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विकराल हुई घाघरा में 10 घर और कटकर समाए
Updated Tue, 14 Aug 2018 12:16 AM IST
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बैराजों से छोड़ा गया तीन लाख क्यूसेक पानी, बढ़ेगा का नदी का जलस्तर, फिर से बाढ़ का खतरा मंडराया
रेउसा/ सीतापुर। जिले के रेउसा इलाके में घाघरा का कहर जारी है। तटीय इलाके में नदी जबरदस्त कटान कर रही है। रविवार की रात दस घर कटकर घाघरा में समा गए। जबकि इतनी ही संख्या में आशियाने कटान के मुहाने पर खड़े हैं। करीब 30 बीघा खेतिहर जमीन भी कटकर नदी में समा गई है।
यह मुसीबत यहीं पर रुकती नजर नहीं आ रही है। बल्कि पहाड़ों पर हो रही बारिश से पैदा होने वाली मुसीबत फिर से गांजरी इलाके पर मंड़राती नजर आ रही है। सोमवार को शारदा व घाघरा बैराजों से तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ऐसे में गांजरी इलाके में एक बार फिर से बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है।
इन दिनों घाघरा कोनी गांव में कहर बरपा रही है। गांव के श्रीकेशन, मुरली, देशराज, बलराम, छैलू, मायावती, लल्लूराम, अमेरिका, हनुमान, जोद्धी के आशियाने सोमवार रात कटकर नदी की धारा में बह गये हैं। इनमें मुरली व छैलू के घर पक्के थे। सबसे राहत देने वाली बात यह रही कि नदी का रौद्र रूप देखकर घरों में रहने वाले परिवार पहले ही घरों को खाली कर चुके थे।
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परमेश्वर पुरवा के रामलखन, लालजी, जागेश्वर, सदानंद, साधू, मनीराम आदि किसानों की 40 बीघा खेती कटकर नदी में समा गई है। कटान इस रफ्तार से है, कि तटीय क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। जहां तटीय क्षेत्र पर कटान की मुसीबत मंडरा रही है, वहीं बैराजों से सकून छीन लेने वाली खबर आई है।
सोमवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 2,99,602 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जानकारों का मानना है कि यह पानी इतनी मात्रा में है, कि आने वाले दिनों में तटीय क्षेत्र एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। लोगों का कहना है कि इन दिनों नदी विकराल रूप धारण किए हुए हैं, बहुत से ऐसे गांव हैं, जहां पर बाढ़ का पानी अभी भी रुका हुआ है।
वहीं ऊपर से बरसात हो रही है। ऐसे में बैराज का यह पानी इस क्षेत्र में कहर बनकर टूटेगा। हालांकि प्रशासन अभी स्थिति सामान्य ही बनी रहने की बात कह रहा है।
खुद के आशियानों पर चला रहे हथौड़ा
कोनी गांव में घाघरा की जबरदस्त कटान देखकर लोग अपने ही आशियानों पर हथौड़ा चलाने को मजबूर हैं। सोमवार को गांव के कई लोग अपने पक्के मकानों को खुद ही तोड़ रहे थे। मंशा थी कि मकान में लगी ईंट व लोहा जो बच सकता है, उसका ही समेट लिया जाए। तटीय क्षेत्र के अधिकांश गांवों में ऐसी स्थिति ऐसी है, जहां पर लोग खुद ही अपने आशियानों को तोड़कर ईट व लोहा समेट रहे हैं।
की गई वैकल्पिक व्यवस्था
जैतहिया गांव में प्रमुख मार्ग कटकर बह जाने को लेकर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि सड़क का एक बड़ा हिस्सा कटकर बह गया है। वहां काफी मात्रा में पानी भरा हुआ है। जबकि पानी का बहाव भी तेज है। ऐसे में तत्काल कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। इस वजह से वहां पर नाव लगवा दी गई है।
एसडीएम शशिभूषण राय ने बताया कि जब तब बरसात का सीजन है, सड़क की कटान वाली जगह पर पानी बह रहा है, तब तक वहां पर निर्माण कार्य असंभव है। इस वजह से वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में नाव लगाई गई है। कटान के उस पार बसने वाले गांवों के बाशिंदे अब उस नाव के सहारे कटान वाले हिस्से को पार कर सकेंगे। बरसात जाते ही उस पर निर्माण कार्य कराया जाएगा।
कोनी के बाशिंदों को विस्थापित किया जाएगा
एसडीएम बिसवां शशि भूषण राय कहते हैं कि यह सच है कि कोनी गांव में घाघरा जबरदस्त रूप से कटान कर रही है। जहां पर आवास कटान की भेंट चढ़ रहे हैं। जो घर कटकर नदी में समा रहे हैं, ऐसे परिवारों को चिन्हित किया जा रहा है। पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जाएगा। इसके लिए डीएम को भी जानकारी दे दी गई। सभी पीड़ितों को जमीन व मुआवजा मुहैया कराया जाएगा।
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रेउसा/ सीतापुर। जिले के रेउसा इलाके में घाघरा का कहर जारी है। तटीय इलाके में नदी जबरदस्त कटान कर रही है। रविवार की रात दस घर कटकर घाघरा में समा गए। जबकि इतनी ही संख्या में आशियाने कटान के मुहाने पर खड़े हैं। करीब 30 बीघा खेतिहर जमीन भी कटकर नदी में समा गई है।
यह मुसीबत यहीं पर रुकती नजर नहीं आ रही है। बल्कि पहाड़ों पर हो रही बारिश से पैदा होने वाली मुसीबत फिर से गांजरी इलाके पर मंड़राती नजर आ रही है। सोमवार को शारदा व घाघरा बैराजों से तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ऐसे में गांजरी इलाके में एक बार फिर से बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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इन दिनों घाघरा कोनी गांव में कहर बरपा रही है। गांव के श्रीकेशन, मुरली, देशराज, बलराम, छैलू, मायावती, लल्लूराम, अमेरिका, हनुमान, जोद्धी के आशियाने सोमवार रात कटकर नदी की धारा में बह गये हैं। इनमें मुरली व छैलू के घर पक्के थे। सबसे राहत देने वाली बात यह रही कि नदी का रौद्र रूप देखकर घरों में रहने वाले परिवार पहले ही घरों को खाली कर चुके थे।
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परमेश्वर पुरवा के रामलखन, लालजी, जागेश्वर, सदानंद, साधू, मनीराम आदि किसानों की 40 बीघा खेती कटकर नदी में समा गई है। कटान इस रफ्तार से है, कि तटीय क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। जहां तटीय क्षेत्र पर कटान की मुसीबत मंडरा रही है, वहीं बैराजों से सकून छीन लेने वाली खबर आई है।
सोमवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 2,99,602 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जानकारों का मानना है कि यह पानी इतनी मात्रा में है, कि आने वाले दिनों में तटीय क्षेत्र एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। लोगों का कहना है कि इन दिनों नदी विकराल रूप धारण किए हुए हैं, बहुत से ऐसे गांव हैं, जहां पर बाढ़ का पानी अभी भी रुका हुआ है।
वहीं ऊपर से बरसात हो रही है। ऐसे में बैराज का यह पानी इस क्षेत्र में कहर बनकर टूटेगा। हालांकि प्रशासन अभी स्थिति सामान्य ही बनी रहने की बात कह रहा है।
खुद के आशियानों पर चला रहे हथौड़ा
कोनी गांव में घाघरा की जबरदस्त कटान देखकर लोग अपने ही आशियानों पर हथौड़ा चलाने को मजबूर हैं। सोमवार को गांव के कई लोग अपने पक्के मकानों को खुद ही तोड़ रहे थे। मंशा थी कि मकान में लगी ईंट व लोहा जो बच सकता है, उसका ही समेट लिया जाए। तटीय क्षेत्र के अधिकांश गांवों में ऐसी स्थिति ऐसी है, जहां पर लोग खुद ही अपने आशियानों को तोड़कर ईट व लोहा समेट रहे हैं।
की गई वैकल्पिक व्यवस्था
जैतहिया गांव में प्रमुख मार्ग कटकर बह जाने को लेकर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि सड़क का एक बड़ा हिस्सा कटकर बह गया है। वहां काफी मात्रा में पानी भरा हुआ है। जबकि पानी का बहाव भी तेज है। ऐसे में तत्काल कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। इस वजह से वहां पर नाव लगवा दी गई है।
एसडीएम शशिभूषण राय ने बताया कि जब तब बरसात का सीजन है, सड़क की कटान वाली जगह पर पानी बह रहा है, तब तक वहां पर निर्माण कार्य असंभव है। इस वजह से वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में नाव लगाई गई है। कटान के उस पार बसने वाले गांवों के बाशिंदे अब उस नाव के सहारे कटान वाले हिस्से को पार कर सकेंगे। बरसात जाते ही उस पर निर्माण कार्य कराया जाएगा।
कोनी के बाशिंदों को विस्थापित किया जाएगा
एसडीएम बिसवां शशि भूषण राय कहते हैं कि यह सच है कि कोनी गांव में घाघरा जबरदस्त रूप से कटान कर रही है। जहां पर आवास कटान की भेंट चढ़ रहे हैं। जो घर कटकर नदी में समा रहे हैं, ऐसे परिवारों को चिन्हित किया जा रहा है। पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जाएगा। इसके लिए डीएम को भी जानकारी दे दी गई। सभी पीड़ितों को जमीन व मुआवजा मुहैया कराया जाएगा।