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पहले ट्रेन के लिए घंटों इंतजार फिर लखनऊ का सफर
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सुबह-शाम अप ट्रेनें चल रहीं राइट टाइम, बाकी सब दो से तीन घंटे तक चलतीं देरी से
सीतापुर। ऐशबाग-सीतापुर ब्रॉडगेज ट्रैक पर बुधवार को नए युग के आगाज हुआ था तो यहां की जनता के चेहरे खिल उठे थे। उन्हें उम्मीद थी कि अब वह सस्ते किराए में ट्रेन से लखनऊ तक सफर आसानी से तय कर सकेंगे। लेकिन अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। वजह, नए रूट पर ट्रेनों की लेटलतीफी।
बताते हैं कि ट्रेन से सफर करने से पहले यहां के प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को करीब दो-दो घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। तब कहीं जाकर उन्हें ट्रेन मिलती है, फिर वो लखनऊ तक सफर करते हैं। ऐसे में सस्ते सफर के लिए मुसाफिरों को पांच से छह घंटे बिताने पड़ रहे हैं। इससे यात्रियों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं, उधर, जिम्मेदार ट्रेनों के संचालन में देरी के पीछे ट्रेनों की संख्या कम होना बता रहे हैं।
बता दें कि सीतापुर में शतकों पहले दो मीटर गेज रेल पटरियां बिछाई गई थी, इनमें पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे शामिल हैं। मीटर गेज होने से ट्रेनों की रफ्तार काफी कम थी। इससे लोगों को सफर करने में काफी समय लगता था। जनता की मांग पर तत्कालीन सांसद राजेंद्र कुमारी बाजपेयी ने बुढ़वल वाया सीतापुर रौजा ट्रैक को मीटर गेज से ब्रॉडगेज में परिवर्तन कराया था।
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यह कार्य पूरा होने के बाद इस रूट पर ट्रेनों को रफ्तार मिल गई थी। इसके बाद ऐशबाग-सीतापुर मीटरगेज को भी ब्रॉडगेज में बदलने की मांग पुरजोर तरीके से उठी। रेल मंत्रालय में यह प्रोजेक्ट मंजूरी होने के बाद 14 मई 2016 को इस रूट पर 130 बरसों से दौड़ने वाली ट्रेनों का संचालन थम गया था।
ढाई बरस के बाद नए ब्रॉडगेज ट्रैक पर बीते बुधवार को रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर नए युग का आगाज किया था। नया ट्रैक चालू होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि वह सस्ते किराए में ट्रेनों के जरिए लखनऊ आ-जा सकेंगे। पर इस रूट पर ट्रेनों का संचालन काफी लेटलतीफ है।
जिस कारण लोगों को रेलगाड़ी से सफर करने के लिए सीतापुर जंक्शन पर घंटों बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ा था। इंतजार थोड़ा नहीं, वो भी दो से तीन घंटे तक। तब कहीं जाकर उन्हें लखनऊ सफर के लिए ट्रेन मिलती है। ट्रेन में भी सफर के दौरान तीन और घंटे लग जाते हैं। ऐसे में लोगों का ट्रेन से सफर परेशानी का सबब बनता जा रहा है।
यात्री बोले- परेशानी का सबब है ट्रेन की लेटलतीफी
लखनऊ जाने के लिए वह सुबह नौ बजे सीतापुर जंक्शन पर आ गए थे। यहां एक्सप्रेस ट्रेन खड़ी थी। पता चला वह शाम को जाएगी। दोपहर में पैसेंजर ट्रेन के यहां आने का समय 12.50 बजे तक है। पर ये ट्रेन 3.30 बजे आई। इससे वो लखनऊ जाएंगे।
-अमरनाथ, यात्री
हम लोगों को हर रोज लखनऊ आना जाना पड़ता है, क्योंकि वहां पर हम काम करते हैं, पहले यह सफर बस से किया जाता था, पर अब ट्रेन चल जाने के बाद ट्रेन से जा रहे है, लेकिन ट्रेन समय से नहीं मिल पा रही। जिसके चलते समस्या हो रही है।
-मो. शरीफ, यात्री
ट्रेन चलने की खबर पाकर हम भी ट्रेन से लखनऊ जाने के लिए आए थे, पर यहां पर काफी समय तक इंतजार करना पड़ा। ट्रेन आने के बाद अब वो इसी से लखनऊ जाएंगे।
-अरुण कुमार, यात्री
काफी समय बाद लखनऊ जाने के लिए ट्रेन चली है। वो परिवार के साथ लखनऊ जा रहे हैं पर ट्रेन काफी देर से मिल रही है। इससे काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
-फराना, यात्री।
इस रूट पर रैक की कमी
ऐशबाग-सीतापुर रेल खंड चालू तो हो गया है। लेकिन यहां के रूट पर रैक की कमी है। जिस कारण ट्रेनों के संचालन में विलंब हो रहा है। एक ही ट्रेन को अप-डाउन संचालन किया जा रहा है। इससे दिक्कत आ रही है।
-एके शुक्ला, स्टेशन अधीक्षक, सीतापुर जंक्शन।
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सीतापुर। ऐशबाग-सीतापुर ब्रॉडगेज ट्रैक पर बुधवार को नए युग के आगाज हुआ था तो यहां की जनता के चेहरे खिल उठे थे। उन्हें उम्मीद थी कि अब वह सस्ते किराए में ट्रेन से लखनऊ तक सफर आसानी से तय कर सकेंगे। लेकिन अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। वजह, नए रूट पर ट्रेनों की लेटलतीफी।
बताते हैं कि ट्रेन से सफर करने से पहले यहां के प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को करीब दो-दो घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। तब कहीं जाकर उन्हें ट्रेन मिलती है, फिर वो लखनऊ तक सफर करते हैं। ऐसे में सस्ते सफर के लिए मुसाफिरों को पांच से छह घंटे बिताने पड़ रहे हैं। इससे यात्रियों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं, उधर, जिम्मेदार ट्रेनों के संचालन में देरी के पीछे ट्रेनों की संख्या कम होना बता रहे हैं।
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बता दें कि सीतापुर में शतकों पहले दो मीटर गेज रेल पटरियां बिछाई गई थी, इनमें पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे शामिल हैं। मीटर गेज होने से ट्रेनों की रफ्तार काफी कम थी। इससे लोगों को सफर करने में काफी समय लगता था। जनता की मांग पर तत्कालीन सांसद राजेंद्र कुमारी बाजपेयी ने बुढ़वल वाया सीतापुर रौजा ट्रैक को मीटर गेज से ब्रॉडगेज में परिवर्तन कराया था।
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यह कार्य पूरा होने के बाद इस रूट पर ट्रेनों को रफ्तार मिल गई थी। इसके बाद ऐशबाग-सीतापुर मीटरगेज को भी ब्रॉडगेज में बदलने की मांग पुरजोर तरीके से उठी। रेल मंत्रालय में यह प्रोजेक्ट मंजूरी होने के बाद 14 मई 2016 को इस रूट पर 130 बरसों से दौड़ने वाली ट्रेनों का संचालन थम गया था।
ढाई बरस के बाद नए ब्रॉडगेज ट्रैक पर बीते बुधवार को रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर नए युग का आगाज किया था। नया ट्रैक चालू होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि वह सस्ते किराए में ट्रेनों के जरिए लखनऊ आ-जा सकेंगे। पर इस रूट पर ट्रेनों का संचालन काफी लेटलतीफ है।
जिस कारण लोगों को रेलगाड़ी से सफर करने के लिए सीतापुर जंक्शन पर घंटों बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ा था। इंतजार थोड़ा नहीं, वो भी दो से तीन घंटे तक। तब कहीं जाकर उन्हें लखनऊ सफर के लिए ट्रेन मिलती है। ट्रेन में भी सफर के दौरान तीन और घंटे लग जाते हैं। ऐसे में लोगों का ट्रेन से सफर परेशानी का सबब बनता जा रहा है।
यात्री बोले- परेशानी का सबब है ट्रेन की लेटलतीफी
लखनऊ जाने के लिए वह सुबह नौ बजे सीतापुर जंक्शन पर आ गए थे। यहां एक्सप्रेस ट्रेन खड़ी थी। पता चला वह शाम को जाएगी। दोपहर में पैसेंजर ट्रेन के यहां आने का समय 12.50 बजे तक है। पर ये ट्रेन 3.30 बजे आई। इससे वो लखनऊ जाएंगे।
-अमरनाथ, यात्री
हम लोगों को हर रोज लखनऊ आना जाना पड़ता है, क्योंकि वहां पर हम काम करते हैं, पहले यह सफर बस से किया जाता था, पर अब ट्रेन चल जाने के बाद ट्रेन से जा रहे है, लेकिन ट्रेन समय से नहीं मिल पा रही। जिसके चलते समस्या हो रही है।
-मो. शरीफ, यात्री
ट्रेन चलने की खबर पाकर हम भी ट्रेन से लखनऊ जाने के लिए आए थे, पर यहां पर काफी समय तक इंतजार करना पड़ा। ट्रेन आने के बाद अब वो इसी से लखनऊ जाएंगे।
-अरुण कुमार, यात्री
काफी समय बाद लखनऊ जाने के लिए ट्रेन चली है। वो परिवार के साथ लखनऊ जा रहे हैं पर ट्रेन काफी देर से मिल रही है। इससे काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
-फराना, यात्री।
इस रूट पर रैक की कमी
ऐशबाग-सीतापुर रेल खंड चालू तो हो गया है। लेकिन यहां के रूट पर रैक की कमी है। जिस कारण ट्रेनों के संचालन में विलंब हो रहा है। एक ही ट्रेन को अप-डाउन संचालन किया जा रहा है। इससे दिक्कत आ रही है।
-एके शुक्ला, स्टेशन अधीक्षक, सीतापुर जंक्शन।