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कटान पीड़ितों को बसाने में सामाजिक ताने-बाने का भी ख्याल

Sat, 22 Jul 2017 09:46 PM IST
Updated Sat, 22 Jul 2017 09:46 PM IST
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कटान पीड़ितों को बसाने में सामाजिक ताने-बाने का भी ख्याल
पीड़ितों को बसाने में सामाजिक ताने-बाने का ख्याल
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रास्ता निकालने के बाद ही की जा रही प्लाटिंग

सीतापुर। जिले के गांजरी क्षेत्र में घाघरा नदी के कटान पीड़ितों को बसाने के साथ प्रशासन सामाजिक ताने-बाने का भी ध्यान रख रहा है। वहीं इस बात पर भी गौर किया जा रहा है, कि बसाए गए परिवारों की जलनिकासी व रास्ते की कोई दिक्कत न आने पाए। जिस तरह से वीआईपी इलाके में प्लाटिंग की जाती है, ठीक उसी तरह से कटान पीड़ितों को भी प्लाटिंग कर उन्हें भूमि का निशुल्क आवंटन चल रहा है।
प्रशासन ने रेउसा क्षेत्र में ही म्योड़ी छोलहा व बजहा गांव के निकट भूमि को चिह्नित किया है और खरीदा भी है। इस भूमि पर प्रशासन सबसे पहले 20 फीट चौड़ा रास्ता निकाल रहा है। उसके बाद उस रास्ते के दोनों तरफ 10-10 फीट का सहन छोड़ रहा है। उसके बाद प्रत्येक परिवार को 200 वर्ग मीटर की भूमि आवंटित की जा रही है। इसी भूमि पर कटान पीड़ितों को बसाया जा रहा है। प्रशासन ने छोटा मैदान बनाने के लिए स्थान चिह्नित किया है। पीड़ितों का सामाजिक ताना बाना न टूटे, इसलिए इस बात का ध्यान रखा जा रहा है, कि उजड़ने से पहले कौन सा परिवार किस परिवार के बगल में रहता था। उसी हिसाब से विस्थापन की भूमि पर भी परिवारों को भूमि आवंटित की जा रही है। प्रशासन के आंकड़ों के हिसाब से अब तक 3 हेक्टेयर भूमि पर करीब 200 परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है। बिसवां एसडीएम दीपेंद्र यादव ने बताया कि जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से सिफारिश की गई है, कि प्रधानमंत्री आवास व अन्य ऐसी कोई योजना, जिसमें गरीबों को सरकारी आवास मिल सकते हैं। उन योजनाओं का लाभ विस्थापित हुए कटान पीड़ितों को मिले, तो परिवारों को सरकारी छत मिल सकती है। विस्थापित होने वाले परिवारों को इस जमीन पर प्रसाधन कक्ष बनवाने की योजना है।
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पचीसा के परिवारों के लिए भूमि की तलाश जारी
घाघरा के बीच टापू पर बसे परिवारों को विस्थापित करने के लिए प्रशासन ने भूमि की तलाश शुरू कर दी है। इसको लेकर चहलारी घाट के करीब जमीन की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि एक या दो सप्ताह के भीतर जमीन खरीद ली जाएगी।
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