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अफसरों की सुस्ती से फरियादी सीएम की चौखट पर
Updated Fri, 07 Jul 2017 10:31 PM IST
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83 हजार में से पांच हजार शिकायतें अब भी लंबित
518 मामलों के निस्तारण की मियाद खत्म
समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली का जिले में हाल
सीतापुर। मकसद था कि समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) से जनता को तुरंत न्याय दिलाना। पर सीतापुर में अफसरों की लापरवाही इस पर भारी पड़ रही है। वजह, अफसर आईजीआरएस में आने वाली शिकायतों को दूर करने में रुचि नहीं लेते हैं। इस कारण यहां करीब तीन हजार शिकायतें लंबित हैं। जबकि इनके निस्तारण की समय अवधि खत्म होने को है। ऐसे में यहां के अफसरों से न्याय की उम्मीद खो चुके फरियादी अब सीएम के दरबार में अर्जियां लेकर पहुंच रहे हैं, हालांकि गुरुवार को सीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए थाना व तहसील स्तरीय शिकायतें उनके यहां पहुंचने पर अफसरों को लताड़ लगाई हैं। साथ ही उन्हें 31 जुलाई तक लंबित सारी शिकायतें निपटाने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि लोगों को फौरीतौर पर न्याय दिलाने को तत्कालीन सपा सरकार ने समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) लागू की थी। यह व्यवस्था अमल में लाने के पीछे कई विभागों की शिकायतों को एक जगह पर लाना था। ताकि एक ही पोर्टल पर शिकायतें निपटाई जा सकें। इस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण के लिए बाकायदा सात दिन का समय मुकर्रर है। इसमें आवेदकों की शिकायतें निस्तारित होती हैं। सीतापुर में भी समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) में विभिन्न संदर्भों में अब तक 83963 शिकायतें आईं। इनके सापेक्ष 78502 शिकायतें निपटाई गईं। जबकि करीब पांच हजार शिकायतें किसी न किसी कारण से लंबित हैं। इनमें से कुछ को उच्च अधिकारियों के पास निस्तारण के लिए भेजा गया है। खास बात तो यह है कि लंबित शिकायतों में 518 मामलों के निस्तारण की मियाद खत्म हो चुकी है। जबकि 2376 शिकायतें अब तक पेंडिंग हैं। समय पर शिकायतों का निस्तारण न होने से फरियादी न्याय पाने के लिए सरकारी कार्यालयों की भाग दौड़ कर रहे हैं। पर निराशा हाथ लगने पर वो सीएम के दरबार में भी पहुंच रहे हैं।
निस्तारित होंगी लंबित शिकायतें
जनता को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन गंभीर है। आईजीआएस में आने वाली शिकायतों के निस्तारण के लिए समय-समय समीक्षा बैठक होती हैं। संबंधित अफसरों को समय पर निस्तारण के निर्देश भी दिए जाते हैं। लंबित शिकायतों का अभियान चलाकर निस्तारण कराया जाएगा।
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-राकेश चंद्र शर्मा, एडीएम
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518 मामलों के निस्तारण की मियाद खत्म
समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली का जिले में हाल
सीतापुर। मकसद था कि समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) से जनता को तुरंत न्याय दिलाना। पर सीतापुर में अफसरों की लापरवाही इस पर भारी पड़ रही है। वजह, अफसर आईजीआरएस में आने वाली शिकायतों को दूर करने में रुचि नहीं लेते हैं। इस कारण यहां करीब तीन हजार शिकायतें लंबित हैं। जबकि इनके निस्तारण की समय अवधि खत्म होने को है। ऐसे में यहां के अफसरों से न्याय की उम्मीद खो चुके फरियादी अब सीएम के दरबार में अर्जियां लेकर पहुंच रहे हैं, हालांकि गुरुवार को सीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए थाना व तहसील स्तरीय शिकायतें उनके यहां पहुंचने पर अफसरों को लताड़ लगाई हैं। साथ ही उन्हें 31 जुलाई तक लंबित सारी शिकायतें निपटाने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि लोगों को फौरीतौर पर न्याय दिलाने को तत्कालीन सपा सरकार ने समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) लागू की थी। यह व्यवस्था अमल में लाने के पीछे कई विभागों की शिकायतों को एक जगह पर लाना था। ताकि एक ही पोर्टल पर शिकायतें निपटाई जा सकें। इस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण के लिए बाकायदा सात दिन का समय मुकर्रर है। इसमें आवेदकों की शिकायतें निस्तारित होती हैं। सीतापुर में भी समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) में विभिन्न संदर्भों में अब तक 83963 शिकायतें आईं। इनके सापेक्ष 78502 शिकायतें निपटाई गईं। जबकि करीब पांच हजार शिकायतें किसी न किसी कारण से लंबित हैं। इनमें से कुछ को उच्च अधिकारियों के पास निस्तारण के लिए भेजा गया है। खास बात तो यह है कि लंबित शिकायतों में 518 मामलों के निस्तारण की मियाद खत्म हो चुकी है। जबकि 2376 शिकायतें अब तक पेंडिंग हैं। समय पर शिकायतों का निस्तारण न होने से फरियादी न्याय पाने के लिए सरकारी कार्यालयों की भाग दौड़ कर रहे हैं। पर निराशा हाथ लगने पर वो सीएम के दरबार में भी पहुंच रहे हैं।
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निस्तारित होंगी लंबित शिकायतें
जनता को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन गंभीर है। आईजीआएस में आने वाली शिकायतों के निस्तारण के लिए समय-समय समीक्षा बैठक होती हैं। संबंधित अफसरों को समय पर निस्तारण के निर्देश भी दिए जाते हैं। लंबित शिकायतों का अभियान चलाकर निस्तारण कराया जाएगा।
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-राकेश चंद्र शर्मा, एडीएम