग के दौरान हमलावर का कोई सुराग नहीं मिला। टीम ने गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक कर सतर्कता बरतने की हिदायत दी है। बच्चों को अकेला न छोड़ने की बात कहकर खेतों में समूह में जाने की बात कही है।
अफसरों ने ग्रामीणों को आश्वस्त कराया कि वह बराबर इलाके में निगाह बनाए हुए हैं। डीएफओ डॉ. अनिरुद्ध पांडेय ने बताया कि बाढ़ आने पर जंगली जानवरों की खोह में पानी भर जाने से वह खेतों में शरण लेते हैं। यह गांव नदी की तलहटी में है।
इसलिए कोई जानवर वहां पहुंच गया। ग्रामीणों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, हमलावर जानवर भेड़िया होने की संभावना अधिक है। क्योंकि भेड़िया अपने शिकार पर हमला करने के बाद उसे अपना निवाला बना लेता हैं। शिकार का कोई अवशेष नहीं मिलता। हम लगातार गांव व आसपास क्षेत्र में निगाह रख रहे हैं।
नवजात को कुत्तों ने बनाया निवाला
लहरपुर। कोतवाली तालगांव इलाके के फत्तेपुर में तालाब के किनारे मंगलवार को बच्चों ने नवजात शिशु पड़ा देखा। उसे कुत्ते नोंच रहे थे। बच्चों ने गांव में सूचना दी। ग्रामीणों के मौके पर पहुंचने से पहले कुत्ते नवजात का शव लेकर भाग गए थे। इस घटना से गांव में अटकलों का बाजार गर्म है।