{"_id":"59a1c91d4f1c1bd6208b489a","slug":"91503775005-sitapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार झोपड़ियां कटकर घाघरा में समाईं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार झोपड़ियां कटकर घाघरा में समाईं
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चार झोपड़ियां कटकर घाघरा में समाईं
रेउसा/ थानगांव (सीतापुर)। गांजरी में घाघरा का कहर बरकरार है। शुक्रवार रात पचीसा टापू के चार घर कटकर नदी में समा गए। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी अब भी जारी है।
पूरे क्षेत्र में करीब 120 गांव बाढ़ की जद में हैं। उधर, बैराजों से शनिवार को ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में गिरावट की संभावना कम ही नजर आ रही है। पचीसा टापू पर इन दिनों घाघरा कटान कर रही है।
शुक्रवार रात रामसिंह, रमेश, रामकुमार व दूजी की झोपड़ियां नदी में बह गईं। इन परिवारों ने कटान को देखते हुए शुक्रवार दोपहर ही घरों को खाली कर दिया था।
यहां के बाशिंदों का कहना है कि यह तीसरा स्थान है, जहां पर बसने के बाद भी घाघरा के कटान के कहर का सामना करना पड़ा है। कोनी, दुर्गापुरवा, रामलाल पुरवा समेत 53 गांव ऐसे हैं जहां पर बाढ़ का पानी जबरदस्त तरीके से भरा हुआ है।
विज्ञापन
इन गांवों में लोग पूरी तरह से नाव पर ही निर्भर हैं। लोगों को जरूरी काम निपटाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिन रास्तों पर लोग पैदल चलते थे, वहां नावें चल रही हैं।
लोगों के घरों में 2 से 3 फीट तक पानी भरा हुआ है। पूरे क्षेत्र में करीब 120 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। तमाम गांव ऐसे हैं जहां पर प्रशासन को राहत सामग्री पहुंचाने में पसीने छूट रहे हैं।
प्रशासन राहत सामग्री बंटवाने में स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद भी ले रहा है। कई जगहों पर संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में समाए होने के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उधर शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों से शनिवार को 2,58,012 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले एक या दो दिनों में बाढ़ के हालात में सुधार होने के आसान नजर नहीं आ रहे हैं। बाढ़ का पानी इन दिनों रेउसा व थानगांव कस्बों तक दस्तक दे रहा है।
विज्ञापन
रेउसा/ थानगांव (सीतापुर)। गांजरी में घाघरा का कहर बरकरार है। शुक्रवार रात पचीसा टापू के चार घर कटकर नदी में समा गए। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी अब भी जारी है।
पूरे क्षेत्र में करीब 120 गांव बाढ़ की जद में हैं। उधर, बैराजों से शनिवार को ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में गिरावट की संभावना कम ही नजर आ रही है। पचीसा टापू पर इन दिनों घाघरा कटान कर रही है।
विज्ञापन
शुक्रवार रात रामसिंह, रमेश, रामकुमार व दूजी की झोपड़ियां नदी में बह गईं। इन परिवारों ने कटान को देखते हुए शुक्रवार दोपहर ही घरों को खाली कर दिया था।
यहां के बाशिंदों का कहना है कि यह तीसरा स्थान है, जहां पर बसने के बाद भी घाघरा के कटान के कहर का सामना करना पड़ा है। कोनी, दुर्गापुरवा, रामलाल पुरवा समेत 53 गांव ऐसे हैं जहां पर बाढ़ का पानी जबरदस्त तरीके से भरा हुआ है।
विज्ञापन
इन गांवों में लोग पूरी तरह से नाव पर ही निर्भर हैं। लोगों को जरूरी काम निपटाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिन रास्तों पर लोग पैदल चलते थे, वहां नावें चल रही हैं।
लोगों के घरों में 2 से 3 फीट तक पानी भरा हुआ है। पूरे क्षेत्र में करीब 120 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। तमाम गांव ऐसे हैं जहां पर प्रशासन को राहत सामग्री पहुंचाने में पसीने छूट रहे हैं।
प्रशासन राहत सामग्री बंटवाने में स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद भी ले रहा है। कई जगहों पर संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में समाए होने के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उधर शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों से शनिवार को 2,58,012 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले एक या दो दिनों में बाढ़ के हालात में सुधार होने के आसान नजर नहीं आ रहे हैं। बाढ़ का पानी इन दिनों रेउसा व थानगांव कस्बों तक दस्तक दे रहा है।