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शांति भंग की कार्रवाई कर मजिस्ट्रेट को भेजा मामला
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सीतापुर। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले 40 घंटे से अधिक समय से गिरफ्तार होकर पीएसी के गेस्ट हाउस में बंद हैं। लेकिन पुलिस ने सोमवार को ही 151 और 107/16 की कार्रवाई उन पर कर दी थी। इसका नोटिस प्रियंका को भेजा गया था पर उन्होेंने इसका संज्ञान नहीं लिया गया।
प्रियंका गांधी पेंच में फंसा सकती हैं। पुलिस को यह पहले से ही पता था। लिहाजा पुलिस उसने पूरी तैयारी के साथ उन्हें गिरफ्तार किया। हरगांव थाने में प्रियंका गांधी समेत 11 लोगों पर 151 सीआरपीसी और 107/16 की कार्रवाई सिर्फ विभागीय अफसरों को छोड़कर किसी और को पता नहीं थी। इसलिए सवाल खड़े हो रहे थे कि पुलिस बिना किसी कार्रवाई के हिरासत में कैसे रख सकती है। लेकिन मंगलवार दोपहर तस्वीर साफ हो गई।
प्रियंका गांधी और उनके साथ रहे 10 अन्य लोगों को हरगांव में एक तरफ हिरासत में लिया गया और दूसरी तरफ केस दर्ज कर कागजी कार्रवाई को मजबूत करते हुए गिरफ्तारी दिखा दी गई।
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एसडीएम को भेजी गई चालान रिपोर्ट
प्रियंका गांधी समेत 11 लोगों पर कार्रवाई के बाद पुलिस ने चालान रिपोर्ट बनाकर सदर एसडीएम पीएल मौर्य को भेज दी। इसमें बताया गया है कि प्रियंका गांधी को लखीमपुर जाते समय रोका गया। नहीं मानी तो 151 सीआरपीसी में गिरफ्तार किया गया।
151 सीआरपीसी और 107/16 की कार्रवाई
कानून के जानकारों की माने 151 सीआरपीसी और 107/16 की कार्रवाई पुलिस मजबूत कड़ी मानती है। इसके तहत कार्रवाई करने के बाद पुलिस को खुद को सुरक्षित करने का एक तरह से हथियार से मिल जाता है। आगे कोई समस्या खड़ी होने पर पुलिस इसी को आधार बनाकर बढ़ती है।
एसडीएम को यह है यह अधिकार
अधिवक्ता आशीष गौर बताते हैं कि 151 की कार्रवाई के बाद पुलिस रिपोर्ट एसडीएम को भेजती है। इसके बाद एसडीएम के पास अधिकार होता है कि वह इस मामले में आरोपी को निजी मुचलके पर जमानत दे या फिर 14 दिन के लिए जेल भेज दे। वह किसी भी स्थान को अस्थाई जेल बनाकर उन्हें वहां रोक सकते हैं।
प्रियंका गांधी समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सभी लोग गेस्ट हाउस में हैं। अस्थाई जेल नहीं बनाई गई है। नोटिस प्रियंका गांधी को दिया गया है। उन्होंने इसका संज्ञान नहीं लिया है। इसमें बांड भरना होता है। प्रियंका गांधी समेत सभी लोग निगरानी में हैं। धारा 144 लागू है। शांति व्यवस्था को लेकर उन्हें रोका गया है। इस कार्रवाई के तहत समाधान न होने तक रोका जा सकता है। 24 घंटे से ज्यादा पुलिस नहीं रोक सकती है, लेकिन अब मामला मजिस्ट्रेट के पास आ गया है।
-पीएल मौर्य, एसडीएम सदर
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प्रियंका गांधी पेंच में फंसा सकती हैं। पुलिस को यह पहले से ही पता था। लिहाजा पुलिस उसने पूरी तैयारी के साथ उन्हें गिरफ्तार किया। हरगांव थाने में प्रियंका गांधी समेत 11 लोगों पर 151 सीआरपीसी और 107/16 की कार्रवाई सिर्फ विभागीय अफसरों को छोड़कर किसी और को पता नहीं थी। इसलिए सवाल खड़े हो रहे थे कि पुलिस बिना किसी कार्रवाई के हिरासत में कैसे रख सकती है। लेकिन मंगलवार दोपहर तस्वीर साफ हो गई।
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प्रियंका गांधी और उनके साथ रहे 10 अन्य लोगों को हरगांव में एक तरफ हिरासत में लिया गया और दूसरी तरफ केस दर्ज कर कागजी कार्रवाई को मजबूत करते हुए गिरफ्तारी दिखा दी गई।
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एसडीएम को भेजी गई चालान रिपोर्ट
प्रियंका गांधी समेत 11 लोगों पर कार्रवाई के बाद पुलिस ने चालान रिपोर्ट बनाकर सदर एसडीएम पीएल मौर्य को भेज दी। इसमें बताया गया है कि प्रियंका गांधी को लखीमपुर जाते समय रोका गया। नहीं मानी तो 151 सीआरपीसी में गिरफ्तार किया गया।
151 सीआरपीसी और 107/16 की कार्रवाई
कानून के जानकारों की माने 151 सीआरपीसी और 107/16 की कार्रवाई पुलिस मजबूत कड़ी मानती है। इसके तहत कार्रवाई करने के बाद पुलिस को खुद को सुरक्षित करने का एक तरह से हथियार से मिल जाता है। आगे कोई समस्या खड़ी होने पर पुलिस इसी को आधार बनाकर बढ़ती है।
एसडीएम को यह है यह अधिकार
अधिवक्ता आशीष गौर बताते हैं कि 151 की कार्रवाई के बाद पुलिस रिपोर्ट एसडीएम को भेजती है। इसके बाद एसडीएम के पास अधिकार होता है कि वह इस मामले में आरोपी को निजी मुचलके पर जमानत दे या फिर 14 दिन के लिए जेल भेज दे। वह किसी भी स्थान को अस्थाई जेल बनाकर उन्हें वहां रोक सकते हैं।
प्रियंका गांधी समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सभी लोग गेस्ट हाउस में हैं। अस्थाई जेल नहीं बनाई गई है। नोटिस प्रियंका गांधी को दिया गया है। उन्होंने इसका संज्ञान नहीं लिया है। इसमें बांड भरना होता है। प्रियंका गांधी समेत सभी लोग निगरानी में हैं। धारा 144 लागू है। शांति व्यवस्था को लेकर उन्हें रोका गया है। इस कार्रवाई के तहत समाधान न होने तक रोका जा सकता है। 24 घंटे से ज्यादा पुलिस नहीं रोक सकती है, लेकिन अब मामला मजिस्ट्रेट के पास आ गया है।
-पीएल मौर्य, एसडीएम सदर