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चार माह से धूल खा रही आधार कार्ड की मशीनें
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सीतापुर। सरकार भले ही सभी बच्चों का आधारकार्ड बनवाने के लिए प्रयासरत हो, लेकिन अफसर इस काम की अनदेखी कर रहे हैं। जिले को करीब चार माह पहले 38 आधारकार्ड बनवाने की मशीनें मिली थी।
ये मशीनें प्रत्येक बीआरसी को दी गई थी। इनको चालू करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक से दो शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर निपुण किया गया था।
उसके बाद ये मशीनें एक्टिव ही नहीं की गई। इस वजह से मशीनें बंद पड़ी हैं। इससे नौनिहाल बाहर से अपना आधारकार्ड बनवा रहे हैं।
परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों को नामांकन के समय ही आधारकार्ड मांगा जाता है। वहीं, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधारकार्ड की जरूरत पड़ रही है।
नौनिहालों को आधारकार्ड बनवाने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए शासन ने संकुलवार कैम्प लगाकर आधारकार्ड बनवाने का प्लान तैयार किया था।
इसके लिए करीब चार माह पहले जिले के 19 बीआरसी के लिए 38 मशीनें आई थी। यानी एक ब्लॉक को दो मशीनें मिलनी थी।
मशीनें आने के बाद इनको चलाने का संकट खड़ा हुआ तो इसे शिक्षकों को ट्रेंड करके इनको चलाने की बात कही गई थी। इस पर प्रत्येक ब्लॉक से दो शिक्षक चयनित करके लखनऊ में ट्रेनिंग दिलाई गई थी।
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उसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी जल्द यह मशीनें शुरू हो जाएंगी। लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद यह एक्टिव ही नहीं हो सकी।
इससे यह बीआरसी पर रखी शोभा बढ़ा रही है। जब मशीने चालू नहीं है तेा नौनिहाल बाहर से अपना आधारकार्ड बनवाने के लिए भटक रहे है।
बच्चों से मांगा जा रहा आधारकार्ड
जिले में परिषदीय विद्यालयों में करीब साढ़े पांच लाख नौनिहाल पढ़ रहे है। विभाग का दावा है 90 फीसद नौनिहालों केे पास आधारकार्ड मौजूद है।
ऐसे में आधारकार्ड की जरूरत उन नौनिहालों को सबसे पहले पड़ रही है। जिन्होंने अपना नया एडमिशन लिया है। एडमिशन के समय प्रधानाध्यापक द्वारा आधारकार्ड मांगा जा रहा है। यह सब नौनिहाल जिला मुख्यालय दौड़कर आधारकार्ड बनवा रहे है।
जल्द शुरू होंगी मशीनें
मशीनें एक्टिव कराने के लिए जिलाधिकारी व बीएसए की तरफ से कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा समीक्षा की गई थी, जिसमें आधार का मुद्दा शामिल था। चार दिन पहले 28 मशीनें एक्टिव हो गई है। जल्द यह शुरू हो जाएंगी।
- बृजमोहन सिंह, डीसी एमडीएम/प्रभारी आधारकार्ड
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ये मशीनें प्रत्येक बीआरसी को दी गई थी। इनको चालू करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक से दो शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर निपुण किया गया था।
उसके बाद ये मशीनें एक्टिव ही नहीं की गई। इस वजह से मशीनें बंद पड़ी हैं। इससे नौनिहाल बाहर से अपना आधारकार्ड बनवा रहे हैं।
परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों को नामांकन के समय ही आधारकार्ड मांगा जाता है। वहीं, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधारकार्ड की जरूरत पड़ रही है।
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नौनिहालों को आधारकार्ड बनवाने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए शासन ने संकुलवार कैम्प लगाकर आधारकार्ड बनवाने का प्लान तैयार किया था।
इसके लिए करीब चार माह पहले जिले के 19 बीआरसी के लिए 38 मशीनें आई थी। यानी एक ब्लॉक को दो मशीनें मिलनी थी।
मशीनें आने के बाद इनको चलाने का संकट खड़ा हुआ तो इसे शिक्षकों को ट्रेंड करके इनको चलाने की बात कही गई थी। इस पर प्रत्येक ब्लॉक से दो शिक्षक चयनित करके लखनऊ में ट्रेनिंग दिलाई गई थी।
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उसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी जल्द यह मशीनें शुरू हो जाएंगी। लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद यह एक्टिव ही नहीं हो सकी।
इससे यह बीआरसी पर रखी शोभा बढ़ा रही है। जब मशीने चालू नहीं है तेा नौनिहाल बाहर से अपना आधारकार्ड बनवाने के लिए भटक रहे है।
बच्चों से मांगा जा रहा आधारकार्ड
जिले में परिषदीय विद्यालयों में करीब साढ़े पांच लाख नौनिहाल पढ़ रहे है। विभाग का दावा है 90 फीसद नौनिहालों केे पास आधारकार्ड मौजूद है।
ऐसे में आधारकार्ड की जरूरत उन नौनिहालों को सबसे पहले पड़ रही है। जिन्होंने अपना नया एडमिशन लिया है। एडमिशन के समय प्रधानाध्यापक द्वारा आधारकार्ड मांगा जा रहा है। यह सब नौनिहाल जिला मुख्यालय दौड़कर आधारकार्ड बनवा रहे है।
जल्द शुरू होंगी मशीनें
मशीनें एक्टिव कराने के लिए जिलाधिकारी व बीएसए की तरफ से कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा समीक्षा की गई थी, जिसमें आधार का मुद्दा शामिल था। चार दिन पहले 28 मशीनें एक्टिव हो गई है। जल्द यह शुरू हो जाएंगी।
- बृजमोहन सिंह, डीसी एमडीएम/प्रभारी आधारकार्ड