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पूरे जिले में सुनाई दी पुरानी पेंशन बहाली की गूंज
Updated Thu, 30 Aug 2018 12:33 AM IST
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जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉकों तक हुए प्रदर्शन, कई संगठनों ने एक साथ मिलकर उठाई आवाज
सीतापुर। पुरानी पेंशन बहाली की गूंज बुधवार को पूरे जिले में सुनाई दी। जिले से लेकर ब्लॉकवार शिक्षक व कर्मचारी एक साथ खड़े नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने कार्य बहिष्कार करके तीन दिवसीय प्रदर्शन की जोरदार शुरुआत की। इस प्रदर्शन में विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल हुए।
कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले प्रदर्शनकारी विकास भवन के समक्ष एकत्र हुए। इन सभी ने कार्य बहिष्कार करके जोरदार तरीके से आवाज बुलंद की। जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह ने कहा कि पुरानी पेंशन बुढ़ापे की लाठी है। इस लाठी को सरकार ने छीन लिया है।
जब सरकारी सेवा से रिटायरमेंट के बाद मदद की जरूरत होती है तो सरकार पल्ला झाड़ लेगी। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं हो जाती है। अब आंदोलन की शुरुआत हो गई है। तीन दिन तक लगातार धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
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जिला संयोजक दीनबंधु सिंह व महामंत्री रवींद्र दीक्षित ने कहा कि इसको लेकर सभी में आक्रोश है। कई राज्य पुरानी पेंशन लागू कर दिए हैं तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं लागू हो रही है। यह सौतेलापन व्यवहार मंजूर नहीं किया जाएगा। बहाली की मांग को लेकर आंदोलन बढ़ता जा रहा है।
इस प्रदर्शन में प्राथमिक शिक्षक संघ, पूर्व माध्यमिक, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, संग्रह अमीन संघ, डिप्लोमा इंजीनियर संघ, एजूकेशनल मिनिस्टीरियल ऑफीसर्स एसोसिएशन, पशुधन प्रसार संघ सहित तमाम संगठन शामिल रहे।
जिला मुख्यालय पर खैराबाद, एलिया व नगर क्षेत्र के कर्मचारी व शिक्षक शामिल रहे। इसी प्रकार बीआरसी रामपुर मथुरा, सिधौली, गोंदलामऊ, महोली, लहरपुर, महमूदाबाद में प्रदर्शन दिखाई दिया। यहां के शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार कर धरने में शामिल हुए।
सरकारी दफ्तरों में मिलाजुला रहा असर
इस प्रदर्शन का असर मिलाजुला देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने सभी विभागों के कर्मचारियों से कार्य बहिष्कार करके इसमें शामिल होने की गुहार लगाई थी। लेकिन अधिकतर विभागों में कामकाज होता रहा। संगठन के प्रतिनिधियों ने जरूर धरने में प्रतिभाग किया। बाकी अन्य कर्मचारी रोजाना की तरह अपने पटल पर कामकाज निपटाते रहे। इससे खास कोई परेशानी नहीं हुई।
परिषदीय स्कूलों में बाधित पढ़ाई रही
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। इससे परिषदीय विद्यालय समय से खुले, बच्चों ने एमडीएम का स्वाद चखा। स्कूल में शिक्षक भी मौजूद रहे। लेकिन उन्होंने शिक्षण कार्य नहीं किया।
इससे केवल खाना खाने तक ही कवायद सिमट कर रह गई। यही हालात अगले दो दिन तक और दिखाई देंगे। कार्य बहिष्कार का असर केवल परिषदीय विद्यालयों में ही दिखाई दिया। माध्यमिक कॉलेजों में इसका कोई असर नहीं रहा।
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सीतापुर। पुरानी पेंशन बहाली की गूंज बुधवार को पूरे जिले में सुनाई दी। जिले से लेकर ब्लॉकवार शिक्षक व कर्मचारी एक साथ खड़े नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने कार्य बहिष्कार करके तीन दिवसीय प्रदर्शन की जोरदार शुरुआत की। इस प्रदर्शन में विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल हुए।
कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले प्रदर्शनकारी विकास भवन के समक्ष एकत्र हुए। इन सभी ने कार्य बहिष्कार करके जोरदार तरीके से आवाज बुलंद की। जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह ने कहा कि पुरानी पेंशन बुढ़ापे की लाठी है। इस लाठी को सरकार ने छीन लिया है।
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जब सरकारी सेवा से रिटायरमेंट के बाद मदद की जरूरत होती है तो सरकार पल्ला झाड़ लेगी। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं हो जाती है। अब आंदोलन की शुरुआत हो गई है। तीन दिन तक लगातार धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
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जिला संयोजक दीनबंधु सिंह व महामंत्री रवींद्र दीक्षित ने कहा कि इसको लेकर सभी में आक्रोश है। कई राज्य पुरानी पेंशन लागू कर दिए हैं तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं लागू हो रही है। यह सौतेलापन व्यवहार मंजूर नहीं किया जाएगा। बहाली की मांग को लेकर आंदोलन बढ़ता जा रहा है।
इस प्रदर्शन में प्राथमिक शिक्षक संघ, पूर्व माध्यमिक, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, संग्रह अमीन संघ, डिप्लोमा इंजीनियर संघ, एजूकेशनल मिनिस्टीरियल ऑफीसर्स एसोसिएशन, पशुधन प्रसार संघ सहित तमाम संगठन शामिल रहे।
जिला मुख्यालय पर खैराबाद, एलिया व नगर क्षेत्र के कर्मचारी व शिक्षक शामिल रहे। इसी प्रकार बीआरसी रामपुर मथुरा, सिधौली, गोंदलामऊ, महोली, लहरपुर, महमूदाबाद में प्रदर्शन दिखाई दिया। यहां के शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार कर धरने में शामिल हुए।
सरकारी दफ्तरों में मिलाजुला रहा असर
इस प्रदर्शन का असर मिलाजुला देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने सभी विभागों के कर्मचारियों से कार्य बहिष्कार करके इसमें शामिल होने की गुहार लगाई थी। लेकिन अधिकतर विभागों में कामकाज होता रहा। संगठन के प्रतिनिधियों ने जरूर धरने में प्रतिभाग किया। बाकी अन्य कर्मचारी रोजाना की तरह अपने पटल पर कामकाज निपटाते रहे। इससे खास कोई परेशानी नहीं हुई।
परिषदीय स्कूलों में बाधित पढ़ाई रही
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। इससे परिषदीय विद्यालय समय से खुले, बच्चों ने एमडीएम का स्वाद चखा। स्कूल में शिक्षक भी मौजूद रहे। लेकिन उन्होंने शिक्षण कार्य नहीं किया।
इससे केवल खाना खाने तक ही कवायद सिमट कर रह गई। यही हालात अगले दो दिन तक और दिखाई देंगे। कार्य बहिष्कार का असर केवल परिषदीय विद्यालयों में ही दिखाई दिया। माध्यमिक कॉलेजों में इसका कोई असर नहीं रहा।