{"_id":"128-84456","slug":"Sitapur-84456-128","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरे में नौनिहालों की जान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरे में नौनिहालों की जान
Sitapur
Updated Thu, 28 Aug 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर। स्कूली और निजी वाहन मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। मानकों के अनदेखी कर वाहन चालक ठूंस-ठूंस कर बच्चों को बैठाते हैं। यही नहीं इन वाहनों को एलपीजी के सहारे चलाया जा रहा है। इससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है।
मालूम हो कि कुछ दिन पहले सहारनपुर में स्कूली वैन में लगे एलपीजी सिलेंडर से वाहन में आग लग गई थी। इसमें तीन मासूम जिंदा जल गए थे। इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद वाहन चालक चेत नहीं रहे। वे नियमों की अनदेखी करते हुए वाहन दौड़ा रहे हैं। बच्चों को लाने या ले जाने वाले इन वाहनों में इस कदर सटाकर बच्चे बैठाए जाते हैं कि थोड़ी सी भी ठोकर से वे गिर सकते हैं। वाहन चालकों की यह लापरवाही मासूमों के जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। डीएम ने मानक के अनुसार वाहन संचालित करने के निर्देश दिए थे लेकिन इसका असर चालकों पर नहीं दिख रहा है।
नाकाफी साबित हुआ अभियान
जिले भर में मानक के विपरीत चल रहे स्कूली वाहनों के विरुद्ध परिवहन विभाग ने सात अगस्त को अभियान चलाया गया था। इसमें करीब 12 वाहन सीज किए गए थे। इतने का ही चालान काटा गया था। अभियान के एक सप्ताह तक तो सबकुछ ठीक-ठाक चला लेकिन इसके बाद फिर से धड़ल्ले से वाहन चलने लगे।
विज्ञापन
बिना परमिट दौड़ रहे सैकड़ो वाहन
परिवहन विभाग के अनुसार चार बसें 50 मैजिक व 60 छोटी बसें पंजीकृत है। इनको स्कूली बच्चे ढोने का परमिट दिया गया है। लेकिन सच्चाई यह है कि करीब दो सौ वाहन बिना परमिट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसमें ज्यादातर ऐसे हैं जो एलपीजी गैस सिलेंडर से चल रहे है। इन वाहनों में मासूमों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
ये हैं मानक
स्कूली वाहन का रंग गोल्डन होना चाहिए।
वाहन के पीछे बड़े अक्षरों में स्कूली वाहन लिखा होना चाहिए।
गति 40 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
गति निर्धारण के लिए स्पीड कंट्रोल लगा होना चाहिए।
चालक का लाइसेंस कम से कम पांच वर्ष पुराना हो।
वाहन में खिड़की पर जाली लगी हो।
प्राथमिक उपचार के लिए बॉक्स होना चाहिए।
तय रूट का इंचार्ज बस में हो।
नियमों के विपरीत मिलने पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सोमवार को बैठक हुई थी। इसमें प्रधानाचार्यो को मानक के अनुसार वाहन संचालित करने के निर्देश दिए गए थे। अगर इसका कहीं पालन नहीं हो रहा है तो उसके कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-पंकज सिंह, एआरटीओ
विज्ञापन
मालूम हो कि कुछ दिन पहले सहारनपुर में स्कूली वैन में लगे एलपीजी सिलेंडर से वाहन में आग लग गई थी। इसमें तीन मासूम जिंदा जल गए थे। इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद वाहन चालक चेत नहीं रहे। वे नियमों की अनदेखी करते हुए वाहन दौड़ा रहे हैं। बच्चों को लाने या ले जाने वाले इन वाहनों में इस कदर सटाकर बच्चे बैठाए जाते हैं कि थोड़ी सी भी ठोकर से वे गिर सकते हैं। वाहन चालकों की यह लापरवाही मासूमों के जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। डीएम ने मानक के अनुसार वाहन संचालित करने के निर्देश दिए थे लेकिन इसका असर चालकों पर नहीं दिख रहा है।
विज्ञापन
नाकाफी साबित हुआ अभियान
जिले भर में मानक के विपरीत चल रहे स्कूली वाहनों के विरुद्ध परिवहन विभाग ने सात अगस्त को अभियान चलाया गया था। इसमें करीब 12 वाहन सीज किए गए थे। इतने का ही चालान काटा गया था। अभियान के एक सप्ताह तक तो सबकुछ ठीक-ठाक चला लेकिन इसके बाद फिर से धड़ल्ले से वाहन चलने लगे।
विज्ञापन
बिना परमिट दौड़ रहे सैकड़ो वाहन
परिवहन विभाग के अनुसार चार बसें 50 मैजिक व 60 छोटी बसें पंजीकृत है। इनको स्कूली बच्चे ढोने का परमिट दिया गया है। लेकिन सच्चाई यह है कि करीब दो सौ वाहन बिना परमिट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसमें ज्यादातर ऐसे हैं जो एलपीजी गैस सिलेंडर से चल रहे है। इन वाहनों में मासूमों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
ये हैं मानक
स्कूली वाहन का रंग गोल्डन होना चाहिए।
वाहन के पीछे बड़े अक्षरों में स्कूली वाहन लिखा होना चाहिए।
गति 40 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
गति निर्धारण के लिए स्पीड कंट्रोल लगा होना चाहिए।
चालक का लाइसेंस कम से कम पांच वर्ष पुराना हो।
वाहन में खिड़की पर जाली लगी हो।
प्राथमिक उपचार के लिए बॉक्स होना चाहिए।
तय रूट का इंचार्ज बस में हो।
नियमों के विपरीत मिलने पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सोमवार को बैठक हुई थी। इसमें प्रधानाचार्यो को मानक के अनुसार वाहन संचालित करने के निर्देश दिए गए थे। अगर इसका कहीं पालन नहीं हो रहा है तो उसके कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-पंकज सिंह, एआरटीओ