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भागवत कथा सुनने से मिलती तीनों ऋण से मुक्ति
Updated Mon, 08 Oct 2018 12:06 AM IST
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। मनुष्य को मोक्ष प्राप्ति के लिए तीन ऋणों से मुक्त होना पड़ता है, पहला दैविक, दूसरा पितृ और तीसरा ऋषियों का ऋण है। भागवत कथा सुनने से इन तीनों ही ऋण से मुक्ति मिल जाती है।
ये बातें नैमिषारण्य तीर्थ स्थित कालीपीठ कथा प्रांगण में कालीपीठाधीश गोपाल शास्त्री के सान्निध्य में आयोजित भागवत महाकुंभ के तहत चल रहे पितृ मोक्ष भागवत ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन परम पूज्य भागवत कथा व्यास किरीट भाई जी ने कही।
कथा व्यास ने जहां भागवत कथा के माहात्म्य का वर्णन किया, वहीं लीलावतारी भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों का चित्रण भी किया। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि रुक्म देश की राजकुमारी रुक्मिणी का यूं तो विवाह शिशुपाल नामक क्रूर राजा के साथ तय हो गया था लेकिन रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को चाहती थीं और उनके ही आमंत्रण पर श्रीकृष्ण ने शिशुपाल और रुक्म के दस हजार रक्षकों को परास्त कर रुक्मिणी का अपहरण किया और बाद में विवाह किया।
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यह श्रीकृष्ण के पौरुष का प्रत्यक्ष उदाहरण रहा। कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण का रूप इस तरह लुभावना था कि शिशुपाल के सारे के सारे सैनिक मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने कहा कि सच्चे प्यार और भक्ति से भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हो जाते हैं चूंकि देवी रुक्मिणी श्रीकृष्ण को हृदय और आत्मा से प्रेम करती थीं, इसलिए उन्हें भगवान के दर्शन प्राप्त हुए।
इसके बाद कालीपीठ संचालक भाष्कर शास्त्री के सान्निध्य में आरती हुई। कथा में पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष मुनींद्र अवस्थी, पूर्व विधायक अनूप गुप्ता, यतींद्र अवस्थी व नमींद्र अवस्थी आदि उपस्थित रहे।
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ये बातें नैमिषारण्य तीर्थ स्थित कालीपीठ कथा प्रांगण में कालीपीठाधीश गोपाल शास्त्री के सान्निध्य में आयोजित भागवत महाकुंभ के तहत चल रहे पितृ मोक्ष भागवत ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन परम पूज्य भागवत कथा व्यास किरीट भाई जी ने कही।
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कथा व्यास ने जहां भागवत कथा के माहात्म्य का वर्णन किया, वहीं लीलावतारी भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों का चित्रण भी किया। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि रुक्म देश की राजकुमारी रुक्मिणी का यूं तो विवाह शिशुपाल नामक क्रूर राजा के साथ तय हो गया था लेकिन रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को चाहती थीं और उनके ही आमंत्रण पर श्रीकृष्ण ने शिशुपाल और रुक्म के दस हजार रक्षकों को परास्त कर रुक्मिणी का अपहरण किया और बाद में विवाह किया।
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यह श्रीकृष्ण के पौरुष का प्रत्यक्ष उदाहरण रहा। कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण का रूप इस तरह लुभावना था कि शिशुपाल के सारे के सारे सैनिक मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने कहा कि सच्चे प्यार और भक्ति से भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हो जाते हैं चूंकि देवी रुक्मिणी श्रीकृष्ण को हृदय और आत्मा से प्रेम करती थीं, इसलिए उन्हें भगवान के दर्शन प्राप्त हुए।
इसके बाद कालीपीठ संचालक भाष्कर शास्त्री के सान्निध्य में आरती हुई। कथा में पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष मुनींद्र अवस्थी, पूर्व विधायक अनूप गुप्ता, यतींद्र अवस्थी व नमींद्र अवस्थी आदि उपस्थित रहे।