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Sitapur News: दुष्कर्म के 12 साल पुराने मामले में चारों आरोपी बरी
Sun, 01 Nov 2026 11:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 01 Nov 2026 11:34 PM IST
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सीतापुर। सदरपुर क्षेत्र में सामूहिक दुष्कर्म के करीब 12 साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी (ओएडब्ल्यू), सीतापुर की अदालत ने चारों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार कटियार ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने राजेश, कालिका और केशव को सामूहिक दुष्कर्म, धमकी व साजिश रचने व बिदाना को राजिश रचने के आरोपों से दोषमुक्त मानते हुए बरी करने का आदेश दिया।
मामला थाना सदरपुर क्षेत्र का वर्ष 2014 का है। अभियोजन के मुताबिक, 10 जून 2014 की रात एक महिला को गांव की ही एक महिला शौच के बहाने गांव के बाहर ले गई थी। आरोप था कि वहां पहले से मौजूद तीन लोगों ने उसे जबरन गन्ने के खेत में खींच लिया और बारी-बारी से दुष्कर्म किया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छह गवाह पेश किए। अदालत ने पीड़िता, उसके पति और अन्य गवाहों के बयानों का विस्तार से परीक्षण किया। फैसले में घटना की तारीख और समय को लेकर पीड़िता के अलग-अलग बयानों में अंतर को भी महत्वपूर्ण माना गया। इसके अलावा घटना के बाद पीड़िता की ओर से किसे जानकारी दी गई, इस संबंध में भी गवाहों के कथनों में विरोधाभास सामने आया। मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर बाहरी या आंतरिक चोट के निशान नहीं पाए गए थे। चिकित्सक ने भी दुष्कर्म के संबंध में कोई निश्चित राय नहीं दी थी।
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मामला थाना सदरपुर क्षेत्र का वर्ष 2014 का है। अभियोजन के मुताबिक, 10 जून 2014 की रात एक महिला को गांव की ही एक महिला शौच के बहाने गांव के बाहर ले गई थी। आरोप था कि वहां पहले से मौजूद तीन लोगों ने उसे जबरन गन्ने के खेत में खींच लिया और बारी-बारी से दुष्कर्म किया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छह गवाह पेश किए। अदालत ने पीड़िता, उसके पति और अन्य गवाहों के बयानों का विस्तार से परीक्षण किया। फैसले में घटना की तारीख और समय को लेकर पीड़िता के अलग-अलग बयानों में अंतर को भी महत्वपूर्ण माना गया। इसके अलावा घटना के बाद पीड़िता की ओर से किसे जानकारी दी गई, इस संबंध में भी गवाहों के कथनों में विरोधाभास सामने आया। मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर बाहरी या आंतरिक चोट के निशान नहीं पाए गए थे। चिकित्सक ने भी दुष्कर्म के संबंध में कोई निश्चित राय नहीं दी थी।
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