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कोविड की वजह से शिक्षा प्रभावित, बच्चों की बिगड़ी मनोदशा
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सीतापुर। पिछले दो साल में कोविड की वजह से प्रभावित हुई शिक्षा व्यवस्था का असर बच्चों पर पड़ा है। ऑनलाइन के बाद ऑफलाइन क्लासेज से बच्चों में जहां थकान, सरदर्द व अन्य समस्याएं बढ़ी है। वहीं कुछ बच्चे इससे जल्द उबर रहे है तो कुछ बच्चों को संभलने में थोड़ा समय लग रहा है। मनोचिकित्सक उन्हें चिकित्सक से तत्काल चिकित्सीय सलाह लेने की बात कह रहे हैं। कोरोना के कारण पिछले दो वर्ष में बच्चों की पढ़ाई खास प्रभावित हुई है। इससे बच्चे घर के अंदर ही रहकर अपनी ऑनलाइन पढ़ाई करते रहे। जब वह घर से बाहर नहीं निकले तो उनकी मनोदशा प्रभावित हुई है। अगर घर से निकले भी तो उन पर मास्क व हैंड सैनिटाइजर करने की तमाम तरह की पाबंदियां लगा दीं। घर पर रहने से एक तो उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई। वहीं वह बाहरी आवरण से दूर ही रहे।
अब जब ऑफलाइन क्लासेज की शुरुआत हो गई है तो बच्चों पर इसका असर पड़ता दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. प्रांशू अग्रवाल का कहना है ऑनलाइन के बाद ऑफलाइन से बच्चे स्कूल पहुंच रहे है तो इससे दिनचर्या में परिवर्तन आया है। बच्चों में थकान, सरदर्द व अन्य समस्याएं सामने आ रही है। कुछ बच्चे इन समस्याओं से जल्द उबर रहे है तो कुछ बच्चों में यह समस्या बढ़ रही है। ऐसे में बच्चों के अभिभावकों को अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। उनकी सलाह के अनुसार ही काम करे। इससे बच्चा सही तरीके से अपनी पढ़ाई कर सकेगा।
घर पर नहीं लगता था मन
लगातार स्कूल बंद रहने से घर पर ही रहकर पढ़ाई कर रहा था। इससे घर पर मन नहीं लगता था। लेकिन मजबूरी में पढ़ाई करनी पड़ रही थी। अब यह समस्या दूर हो गई है। लगातार स्कूल जाने से थोड़ा परेशानी जरूर हुई। लेकिन अब यह दूर होती जा रही है।-सोमेंद्र
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ऑनलाइन थी मजबूरी
ऑनलाइन क्लासेज से पढ़ाई करना एक मजबूरी थी। अब स्कूल जाते है तो दोस्तों से मिलते है। गुरूजी से अच्छे से बातचीत करते है। इससे मन प्रसन्न रहता है। पढ़ाई भी बेहतर होती है। कुछ दिन स्कूल आने पर मायूसी लगी थी। लेकिन अब यह दूर हो रही है।-आलोक पांडेय
प्रभावित हुई दिनचर्या
कोविड के कारण जब बच्चे घर पर ही रहकर पढ़ाई की तो उनकी मनोदशा प्रभावित जरूर हुई है। यह स्थिति शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक के बच्चों में रही। लेकिन ग्रामीण में कम असर हुआ। क्योंकि वहां के लोग कोविड के प्रति जागरूक नहीं थे। वहां के बच्चे भी स्कूल कम ही पढ़ने जाते हैं। वह बाहर घूमते टहलते रहे। लेकिन शहर के बच्चे जागरूक होने से वह घर की अंदर रहे। इससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई। अगर पहले से बच्चा बीमार था तो स्कूल जाने पर उसे समस्याएं आ रही हैं। अगर सामान्य था तो कुछ दिन तक उसे समस्या रही। लेकिन अब वह सामान्य हो रहा है। अगर लगातार बच्चा परेशान हो रहा है तो उसे मनोचिकित्सक को दिखाएं। बच्चे की काउंसिलिंग करके उसको इलाज दिया जाएगा। जिससे कुछ दिन बाद बच्चा सामान्य हो जाएगा।-डॉ. प्रांशू अग्रवाल, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
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अब जब ऑफलाइन क्लासेज की शुरुआत हो गई है तो बच्चों पर इसका असर पड़ता दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. प्रांशू अग्रवाल का कहना है ऑनलाइन के बाद ऑफलाइन से बच्चे स्कूल पहुंच रहे है तो इससे दिनचर्या में परिवर्तन आया है। बच्चों में थकान, सरदर्द व अन्य समस्याएं सामने आ रही है। कुछ बच्चे इन समस्याओं से जल्द उबर रहे है तो कुछ बच्चों में यह समस्या बढ़ रही है। ऐसे में बच्चों के अभिभावकों को अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। उनकी सलाह के अनुसार ही काम करे। इससे बच्चा सही तरीके से अपनी पढ़ाई कर सकेगा।
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घर पर नहीं लगता था मन
लगातार स्कूल बंद रहने से घर पर ही रहकर पढ़ाई कर रहा था। इससे घर पर मन नहीं लगता था। लेकिन मजबूरी में पढ़ाई करनी पड़ रही थी। अब यह समस्या दूर हो गई है। लगातार स्कूल जाने से थोड़ा परेशानी जरूर हुई। लेकिन अब यह दूर होती जा रही है।-सोमेंद्र
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ऑनलाइन थी मजबूरी
ऑनलाइन क्लासेज से पढ़ाई करना एक मजबूरी थी। अब स्कूल जाते है तो दोस्तों से मिलते है। गुरूजी से अच्छे से बातचीत करते है। इससे मन प्रसन्न रहता है। पढ़ाई भी बेहतर होती है। कुछ दिन स्कूल आने पर मायूसी लगी थी। लेकिन अब यह दूर हो रही है।-आलोक पांडेय
प्रभावित हुई दिनचर्या
कोविड के कारण जब बच्चे घर पर ही रहकर पढ़ाई की तो उनकी मनोदशा प्रभावित जरूर हुई है। यह स्थिति शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक के बच्चों में रही। लेकिन ग्रामीण में कम असर हुआ। क्योंकि वहां के लोग कोविड के प्रति जागरूक नहीं थे। वहां के बच्चे भी स्कूल कम ही पढ़ने जाते हैं। वह बाहर घूमते टहलते रहे। लेकिन शहर के बच्चे जागरूक होने से वह घर की अंदर रहे। इससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई। अगर पहले से बच्चा बीमार था तो स्कूल जाने पर उसे समस्याएं आ रही हैं। अगर सामान्य था तो कुछ दिन तक उसे समस्या रही। लेकिन अब वह सामान्य हो रहा है। अगर लगातार बच्चा परेशान हो रहा है तो उसे मनोचिकित्सक को दिखाएं। बच्चे की काउंसिलिंग करके उसको इलाज दिया जाएगा। जिससे कुछ दिन बाद बच्चा सामान्य हो जाएगा।-डॉ. प्रांशू अग्रवाल, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल