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Sitapur News: एशिया की प्रसिद्ध प्लाईवुड फैक्टरी सरकारी संपत्ति घोषित
Tue, 05 May 2026 01:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Tue, 05 May 2026 01:09 AM IST
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प्लाईवुड फैक्टरी सीतापुर
सीतापुर। हुसैनगंज स्थित एशिया की प्रसिद्ध प्लाईवुड फैक्टरी को सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई बाद आदेश जारी किया। खैराबाद ब्लॉक के हुसैनगंज में 5.697 हेक्टेयर में वर्ष 1939 में मेसर्स प्लाईवुड प्रोडक्ट्स की स्थापना की गई थी। यह मिल 21 सितंबर 2001 से बंद है। इसे राज्य सरकार में निहित करने की कवायद कई दिनों से चल रही थी।
जिलाधिकारी डॉ राजा गणपति आर की कोर्ट में इस संबंध में एक वाद की सुनवाई चल रही थी। सोमवार को डीएम ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आपत्तिकर्ताओं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, सीमा जफरुल्ला, आबिद जफर, आदिल जफर, सत्यनारायण व जगदीश चंद्र, खाजिस्ता हैदर और प्लाईवुड कर्मचारी संगठन की आपत्तियों को खारिज कर दिया।
आदेश में कहा गया है कि इस फैक्टरी की जमीन को हड़पने का प्रयास करने के साथ ही कुछ हिस्से का मुआवजा भी लिया गया। यह अपराध की श्रेणी में आता है और वसूली योग्य है। इन तर्कों के साथ डीएम कोर्ट ने फैक्टरी भवन को सरकारी संपत्ति घोषित करने का आदेश दिया है।
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360 करोड़ था वार्षिक टर्नओवर
एक समय में इस प्लाईवुड फैक्टरी में 24 घंटे काम होता था। इसमें एक एक हजार श्रमिक तीन शिफ्टों में काम करते थे। उस दौर में फैक्टरी का हर महीने का टर्न ओवर 30 करोड़ रुपये और वार्षिक टर्नओवर 360 करोड़ रुपये से भी अधिक था। यहां का तैयार माल देश के साथ साथ आस्ट्रेलिया, नेपाल व भूटान में भी भेजा जाता था। यहां तैयार उत्पाद की गुणवत्ता पूरे एशिया में प्रसिद्ध थी।
विकास परियोजना जल्द लेगी आकार
प्लाईवुड फैक्टरी की जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है। इस आदेश को सुनाते समय उच्च न्यायालय के निर्णय की कोई अवमानना नहीं हुई। जल्द ही फैक्टरी भवन की जमीन पर एक बड़ी जनोपयोगी परियोजना आकार लेगी।
- डॉ राजा गणपति आर, डीएम सीतापुर
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जिलाधिकारी डॉ राजा गणपति आर की कोर्ट में इस संबंध में एक वाद की सुनवाई चल रही थी। सोमवार को डीएम ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आपत्तिकर्ताओं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, सीमा जफरुल्ला, आबिद जफर, आदिल जफर, सत्यनारायण व जगदीश चंद्र, खाजिस्ता हैदर और प्लाईवुड कर्मचारी संगठन की आपत्तियों को खारिज कर दिया।
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आदेश में कहा गया है कि इस फैक्टरी की जमीन को हड़पने का प्रयास करने के साथ ही कुछ हिस्से का मुआवजा भी लिया गया। यह अपराध की श्रेणी में आता है और वसूली योग्य है। इन तर्कों के साथ डीएम कोर्ट ने फैक्टरी भवन को सरकारी संपत्ति घोषित करने का आदेश दिया है।
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360 करोड़ था वार्षिक टर्नओवर
एक समय में इस प्लाईवुड फैक्टरी में 24 घंटे काम होता था। इसमें एक एक हजार श्रमिक तीन शिफ्टों में काम करते थे। उस दौर में फैक्टरी का हर महीने का टर्न ओवर 30 करोड़ रुपये और वार्षिक टर्नओवर 360 करोड़ रुपये से भी अधिक था। यहां का तैयार माल देश के साथ साथ आस्ट्रेलिया, नेपाल व भूटान में भी भेजा जाता था। यहां तैयार उत्पाद की गुणवत्ता पूरे एशिया में प्रसिद्ध थी।
विकास परियोजना जल्द लेगी आकार
प्लाईवुड फैक्टरी की जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है। इस आदेश को सुनाते समय उच्च न्यायालय के निर्णय की कोई अवमानना नहीं हुई। जल्द ही फैक्टरी भवन की जमीन पर एक बड़ी जनोपयोगी परियोजना आकार लेगी।
- डॉ राजा गणपति आर, डीएम सीतापुर