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मनरेगा में गजब का खेल, नहीं मिली मजदूरी
Updated Sun, 02 Sep 2018 11:50 PM IST
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जहांगीराबाद (सीतापुर)। गरीबों को समय से मनरेगा मजदूरी न मिलने से उनके परिवार के सामने संकट बना हुआ है। बिसवां विकास खंड की लालपुर ग्राम पंचायत में जाबकार्ड धारकों को महीनों बाद भी मजदूरी नहीं मिली। मजदूर लगातार बैंक शाखा तथा प्रधान का चक्कर लगा रहे हैं।
ब्लॉक क्षेत्र बिसवां की ग्राम पंचायत लालपुर में मनरेगा के जॉबकार्ड धारकों से कार्य कराए गए लेकिन महीनों बाद भी मजदूरी नहीं मिली। भुलभुलिया के धर्मेंद्र कहते हैं कि उन्हें 39 कार्य दिवसों का पैसा अभी तक नहीं मिला है। वह जब भी प्रधान से कहते हैं तो वह बहाना बता देते हैं। जाबकार्ड धारक राम लखन के कार्ड पर रामलखन सहित दोनों पुत्रों महेंद्र व नरेंद्र के नाम है। इन्होंने बीस-बीस दिन काम किया लेकिन मजदूरी नहीं मिली।
जॉबकार्ड राम हरेश कहते हैं कि उन्होंने मनरेगा में 32 दिन काम किया है लेकिन 12 दिनों की मजदूरी नहीं मिली। हालात ये हैं कि सभी मनरेगा मजदूर पारिश्रमिक के लिए लगातार भटक रहे हैं। इनका यह भी आरोप है कि प्रधान व पंचायत सचिव द्वारा जाबकार्ड पर मजदूरों के कार्यदिवस नहीं चढ़ाए जाते जिससे मजदूरों को कार्य दिवसों का पता ही नहीं चल पाता।
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ग्राम पंचायत में बने दर्जनों कार्ड अभी भी सादे हैं लेकिन उनकी मजदूरी मनमाने तरीके से उनके खातों में भेजी जा चुकी है। परेशान होकर जॉबकार्ड धारकों ने बीडीओ से डीएम तक शिकायत भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में एक बार फिर मनरेगा मजदूरों ने उच्चाधिकारियों से जांच कराकर बकाया मजदूरी का भुगतान कराने की मांग की है।
नाम दूसरे का और फोटो किसी और का
लालपुर गांव के देवतादीन के नाम पर 177 संख्या का जॉबबार्ड बना है। इस कार्ड में भाई राम हरेश का नाम लिखा है पर प्रमाणित फोटोग्राफ महेश की पत्नी सुमन का लगा है। इतना ही नहीं इस जाबकार्ड पर पिता राम स्वरूप की जगह सर्फा लिखकर फर्जी कार्ड बनाया गया है। इस कार्ड पर भी कोई भी हाजिरी नहीं भरी है।
-जॉबकार्ड पंचायत मित्र और सचिव बनाते हैं। मामले की जानकारी मुझे अब जानकारी हुई है। उन्हें ठीक करा दिया जाएगा। ग्राम पंचायत द्वारा खड़ंजा लगवा दिया गया था। मैंने किसी से पैसा नहीं लिया है।
-राजेश चौरसिया, ग्राम प्रधान
मुझे सही तरीके से इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसे जाबकार्ड धारकों की कोई समस्या हो तो वे मेरे पास आएं, सही इंट्री करा दी जाएगी।
-अजय शुक्ला, पंचायत सचिव
इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। मामले की शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-सुनील कुमार सिंह, बीडीओ बिसवां
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ब्लॉक क्षेत्र बिसवां की ग्राम पंचायत लालपुर में मनरेगा के जॉबकार्ड धारकों से कार्य कराए गए लेकिन महीनों बाद भी मजदूरी नहीं मिली। भुलभुलिया के धर्मेंद्र कहते हैं कि उन्हें 39 कार्य दिवसों का पैसा अभी तक नहीं मिला है। वह जब भी प्रधान से कहते हैं तो वह बहाना बता देते हैं। जाबकार्ड धारक राम लखन के कार्ड पर रामलखन सहित दोनों पुत्रों महेंद्र व नरेंद्र के नाम है। इन्होंने बीस-बीस दिन काम किया लेकिन मजदूरी नहीं मिली।
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जॉबकार्ड राम हरेश कहते हैं कि उन्होंने मनरेगा में 32 दिन काम किया है लेकिन 12 दिनों की मजदूरी नहीं मिली। हालात ये हैं कि सभी मनरेगा मजदूर पारिश्रमिक के लिए लगातार भटक रहे हैं। इनका यह भी आरोप है कि प्रधान व पंचायत सचिव द्वारा जाबकार्ड पर मजदूरों के कार्यदिवस नहीं चढ़ाए जाते जिससे मजदूरों को कार्य दिवसों का पता ही नहीं चल पाता।
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ग्राम पंचायत में बने दर्जनों कार्ड अभी भी सादे हैं लेकिन उनकी मजदूरी मनमाने तरीके से उनके खातों में भेजी जा चुकी है। परेशान होकर जॉबकार्ड धारकों ने बीडीओ से डीएम तक शिकायत भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में एक बार फिर मनरेगा मजदूरों ने उच्चाधिकारियों से जांच कराकर बकाया मजदूरी का भुगतान कराने की मांग की है।
नाम दूसरे का और फोटो किसी और का
लालपुर गांव के देवतादीन के नाम पर 177 संख्या का जॉबबार्ड बना है। इस कार्ड में भाई राम हरेश का नाम लिखा है पर प्रमाणित फोटोग्राफ महेश की पत्नी सुमन का लगा है। इतना ही नहीं इस जाबकार्ड पर पिता राम स्वरूप की जगह सर्फा लिखकर फर्जी कार्ड बनाया गया है। इस कार्ड पर भी कोई भी हाजिरी नहीं भरी है।
-जॉबकार्ड पंचायत मित्र और सचिव बनाते हैं। मामले की जानकारी मुझे अब जानकारी हुई है। उन्हें ठीक करा दिया जाएगा। ग्राम पंचायत द्वारा खड़ंजा लगवा दिया गया था। मैंने किसी से पैसा नहीं लिया है।
-राजेश चौरसिया, ग्राम प्रधान
मुझे सही तरीके से इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसे जाबकार्ड धारकों की कोई समस्या हो तो वे मेरे पास आएं, सही इंट्री करा दी जाएगी।
-अजय शुक्ला, पंचायत सचिव
इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। मामले की शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-सुनील कुमार सिंह, बीडीओ बिसवां