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उफनाई घाघरा तीन गांवों की ओर बढ़ी

Wed, 26 Jul 2017 11:32 PM IST
Amarujala Bureau
Amarujala Bureau Updated Wed, 26 Jul 2017 11:32 PM IST
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 Booming Ghaghara rose to three villages
BEAS RIVER

घाघरा नदी फिर उफना रही है। जिसकी वजह से नदी का पानी अब किनारों से बाहर बहने लगा है। बुधवार को नदी का पानी तटीय क्षेत्र के तीन गांवों के करीब पहुंच गया है। जबकि आठ गांव पानी से घिर गए हैं। नदी कटान भी कर रही है। बीते 24 घंटे में 100 बीघा जमीन कटकर नदी में बह गई है।

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नदी का रौद्र रूप देखकर तटीय क्षेत्र में दहशत है, जिनके मकान पक्के हैं, वे मकानों पर हथौड़े चलाकर ईंट बचाने की जुगत में हैं। कच्चे घर में बसने वालों ने घरों को छोड़ दिया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हैं।
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मंगलवार रात घाघरा नदी के जलस्तर में जबरदस्त तरीके से इजाफा हुआ है। जिसकी वजह से नदी का पानी किनारों से बाहर बह चला है। दुर्गापुरवा, रामलालपुरवा व लोधपुरवा गांवों के निकट नदी का पानी गांव की तरफ बहने लगा है। इससे तीनों गांवों में हड़कंप मचा हुआ है।
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कोनी व दुर्गापुरवा गांव के बीच बहने वाला नाला उफनाने से दोनों गांवों के बीच नावें चलने लगी हैं। खेत भी जलमग्न हो रहे हैं। इस वजह से तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने घरों का सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन शुरू कर दिया है। दुर्गापुरवा व गोड़ियन पुरवा गांव के करीब छह परिवार ऐसे हैं, जिनके मकान पक्के बने हुए हैं।

इन मकानों में रहने वाले परिवारों ने मकानों पर घन चलाना शुरू कर दिया है। बुधवार को करीब 15 परिवार अपने घरों का सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे थे। उधर, पचीसा टापू पर भी बाढ़ का पानी पहुंच रहा है। जिसकी वजह से टापू पर मौजूद परिवार दहशत में हैं।

बुधवार देर शाम तक टापू का एक हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था। नदी का पानी बढ़ने की वजह से नई बस्ती, चहलारी, धन्नीपुरवा, मरेली, कटैला पुरवा, दर्जिन रेती आदि आठ गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन गांवों में रहने वाले करीब 2500 परिवार दहशत में हैं। जहां नदी का पानी बढ़ रहा है, वहीं नदी कटान कर रही है।


कोनी से लेकर चहलारी पुल तक नदी ने करीब 100 बीघा जमीन बुधवार को निगल ली है। उधर, घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से बुधवार को 2,15,214 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसकी वजह से नदी के जलस्तर में राहत मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि बैराजों का पानी जब रेउसा क्षेत्र से गुजरेगा, तब स्थिति भयावह हो जाएगी।  

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