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730 बच्चों की कम मिली लंबाई और वजन
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सीतापुर। जिले में बच्चों का कुपोषण दूर करने के शासन के तमाम प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है। 730 बच्चों की मानक से कम लंबाई व वजन मिला है। इससे इन बच्चों को अति कुपोषित की श्रेणी में डाल दिया गया है। इन बच्चों को विशेष उपचार देने की जरूरत है। यह खुलासा बाल विकास एवं पुष्टाहार की सुपोषण जांच में हुआ है।
जिले में 20 बाल विकास परियोजना दफ्तर संचालित हैं। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सवा पांच लाख बच्चे पंजीकृत हैं। जिनकी उम्र पांच साल तक है। उम्र के हिसाब से बच्चों की लंबाई और वजन का मानक तय किया गया है। इससे कम है तो वह कुपोषित श्रेणी में आ जाते हैं। यह कुपोषण दो प्रकार का होता है। जिन बच्चों की लंबाई और वजन दोनों कम है। वह अति कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। जबकि वजन कम होने पर वह कुपोषित माने जाते हैं।
सुपोषण की जांच में पाया गया कि जिले में 730 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में शामिल किए गए है। इससे यह बच्चे काफी कमजोर है। इन बच्चों को अगर समय से इलाज नहीं दिया गया तो इन्हें तमाम तरह की बीमारियां ग्रसित कर लेंगी। 2657 बच्चे कुपोषित मिले है। इसका खुलासा होने के बाद इन बच्चों को पौष्टिक आहार दिया गया है।
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सीएचसी के माध्यम से इन बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करके नजर रखी जा रही है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर वर्तमान में दिया जा रहा आहार बच्चों के स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है। जांच व सर्वे में दोनों श्रेणियों में 14229 बच्चे कुपोषित पाए गए। इसके बाद 12992 बच्चों का सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य प्रबंधन किया गया। संबंधित बच्चों के घर आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भ्रमण कर उनके सुपोषण के लिए प्रयास किया, जिससे 10842 बच्चे सुपोषित हो सके।
1264 किशोरी और महिलाएं इनीमिया का शिकार
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत किशोरियों व महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी बाल विकास विभाग द्वारा निर्धारित मात्रा में आहार दिया जाता है। इनका समय-समय पर परीक्षण किया जाता है। इस परीक्षण में पाया गया कि 4083 किशोरी और महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। इन लोगों में खून की कमी बनी हुई है। इसके बाद इनका उपचार किया गया। बावजूद इसके 1264 किशोरी बालिकाएं व महिलाएं इनीमिया से ग्रसित हैं। महिलाएं जहां धात्री हैं वहीं किशोरियों में खून की कमी होने से उन्हें तमाम तरह की बीमारियां परेशान कर रही हैं।
किए जा रहे है प्रयास
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को शासन से उपलब्ध कराए जा रहे पोषाहार को उपलब्ध कराया जा रहा है। चिह्नित अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने के सभी उपाय किए जा रहे हैं। इससे 10842 बच्चे सुपोषित हुए हैं।
- राज कपूर, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिले में 20 बाल विकास परियोजना दफ्तर संचालित हैं। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सवा पांच लाख बच्चे पंजीकृत हैं। जिनकी उम्र पांच साल तक है। उम्र के हिसाब से बच्चों की लंबाई और वजन का मानक तय किया गया है। इससे कम है तो वह कुपोषित श्रेणी में आ जाते हैं। यह कुपोषण दो प्रकार का होता है। जिन बच्चों की लंबाई और वजन दोनों कम है। वह अति कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। जबकि वजन कम होने पर वह कुपोषित माने जाते हैं।
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सुपोषण की जांच में पाया गया कि जिले में 730 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में शामिल किए गए है। इससे यह बच्चे काफी कमजोर है। इन बच्चों को अगर समय से इलाज नहीं दिया गया तो इन्हें तमाम तरह की बीमारियां ग्रसित कर लेंगी। 2657 बच्चे कुपोषित मिले है। इसका खुलासा होने के बाद इन बच्चों को पौष्टिक आहार दिया गया है।
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सीएचसी के माध्यम से इन बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करके नजर रखी जा रही है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर वर्तमान में दिया जा रहा आहार बच्चों के स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है। जांच व सर्वे में दोनों श्रेणियों में 14229 बच्चे कुपोषित पाए गए। इसके बाद 12992 बच्चों का सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य प्रबंधन किया गया। संबंधित बच्चों के घर आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भ्रमण कर उनके सुपोषण के लिए प्रयास किया, जिससे 10842 बच्चे सुपोषित हो सके।
1264 किशोरी और महिलाएं इनीमिया का शिकार
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत किशोरियों व महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी बाल विकास विभाग द्वारा निर्धारित मात्रा में आहार दिया जाता है। इनका समय-समय पर परीक्षण किया जाता है। इस परीक्षण में पाया गया कि 4083 किशोरी और महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। इन लोगों में खून की कमी बनी हुई है। इसके बाद इनका उपचार किया गया। बावजूद इसके 1264 किशोरी बालिकाएं व महिलाएं इनीमिया से ग्रसित हैं। महिलाएं जहां धात्री हैं वहीं किशोरियों में खून की कमी होने से उन्हें तमाम तरह की बीमारियां परेशान कर रही हैं।
किए जा रहे है प्रयास
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को शासन से उपलब्ध कराए जा रहे पोषाहार को उपलब्ध कराया जा रहा है। चिह्नित अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने के सभी उपाय किए जा रहे हैं। इससे 10842 बच्चे सुपोषित हुए हैं।
- राज कपूर, जिला कार्यक्रम अधिकारी