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60 बीघा खेती निगल गई शारदा व घाघरा नदी
Updated Thu, 19 Jul 2018 12:22 AM IST
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घाघरा के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी शुरू, तटीय इलाके की आबादी में मचा हड़कंप
रेउसा (सीतापुर)। इन दिनों शारदा व घाघरा नदी तेजी से कटान कर रही हैं। बीते 24 घंटों में नदियों ने 60 बीघा जमीन को निगल लिया है। वहीं घाघरा नदी के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी शुरू हो गई है। उधर बुधवार को बैराजों से डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है।
इससे आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। कटान व नदी का बढ़ता जलस्तर देखकर तटीय इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। यहां के बाशिंदों ने पलायन शुरू कर दिया है। मंगलवार की रात से शारदा नदी श्रीराम पुरवा के निकट तो घाघरा नदी गौढ़ी के नजदीक बड़ी तेजी से कटान कर रही है।
ताहपुर बजहा निवासी जवाहर लाल, सतगुर, सिपाही लाल, खेलावन, राजकुमार, सुरेश, अनूप, कौशल आदि किसानों की करीब 40 खेती की जमीन घाघरा काटकर बहा ले गई है। वहां पर कटान जारी है। इधर श्रीराम पुरवा के निकट रामनाथ, प्रहलाद, बैजनाथ आदि किसानों की करीब 20 बीघा खेती की जमीन शारदा नदी की कटान की भेंट चढ़ गई है।
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इधर बुधवार की सुबह से घाघरा के जलस्तर में फिर से बढ़ोत्तरी होने लगी है। इससे तटीय क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। बुधवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 1,69,762 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में घाघरा के जलस्तर में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारों का कहना है कि घाघरा में इनदिनों काफी पानी है। ऐसे में डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक पानी जब आएगा, तब घाघरा का उफनाना लगभग तय है। इससे तटीय क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बनने भी लगभग तय ही है। उधर पहाड़ों पर फिर से बारिश तेज हो गई है।
तटीय क्षेत्रों के लिए यह खबर अच्छी नहीं है। पहाड़ों पर होने वाली बारिश की वजह से नदियों के जलस्तर में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना प्रबल है। बुधवार को बनबसा बैराज से 91,444 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी शारदा बैराज के जलस्तर में बढ़ोत्तरी करने के लिए काफी है। जिसके बाद यह आगे बढ़ेगा।
60 परिवार टापू से निकले
घाघरा के बढ़ते जलस्तर व तेजी से होते कटान को देखकर नदी के बीच पचीसा टापू पर बसे परिवारों में हड़कंप मच गया है। बुधवार को टापू पर बसे नन्हके, भरोसे, तीरथ, रामू, दूबरि आदि के 60 परिवार अलग-अलग नावों में सवार होकर तटीय क्षेत्रों की तरफ निकल पड़े।
इन परिवारों ने गृहस्थी का सारा सामान भी नावों पर रख लिया था। नावें किनारे लगने के बाद सभी परिवार सुरक्षित ठिकानों की तरफ कूच कर गए। बताया जा रहा है कि कुछ परिवार जिले की सीमा पार करके बहराइच जिले में चले गए हैं।
घघरिया का रास्ता साफ किया
लहरपुर। तहसील क्षेत्र के कस्बा लालपुर से होकर गुजरने वाली घघरिया नदी का रास्ता साफ कर दिया गया है। दरअसल यहां पर पहले से मौजूद रपटा पुल घघरिया नदी के जल प्रवाह में बाधा बन रहा था। जिसके कारण अवरोध उत्पन्न होने पर घघरिया ने लालपुर बाजार में जबरदस्त कटान किया था।
इसके बाद मंगलवार को पीडब्ल्यूडी ने रपटा पुल को तोड़ने का काम शुरू कर दिया था। देर रात तक जेसीबी से पुल तोड़ने का काम चलता रहा। हालांकि देर रात तक रपटा पुल तोड़कर नदी के जल प्रवाह का रास्ता साफ कर दिया गया है।
...तो नेपाल का पानी बरपाता है कहर
सीतापुर के गांजरी इलाके में कहर बरपाने वाली घाघरा में दरअसल नेपाल से पानी आता है। जब नेपाल में भारी बारिश होती है, तब करनाली नदी से यह पानी आगे बढ़ता है। कैलाशपुरी बैराज के आगे से इन नदी को क्षेत्र के लोग कौड़ियाला नदी के नाम से भी जानते हैं। जबकि नेपाल में इसे करनाली नदी कहा जाता है।
नेपाल में बारिश का पानी कैलाशपुरी बैराज पर जमा होता है, जिसके बाद उसे घाघरा में छोड़ा जाता है। तंबौर के काशीपुर मल्लापुर के करीब घाघरा में शारदा का विलय हो जाता है, इस वजह से रेउसा इलाके में इसका रूप और भयावह हो जाता है। कुल मिलाकर पहाड़ों पर हुई बारिश ही गांजरी क्षेत्र में मुसीबत का सबब बनती है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 13,0367 क्यूसेक
शारदा 39,395 झ्क्यूझ्सेक
बनबसा 91,444 क्यूसेक
बाढ़ जैसी हालत नहीं
करीब दो लाख क्यूसेक पानी सीतापुर की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन इससे बाढ़ जैसा खतरा नहीं है। क्योंकि इससे पूर्व तीन लाख क्यूसेक पानी गुजर चुका है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
-शशिभूषण राय, एसडीएम
दुरुस्त हो रहे स्टड
सोंसरी गांव के निकट स्टड दुरुस्त करने का काम चल रहा है। इसके अलावा काशीपुर, दुर्गा पुरवा के निकट स्टड भी देखे गए हैं। समय रहते बंदोबस्त पूरा कर लिया जाएगा।
-दिनेश कुमार, अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग
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रेउसा (सीतापुर)। इन दिनों शारदा व घाघरा नदी तेजी से कटान कर रही हैं। बीते 24 घंटों में नदियों ने 60 बीघा जमीन को निगल लिया है। वहीं घाघरा नदी के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी शुरू हो गई है। उधर बुधवार को बैराजों से डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है।
इससे आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। कटान व नदी का बढ़ता जलस्तर देखकर तटीय इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। यहां के बाशिंदों ने पलायन शुरू कर दिया है। मंगलवार की रात से शारदा नदी श्रीराम पुरवा के निकट तो घाघरा नदी गौढ़ी के नजदीक बड़ी तेजी से कटान कर रही है।
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ताहपुर बजहा निवासी जवाहर लाल, सतगुर, सिपाही लाल, खेलावन, राजकुमार, सुरेश, अनूप, कौशल आदि किसानों की करीब 40 खेती की जमीन घाघरा काटकर बहा ले गई है। वहां पर कटान जारी है। इधर श्रीराम पुरवा के निकट रामनाथ, प्रहलाद, बैजनाथ आदि किसानों की करीब 20 बीघा खेती की जमीन शारदा नदी की कटान की भेंट चढ़ गई है।
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इधर बुधवार की सुबह से घाघरा के जलस्तर में फिर से बढ़ोत्तरी होने लगी है। इससे तटीय क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। बुधवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 1,69,762 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में घाघरा के जलस्तर में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारों का कहना है कि घाघरा में इनदिनों काफी पानी है। ऐसे में डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक पानी जब आएगा, तब घाघरा का उफनाना लगभग तय है। इससे तटीय क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बनने भी लगभग तय ही है। उधर पहाड़ों पर फिर से बारिश तेज हो गई है।
तटीय क्षेत्रों के लिए यह खबर अच्छी नहीं है। पहाड़ों पर होने वाली बारिश की वजह से नदियों के जलस्तर में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना प्रबल है। बुधवार को बनबसा बैराज से 91,444 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी शारदा बैराज के जलस्तर में बढ़ोत्तरी करने के लिए काफी है। जिसके बाद यह आगे बढ़ेगा।
60 परिवार टापू से निकले
घाघरा के बढ़ते जलस्तर व तेजी से होते कटान को देखकर नदी के बीच पचीसा टापू पर बसे परिवारों में हड़कंप मच गया है। बुधवार को टापू पर बसे नन्हके, भरोसे, तीरथ, रामू, दूबरि आदि के 60 परिवार अलग-अलग नावों में सवार होकर तटीय क्षेत्रों की तरफ निकल पड़े।
इन परिवारों ने गृहस्थी का सारा सामान भी नावों पर रख लिया था। नावें किनारे लगने के बाद सभी परिवार सुरक्षित ठिकानों की तरफ कूच कर गए। बताया जा रहा है कि कुछ परिवार जिले की सीमा पार करके बहराइच जिले में चले गए हैं।
घघरिया का रास्ता साफ किया
लहरपुर। तहसील क्षेत्र के कस्बा लालपुर से होकर गुजरने वाली घघरिया नदी का रास्ता साफ कर दिया गया है। दरअसल यहां पर पहले से मौजूद रपटा पुल घघरिया नदी के जल प्रवाह में बाधा बन रहा था। जिसके कारण अवरोध उत्पन्न होने पर घघरिया ने लालपुर बाजार में जबरदस्त कटान किया था।
इसके बाद मंगलवार को पीडब्ल्यूडी ने रपटा पुल को तोड़ने का काम शुरू कर दिया था। देर रात तक जेसीबी से पुल तोड़ने का काम चलता रहा। हालांकि देर रात तक रपटा पुल तोड़कर नदी के जल प्रवाह का रास्ता साफ कर दिया गया है।
...तो नेपाल का पानी बरपाता है कहर
सीतापुर के गांजरी इलाके में कहर बरपाने वाली घाघरा में दरअसल नेपाल से पानी आता है। जब नेपाल में भारी बारिश होती है, तब करनाली नदी से यह पानी आगे बढ़ता है। कैलाशपुरी बैराज के आगे से इन नदी को क्षेत्र के लोग कौड़ियाला नदी के नाम से भी जानते हैं। जबकि नेपाल में इसे करनाली नदी कहा जाता है।
नेपाल में बारिश का पानी कैलाशपुरी बैराज पर जमा होता है, जिसके बाद उसे घाघरा में छोड़ा जाता है। तंबौर के काशीपुर मल्लापुर के करीब घाघरा में शारदा का विलय हो जाता है, इस वजह से रेउसा इलाके में इसका रूप और भयावह हो जाता है। कुल मिलाकर पहाड़ों पर हुई बारिश ही गांजरी क्षेत्र में मुसीबत का सबब बनती है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 13,0367 क्यूसेक
शारदा 39,395 झ्क्यूझ्सेक
बनबसा 91,444 क्यूसेक
बाढ़ जैसी हालत नहीं
करीब दो लाख क्यूसेक पानी सीतापुर की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन इससे बाढ़ जैसा खतरा नहीं है। क्योंकि इससे पूर्व तीन लाख क्यूसेक पानी गुजर चुका है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
-शशिभूषण राय, एसडीएम
दुरुस्त हो रहे स्टड
सोंसरी गांव के निकट स्टड दुरुस्त करने का काम चल रहा है। इसके अलावा काशीपुर, दुर्गा पुरवा के निकट स्टड भी देखे गए हैं। समय रहते बंदोबस्त पूरा कर लिया जाएगा।
-दिनेश कुमार, अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग