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नहीं मिल रहे यात्री, 15 बसों के पहिये थमे

Tue, 11 May 2021 11:10 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 11 May 2021 11:10 PM IST
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Can't find passengers, wheels of 15 buses stopped
सीतापुर। कोरोना काल में परिवहन निगम भी संकट के दौर से गुजर रहा है। संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के बीच मुसाफिर बसों में यात्रा करने से कतराने लगे हैं। रोडवेज को यात्री तलाशे नहीं मिल रहे हैं। यही वजह है कि रोडवेज घाटे की ओर जा रहा है और कमाई की बात तो दूर खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में 15 अनुबंधित बसें सरेंडर कर दी गई हैं। सीतापुर से लखनऊ और हरदोई रूट पर चलने वाली इन बसों के पहिए अब थम गए हैं।
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कोरोना के कहर का असर हर तरफ दिख रहा है। कोई भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में जिले के परिवहन निगम पर भी कोरोना का बड़ा असर पड़ा है। सामान्य दिनों में बस अड्डे पर बस के खड़े होते ही वह भर जाती थी। दिनभर यात्रियों से रोडवेज परिसर भरा रहता था। मुसाफिरों को बसें नहीं मिलती थी, लेकिन कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच दिन पर दिन रोडवेज बसों में सफर करने वाले यात्री कतराने लगे हैं। वहीं सरकार का आदेश भी है कि बसों में 50 फीसदी से अधिक यात्री लेकर न बिठाएं।
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यही वजह है कि रोडवेज लगातार घाटे में जा रहा है। सबसे अधिक असर सीतापुर से लखनऊ रूट पर पड़ा है। लखनऊ जाने से लोग बिल्कुल बच रहे हैं। हरदोई रूट पर भी सवारियां कम हुई हैं। सवारियों की घटती संख्या और 50 फीसदी से अधिक यात्रियों को बिठाने पर लगी रोक के बाद सीतापुर डिपो में चल रही 15 अनुबंधित बसें सरेंडर कर दी गई हैं।
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सीतापुर से लखनऊ रूट की 14 और हरदोई रूट की एक बस के पहिए ठप हो गए हैं। जिम्मेदारों का कहना है कि सवारियां नहीं मिलने की वजह से 15 बसों को सरेंडर कर दिया गया है। अगर हालात ऐसे ही रहें तो आने वाले समय में रोडवेज की भी कई बस सरेंडर हो सकती हैं।
टैक्स खत्म होते ही सरेंडर होंगी रोडवेज की कई बसें
निगम के जिम्मेदारों का कहना है कि रोडवेज की भी कई बसें सरेंडर हो सकती थीं, लेकिन टैक्स जमा होने की वजह से बसों को सड़क पर चलाया जा रहा है। आमदनी बिल्कुल नहीं हो पा रही है। हालत ये है कि खर्च निकालना तक मुश्किल हो रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो इसी महीने की आखिरी तारीख तक रोडवेज की कई बसें सरेंडर कर दी जाएंगी। उनका टैक्स भी नहीं जमा किया जाएगा।

रोडवेज लगातार घाटे में जा रहा है। यात्री सफर करने में कतरा रहे हैं। 50 फीसदी से अधिक मुसाफिरों को बस में लेकर चलने का आदेश नहीं हैं। इन्हीं वजहों से आमदनी कम हो रही है। लागत तक निकालना मुश्किल हो रहा है। 40 फीसदी ही यात्री बमुश्किल सफर कर पा रहे हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे तो निमग की भी कई बसों को सरेंडर करा दिया जाएगा।
- विमल राजन, एआरएम
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