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79 ग्राम पंचायतों में 7 सचिव, कैसे हो कामकाज
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। ब्लॉक क्षेत्र की 79 ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक काम काज महज सात सचिवों के भरोसे चल रहा है। ऐसे में पंचायत से जुड़े विकास कार्य जहां अधूरे पड़े हैं वहीं ग्रामीणों से जुड़े कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े कार्यों के लिए परेशान ग्रामीण को ब्लॉक मुख्यालय तक का चक्कर काटने की परेशानी भी उठानी पड़ रही है। बीते दिनों ओडीएफ घोटाले में पांच सचिवों के निलंबन से यह परेशानी और बढ़ गई है।
विकास की दृष्टि से बेहद पिछड़े विकास खंड रामपुर मथुरा की 79 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष यहां महज 16 सचिव ही तैनात थे। इसमें से रोहिणी व जूही जायसवाल फिलहाल मातृत्व अवकाश है जबकि एक ग्राम पंचायत अधिकारी के अयोग्य तथा एक के लंबी छुट्टी पर जाने से 12 सचिव ही सारी ग्राम पंचायतों का कामकाज संभाल रहे थे। इस बीच ओडीएफ कार्य में हुई गड़बड़ी की जांच में दोषी पाए जाने पर पांच सचिव निलंबित कर दिए गए।
इससे वर्तमान में ब्लॉक की 79 ग्राम पंचायतों के काम काज की जिम्मेदारी महज सात ग्राम सचिवों के कंधों पर है। इससे पांच लाख आबादी क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों के बाधित होने के साथ ही ग्रामीण को भी अपने निजी कार्यों को लेकर ब्लॉक तक के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र आदि कार्यों को लेकर हो रही है।
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सोमवार को ब्लॉक पहुंचे गोंडा देवरिया के अवधराम ने बताया करीब एक सप्ताह से लगातार दौड़ रहे हैं। खंड विकास अधिकारी अथवा ग्राम पंचायत अधिकारी नहीं मिल पा रहे हैं। नहरवल निवासी संतोष ने बताया कि एक सप्ताह से लगातार परिवार रजिस्टर की नकल के लिए दौड़ लगा रहे हैं। ब्लॉक पर सचिव के न मिलने से नकल नहीं मिल पाई है।
अंगरौरा निवासी सागर ने बताया कि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए सचिव के पास एक माह से चक्कर लगा रहा हैं। इस संबंध में ब्लॉक के अफसरों का कहना है कि औसतन एक सचिव के पास 5 से 6 गांवों के काम काज की जिम्मेदारी होती है लेकिन वर्तमान में यह भार बढ़कर प्रति सचिव 11 से 12 ग्राम पंचायत तक हो जाने से ही काम काज में परेशानी हो रही है।
ब्लॉक क्षेत्र में कुल 16 सचिवों में से 12 सचिव ही मौके पर कार्य कर रहे थे। इनमें से भी 5 सचिवों के निलंबन के बाद अब काम काज के लिए सिर्फ सात सचिव ही हैं। जब तक नए सचिवों की तैनाती नहीं होती है, तब तक इन्हीं 7 सचिवों के सहारे 79 ग्राम पंचायतों का कार्य पूरा कराना पड़ रहा है। काम काज के नव आवंटन की स्वीकृति को लेकर पत्र भी भेजा गया है ताकि ग्राम पंचायतों के काम काज को सुचारु बनाया जा सके।
चंद्र प्रकाश वर्मा, सहायक ग्राम विकास अधिकारी
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विकास की दृष्टि से बेहद पिछड़े विकास खंड रामपुर मथुरा की 79 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष यहां महज 16 सचिव ही तैनात थे। इसमें से रोहिणी व जूही जायसवाल फिलहाल मातृत्व अवकाश है जबकि एक ग्राम पंचायत अधिकारी के अयोग्य तथा एक के लंबी छुट्टी पर जाने से 12 सचिव ही सारी ग्राम पंचायतों का कामकाज संभाल रहे थे। इस बीच ओडीएफ कार्य में हुई गड़बड़ी की जांच में दोषी पाए जाने पर पांच सचिव निलंबित कर दिए गए।
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इससे वर्तमान में ब्लॉक की 79 ग्राम पंचायतों के काम काज की जिम्मेदारी महज सात ग्राम सचिवों के कंधों पर है। इससे पांच लाख आबादी क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों के बाधित होने के साथ ही ग्रामीण को भी अपने निजी कार्यों को लेकर ब्लॉक तक के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र आदि कार्यों को लेकर हो रही है।
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सोमवार को ब्लॉक पहुंचे गोंडा देवरिया के अवधराम ने बताया करीब एक सप्ताह से लगातार दौड़ रहे हैं। खंड विकास अधिकारी अथवा ग्राम पंचायत अधिकारी नहीं मिल पा रहे हैं। नहरवल निवासी संतोष ने बताया कि एक सप्ताह से लगातार परिवार रजिस्टर की नकल के लिए दौड़ लगा रहे हैं। ब्लॉक पर सचिव के न मिलने से नकल नहीं मिल पाई है।
अंगरौरा निवासी सागर ने बताया कि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए सचिव के पास एक माह से चक्कर लगा रहा हैं। इस संबंध में ब्लॉक के अफसरों का कहना है कि औसतन एक सचिव के पास 5 से 6 गांवों के काम काज की जिम्मेदारी होती है लेकिन वर्तमान में यह भार बढ़कर प्रति सचिव 11 से 12 ग्राम पंचायत तक हो जाने से ही काम काज में परेशानी हो रही है।
ब्लॉक क्षेत्र में कुल 16 सचिवों में से 12 सचिव ही मौके पर कार्य कर रहे थे। इनमें से भी 5 सचिवों के निलंबन के बाद अब काम काज के लिए सिर्फ सात सचिव ही हैं। जब तक नए सचिवों की तैनाती नहीं होती है, तब तक इन्हीं 7 सचिवों के सहारे 79 ग्राम पंचायतों का कार्य पूरा कराना पड़ रहा है। काम काज के नव आवंटन की स्वीकृति को लेकर पत्र भी भेजा गया है ताकि ग्राम पंचायतों के काम काज को सुचारु बनाया जा सके।
चंद्र प्रकाश वर्मा, सहायक ग्राम विकास अधिकारी