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उफनाई नदियां, खुद ही उजाड़ रहे घर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:41 PM IST
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बारिश व बैराजों से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक पानी के चलते घाघरा व शारदा नदियां उफान पर हैं। हालांकि घाघरा अभी लाल निशान से 1.40 सेमी. नीचे बह रही है। नदी का पानी रेउसा क्षेत्र के 27 गांवों के मुहाने पर पहुंच चुका है। जबकि रामलाल पुरवा में पानी घुस गया।
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इससे तटीय क्षेत्र के लोग खुद ही अपने आशियानों को उजाड़ने लगे हैं। शनिवार को दुर्गापुरवा गांव में एक महिला कटान की चपेट में आ गई और पानी में बहने लगी, हालांकि आगे जाकर वह झाड़ियों में फंस गई। आननफानन ग्रामीणों ने उसकी जान बचाई। उधर, बैराजों से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
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घाघरा का कहर सबसे अधिक कोनी व दुर्गापुरवा गांव पर टूट रहा है। यहां नदी कटान कर रही है। दुर्गापुरवा गांव के राजितराम समेत तीन परिवारों ने अपने आशियानों को खुद ही उजाड़ना शुरू कर दिया है। गोड़ियन पुरवा के होली व मुन्ना ने भी घर खाली कर दिया है।
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छप्पर व घरेलू समान ट्रैक्टर-ट्रॉली से लादकर ये लोग पलायन कर गए हैं। जगदीश व सुरेंद्र का घर नदी के मुहाने पर है। रामलाल पुरवा गांव में घाघरा का पानी तेजी से घुस रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रफ्तार से पानी गांव में घुस रहा है, उससे शनिवार रात तक पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ जाएगा।
वहीं रेउसा क्षेत्र के 27 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन गांवों में भी शनिवार की रात तक बाढ़ का पानी घुसने का संदेह जताया जा रहा है। वहीं दुर्गापुरवा निवासी मनकू की पत्नी सुघरा देवी (60) नदी के किनारे खड़ी थी। इसी बीच जमीन कटकर नदी में बह गई। जिसकी वजह से सुघरा भी घाघरा की लहरों में बहने लगी। झाड़ियों में फंसते देख ग्रामीणों ने नदी में छलांग लगाई और उसे किसी तरह बचा लिया। काशीपुर गांव के निकट शारदा कटान कर रही है। यहां पर तटीय इलाके को कटान से बचाने के लिए स्टड बनाने का काम जारी है।
बैराजों का अधिकतम डिस्चार्ज
घाघरा बैराज 1,08,367 क्यूसेक
शारदा बैराज 1,26,629 क्यूसेक
बनबसा बैराज 67,340 क्यूसेक