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सिधौली-मिश्रिख मार्ग पर शव रख लगाया जाम
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सिधौली मिश्रिख मार्ग पर मंगलम चौराहे पर शव रख कर जाम लगाए परिजनों को समझाते विधायक। (संवाद)
- फोटो : SITAPUR
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संदना (सीतापुर)। लखनऊ के एक कोल्ड स्टोरेज में हुई दो मजदूरों की मौत के मामले ने रविवार को तूल पकड़ लिया। भोर में शव गांव पहुंचना तो परिवार व गांव के लोग प्रदर्शन करने लगे। मुआवजे की मांग को लेकर पहले दो घंटे तक गांव में शव रखे रहे, फिर ठेलिया से मंगलम चौराहे पर शव पहुंचा कर सिधौली-मिश्रिख मार्ग जाम कर दिया। इस बीच पुलिस व ग्रामीणों में धक्कामुक्की हुई। सैकड़ों ग्रामीण करीब चार घंटे तक चौराहे पर जाम लगाए रहे। वाहनों का आवागमन बाधित रहा। सूचना पर भारी पुलिस बल व प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए।
परिवार व गांव के लोग दोनों मृतकों के परिवारीजन को 10-10 लाख मुआवजा देने की मांग पर अड़े थे, लेकिन मछरेहटा विधायक के समझाने पर मान गए। 50-50 हजार रुपये दिलाकर विधायक ने पांच-पांच लाख रुपये व सरकारी मदद दिलाने का आश्वासन दिया। उसके बाद जाम खुलवाया जा सका। संदना इलाके के नंदवन गांव निवासी धर्मेंद्र (30) व मिश्रीलाल (28) लखनऊ के इंटौंजा स्थित एक कोल्ड स्टोरेज में अन्य मजदूरों के साथ काम करते थे। सूत्र बताते हैं कि कोल्ड स्टोरेज में शनिवार रात अमोनिया गैस के रिसाव से धमाका हुआ।
इसमें धर्मेंद्र व मिश्रीलाल की मौत हो गई, जबकि बाहर रहने वाले चार अन्य मजदूर जख्मी हो गए। पुलिस व कोल्ड स्टोरेज मालिक ने रात में ही दोनों मजदूरों के शव का पोस्टमार्टम करा रविवार भोर दोनों के शव गांव पहुंचा दिया। वहां क्षेत्र की पुलिस ने मृतकों के घर पहुंच कर शवों का अंतिम संस्कार कराने की बात कही, लेकिन परिवार के लोग 10-10 लाख रुपये मुआवजे की मांग करने लगे। करीब दो घंटे तक यह मामला गांव में चलता रहा, लेकिन जब कोई बात नहीं बनी तो ग्रामीणों ने दोनों शवों को ठेलिया में रखकर संदना इलाके के मंगलम चौराहे पर लाकर जाम लगा दिया। इस दौरान पुलिस ने रास्ते में ग्रामीणों को रोकने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने।
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विधायक ने मदद का आश्वासन देकर कराया शांत
सिधौली-मिश्रिख मार्ग जाम होने की खबर पाकर एसडीएम सिधौली, सीओ मिश्रिख व सिधौली सहित कई थानों की फोर्स मंगलम चौराहा पहुंची। काफी समझाया गया, लेकिन लोग नहीं माने। उसके बाद सिधौली के पूर्व विधायक मनीष रावत पहुंचे। उन्होंने भी परिवार वालों से बात की। इसी बीच मछरेहटा विधायक रामकृष्ण भार्गव गए।
उन्होंने परिवार वालों से बात की। विधायक ने दोनों मृतकों के परिवारीजन को 50-50 हजार रुपये नकद दिलाया और मंगलवार तक पांच-पांच लाख रुपये और दिलाने का आश्वासन दिया। भरोसा दिलाया कि सरकारी मदद भी दिलाई जाएगी। विधायक के समझाने पर परिवार के लोग मान गए। इसके बाद करीब चार घंटे बाद चौराहे से शव हटा कर गांव ले गए, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। जाम खुलने के बाद पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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परिवार व गांव के लोग दोनों मृतकों के परिवारीजन को 10-10 लाख मुआवजा देने की मांग पर अड़े थे, लेकिन मछरेहटा विधायक के समझाने पर मान गए। 50-50 हजार रुपये दिलाकर विधायक ने पांच-पांच लाख रुपये व सरकारी मदद दिलाने का आश्वासन दिया। उसके बाद जाम खुलवाया जा सका। संदना इलाके के नंदवन गांव निवासी धर्मेंद्र (30) व मिश्रीलाल (28) लखनऊ के इंटौंजा स्थित एक कोल्ड स्टोरेज में अन्य मजदूरों के साथ काम करते थे। सूत्र बताते हैं कि कोल्ड स्टोरेज में शनिवार रात अमोनिया गैस के रिसाव से धमाका हुआ।
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इसमें धर्मेंद्र व मिश्रीलाल की मौत हो गई, जबकि बाहर रहने वाले चार अन्य मजदूर जख्मी हो गए। पुलिस व कोल्ड स्टोरेज मालिक ने रात में ही दोनों मजदूरों के शव का पोस्टमार्टम करा रविवार भोर दोनों के शव गांव पहुंचा दिया। वहां क्षेत्र की पुलिस ने मृतकों के घर पहुंच कर शवों का अंतिम संस्कार कराने की बात कही, लेकिन परिवार के लोग 10-10 लाख रुपये मुआवजे की मांग करने लगे। करीब दो घंटे तक यह मामला गांव में चलता रहा, लेकिन जब कोई बात नहीं बनी तो ग्रामीणों ने दोनों शवों को ठेलिया में रखकर संदना इलाके के मंगलम चौराहे पर लाकर जाम लगा दिया। इस दौरान पुलिस ने रास्ते में ग्रामीणों को रोकने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने।
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विधायक ने मदद का आश्वासन देकर कराया शांत
सिधौली-मिश्रिख मार्ग जाम होने की खबर पाकर एसडीएम सिधौली, सीओ मिश्रिख व सिधौली सहित कई थानों की फोर्स मंगलम चौराहा पहुंची। काफी समझाया गया, लेकिन लोग नहीं माने। उसके बाद सिधौली के पूर्व विधायक मनीष रावत पहुंचे। उन्होंने भी परिवार वालों से बात की। इसी बीच मछरेहटा विधायक रामकृष्ण भार्गव गए।
उन्होंने परिवार वालों से बात की। विधायक ने दोनों मृतकों के परिवारीजन को 50-50 हजार रुपये नकद दिलाया और मंगलवार तक पांच-पांच लाख रुपये और दिलाने का आश्वासन दिया। भरोसा दिलाया कि सरकारी मदद भी दिलाई जाएगी। विधायक के समझाने पर परिवार के लोग मान गए। इसके बाद करीब चार घंटे बाद चौराहे से शव हटा कर गांव ले गए, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। जाम खुलने के बाद पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।