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तुर्की से लौटे यात्री में कोरोना, संपर्क में आए डिप्टी सीएमएस समेत सात आइसोलेट
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सीतापुर। कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के बीच गुरुवार की सुबह लखनऊ से आए फोन कॉल ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया। तुर्की से लौटे पड़ोसी जिले लखीमपुर के मैगलगंज इलाके के एक यात्री में कोरोना की पुष्टि की सूचना से जिले का सरकारी अमला हरकत में आ गया।
इसकी वजह थी कि मरीज के संपर्क में जिला अस्पताल के डिप्टी सीएमएस, शहर के एक नामचीन डॉक्टर, महिला काउंसर समेत पांच स्वास्थ्यकर्मी और पिता-पुत्री आ चुके थे।
सातों लोगों को कोरोना का संदिग्ध मरीज मानते हुए आनन-फानन में जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। डिप्टी सीएमएस और डॉक्टर का सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है।
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सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने बताया कि मैगलगंज का एक व्यक्ति पिछले दिनों तुर्की गया था, जहां से छह मार्च को वह दिल्ली एयरपोर्ट वापस लौटा। जांच के बाद उसे घर जाने दिया गया। सात मार्च को वह घर आ गया।
कुछ दिन बाद उसे बुखार, जुकाम, खांसी की दिक्कत हुई। बताते हैं कि दवा लेने के लिए वह महोली कोतवाली के सामने स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में गया, जहां पर डॉक्टर नहीं मिले, लेकिन कंपाउंडर ने परेशानी बताने पर दवा दे दी।
इसके बाद यात्री घर चला गया, पर फायदा नहीं हुआ। 16 मार्च को वह जिला अस्पताल पहुंचा, जहां उसने खुद को डिप्टी सीएमएस को दिखाया। उन्होंने पर्चे पर दवा लिख दी। यात्री ने दवा खाई, पर सुधार नहीं हुआ।
17 मार्च को वह शहर के लोहारबाग स्थित एक प्रख्यात चिकित्सक के पास पहुंचा, जहां पर दवा ली, फिर भी हालत जस की तस रही। परेशान होकर वह 18 मार्च को लखनऊ ट्रॉॅमा सेंटर में पहुंचा और अपनी समस्या बताई। उसके लक्षण कोरोना के लग रहे थे। इसी आधार पर लैब में उसकी जांच की गई। जांच के बाद शक सच में बदल गया। 19 मार्च की सुबह आई रिपोर्ट में कोरोना महामारी की पुष्टि हुई।
इसके बाद ट्रॉमा सेंटर प्रशासन के होश उड़ गए। अब तक उसने कहां-कहां, किन-किन डॉक्टरों को दिखाया है और किस-किस के संपर्क में रहा, इसकी जानकारी लेने के बाद सूचना जिले के स्वास्थ्य विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन से लेकर, स्वास्थ्य विभाग तक के होश उड़ गए।
मरीज के संपर्क में आने वाले जिला अस्पताल के डिप्टी सीएमएस, नामचीन डॉक्टर, अस्पताल में तैनात महिला काउंसलर, महोली के प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर, वहीं का कंपाउंडर, मरीज के दो रिश्तेदार (पिता-पुत्री) को रैपिड रिस्पांस की टीम ने जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करा दिया है।
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इसकी वजह थी कि मरीज के संपर्क में जिला अस्पताल के डिप्टी सीएमएस, शहर के एक नामचीन डॉक्टर, महिला काउंसर समेत पांच स्वास्थ्यकर्मी और पिता-पुत्री आ चुके थे।
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सातों लोगों को कोरोना का संदिग्ध मरीज मानते हुए आनन-फानन में जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। डिप्टी सीएमएस और डॉक्टर का सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है।
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सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने बताया कि मैगलगंज का एक व्यक्ति पिछले दिनों तुर्की गया था, जहां से छह मार्च को वह दिल्ली एयरपोर्ट वापस लौटा। जांच के बाद उसे घर जाने दिया गया। सात मार्च को वह घर आ गया।
कुछ दिन बाद उसे बुखार, जुकाम, खांसी की दिक्कत हुई। बताते हैं कि दवा लेने के लिए वह महोली कोतवाली के सामने स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में गया, जहां पर डॉक्टर नहीं मिले, लेकिन कंपाउंडर ने परेशानी बताने पर दवा दे दी।
इसके बाद यात्री घर चला गया, पर फायदा नहीं हुआ। 16 मार्च को वह जिला अस्पताल पहुंचा, जहां उसने खुद को डिप्टी सीएमएस को दिखाया। उन्होंने पर्चे पर दवा लिख दी। यात्री ने दवा खाई, पर सुधार नहीं हुआ।
17 मार्च को वह शहर के लोहारबाग स्थित एक प्रख्यात चिकित्सक के पास पहुंचा, जहां पर दवा ली, फिर भी हालत जस की तस रही। परेशान होकर वह 18 मार्च को लखनऊ ट्रॉॅमा सेंटर में पहुंचा और अपनी समस्या बताई। उसके लक्षण कोरोना के लग रहे थे। इसी आधार पर लैब में उसकी जांच की गई। जांच के बाद शक सच में बदल गया। 19 मार्च की सुबह आई रिपोर्ट में कोरोना महामारी की पुष्टि हुई।
इसके बाद ट्रॉमा सेंटर प्रशासन के होश उड़ गए। अब तक उसने कहां-कहां, किन-किन डॉक्टरों को दिखाया है और किस-किस के संपर्क में रहा, इसकी जानकारी लेने के बाद सूचना जिले के स्वास्थ्य विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन से लेकर, स्वास्थ्य विभाग तक के होश उड़ गए।
मरीज के संपर्क में आने वाले जिला अस्पताल के डिप्टी सीएमएस, नामचीन डॉक्टर, अस्पताल में तैनात महिला काउंसलर, महोली के प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर, वहीं का कंपाउंडर, मरीज के दो रिश्तेदार (पिता-पुत्री) को रैपिड रिस्पांस की टीम ने जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करा दिया है।