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हड़ताल से 300 मरीजों की अटकी रहीं सांसें
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आरएमपी इंटर कॉलेज में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे एंबुलेंस कर्मचारी संघ के पदाधिकारी। (सं
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। एंबुलेंस सेवा के 97 वाहनों के पहिये सोमवार को थम गए। हड़ताल पर कर्मचारियों के जाने से एंबुलेंस की सेवा जिले में ठप हो गई। किसी ने प्रसव पीड़ा होने पर सुविधा मांगी तो किसी को हादसा होने पर एंबुलेंस की जरूरत पड़ी। लेकिन एंबुलेंस न मिल पाने के कारण उन्हें काफी दिक्कतें हुई। मजबूरी में प्राइवेट वाहन का सहारा लिया।
एंबुलेंस न मिलने से बाइक व ऑटो रिक्शा से ही अस्पताल पहुंचकर तीमारदारों ने मरीज का इलाज शुरू कराया। चालकों की हड़ताल से एंबुलेंस के पहिये जाम होने से करीब तीन सौ मरीज सुविधा से वंचित रह गए। जिले में 102 व 108 नंबर की 97 एंबुलेंस शहर से लेकर ग्रामीण स्तर तक चल रही है। रोजाना एक एंबुलेंस दो से तीन कॉल रिसीव करके मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाती है।
एंबुलेंस कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार से चक्का जाम कर दिया। इससे जिले में चल रही एंबुलेंस के पहिये थम गए। इससे पूरे जिले में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की सुविधा बेपटरी हो गई। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। करीब 300 मरीजों को कॉल करने के बाद भी सुविधा नहीं मिल सकी।
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वह न तो समय से अस्पताल पहुंच पाए न ही अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर पहुंचने में मदद मिल सकी। सबसे अधिक दिक्कत प्रसव वाली महिलाओं को आई। एक्सीडेंट में घायल मरीजों को भी अस्पताल तक आने के लिए तमाम जतन करने पड़े। ऐसे में जब एंबुलेंस नहीं मिली तो परिजनों ने खुद ही वाहन का इंतजाम करके अस्पताल तक पहुंचाया।
इससे उनको आर्थिक रूप से काफी नुकसान भी उठाना पड़ा। एंबुलेंस न मिलने के कारण रोजाना जिला व महिला अस्पताल में लगने वाली एंबुलेंस की भीड़ नदारद रही। कमलापुर में दीवार गिरने के बाद एक बालिका को समय से एंबुलेंस नहीं मिल सकी। इससे उसकी मौके पर ही तड़पकर मौत हो गई।
खड़ी रहीं एंबुलेंस, जिला अस्पताल में प्रदर्शन
एंबुलेंस कर्मी सोमवार को अपने वाहन लेकर आरएमपी मैदान पहुंचे और वहां वाहन खड़े कर दिए। वहां पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रही। उसके बाद जिला अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। ठेका प्रथा को बंद किया जाए। हम लोगों की मेहनत को देखते हुए स्थायी किया जाए। ठेका कंपनी बदलने पर उत्पीड़न बंद किया जाए। जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी।
तड़पती रही किशोरी, नहीं मिली एंबुलेंस
कसमंडा विकासखंड की पीरनगर निवासी आरती (14) पर बीती रात कच्ची दीवार गिर गई। इससे आरती की सांसे थम रही थी। सुबह करीब सात बजे गांव के अश्वनी शुक्ला ने एंबुुलेंस को फोन किया। कॉल रिसीव के बाद कंट्रोल रूम से बताया गया कि कोई एंबुलेंस खाली नहीं है। अश्वनी काफी मन्नतें करते रहे लेकिन एंबुलेंस नहीं मिल सकी। काफी देर बाद आरती की सांसे थम गई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय से एंबुलेंस मिल जाती तो शायद आरती की जान बच जाती।
एक घंटे बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस
शहर से सटे टेढ़वा चिलौला गांव के सर्वेश को सीने में काफी तेज दर्द होने लगा। इस पर उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया लेकिन एक घंटा बीत जाने के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली। परिजन सर्वेश को प्राइवेट वाहन से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उसके बाद अस्पताल में इनका इलाज शुरू हो सका।
डिस्चार्ज के बाद नहीं मिली सुविधा
मछरेहटा की सावित्री देवी ने पेट का ऑपरेशन जिला अस्पताल में कराया था। सोमवार को हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। इस पर परिजनों ने एंबुलेंस को फोन करके घर पहुंचाने की मदद मांगी। लेकिन कंट्रोल रूम से उन्हें कोई एंबुलेंस न होने की बात कहकर मना कर दिया गया। इसके बाद परिजन अपने निजी वाहन से घर पहुंचे।
कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से दिक्कतें हुईं हैं। छह एंबुलेंस इमरजेंसी के लिए तहसीलवार लगाई गई थी। आंदोलनकारियों से वार्ता की जा रही है। जल्द ही सार्थक नतीजा निकल आएगा।
- रवि श्रीवास्तव, जिला एंबुलेंस प्रभारी
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एंबुलेंस न मिलने से बाइक व ऑटो रिक्शा से ही अस्पताल पहुंचकर तीमारदारों ने मरीज का इलाज शुरू कराया। चालकों की हड़ताल से एंबुलेंस के पहिये जाम होने से करीब तीन सौ मरीज सुविधा से वंचित रह गए। जिले में 102 व 108 नंबर की 97 एंबुलेंस शहर से लेकर ग्रामीण स्तर तक चल रही है। रोजाना एक एंबुलेंस दो से तीन कॉल रिसीव करके मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाती है।
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एंबुलेंस कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार से चक्का जाम कर दिया। इससे जिले में चल रही एंबुलेंस के पहिये थम गए। इससे पूरे जिले में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की सुविधा बेपटरी हो गई। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। करीब 300 मरीजों को कॉल करने के बाद भी सुविधा नहीं मिल सकी।
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वह न तो समय से अस्पताल पहुंच पाए न ही अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर पहुंचने में मदद मिल सकी। सबसे अधिक दिक्कत प्रसव वाली महिलाओं को आई। एक्सीडेंट में घायल मरीजों को भी अस्पताल तक आने के लिए तमाम जतन करने पड़े। ऐसे में जब एंबुलेंस नहीं मिली तो परिजनों ने खुद ही वाहन का इंतजाम करके अस्पताल तक पहुंचाया।
इससे उनको आर्थिक रूप से काफी नुकसान भी उठाना पड़ा। एंबुलेंस न मिलने के कारण रोजाना जिला व महिला अस्पताल में लगने वाली एंबुलेंस की भीड़ नदारद रही। कमलापुर में दीवार गिरने के बाद एक बालिका को समय से एंबुलेंस नहीं मिल सकी। इससे उसकी मौके पर ही तड़पकर मौत हो गई।
खड़ी रहीं एंबुलेंस, जिला अस्पताल में प्रदर्शन
एंबुलेंस कर्मी सोमवार को अपने वाहन लेकर आरएमपी मैदान पहुंचे और वहां वाहन खड़े कर दिए। वहां पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रही। उसके बाद जिला अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। ठेका प्रथा को बंद किया जाए। हम लोगों की मेहनत को देखते हुए स्थायी किया जाए। ठेका कंपनी बदलने पर उत्पीड़न बंद किया जाए। जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी।
तड़पती रही किशोरी, नहीं मिली एंबुलेंस
कसमंडा विकासखंड की पीरनगर निवासी आरती (14) पर बीती रात कच्ची दीवार गिर गई। इससे आरती की सांसे थम रही थी। सुबह करीब सात बजे गांव के अश्वनी शुक्ला ने एंबुुलेंस को फोन किया। कॉल रिसीव के बाद कंट्रोल रूम से बताया गया कि कोई एंबुलेंस खाली नहीं है। अश्वनी काफी मन्नतें करते रहे लेकिन एंबुलेंस नहीं मिल सकी। काफी देर बाद आरती की सांसे थम गई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय से एंबुलेंस मिल जाती तो शायद आरती की जान बच जाती।
एक घंटे बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस
शहर से सटे टेढ़वा चिलौला गांव के सर्वेश को सीने में काफी तेज दर्द होने लगा। इस पर उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया लेकिन एक घंटा बीत जाने के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली। परिजन सर्वेश को प्राइवेट वाहन से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उसके बाद अस्पताल में इनका इलाज शुरू हो सका।
डिस्चार्ज के बाद नहीं मिली सुविधा
मछरेहटा की सावित्री देवी ने पेट का ऑपरेशन जिला अस्पताल में कराया था। सोमवार को हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। इस पर परिजनों ने एंबुलेंस को फोन करके घर पहुंचाने की मदद मांगी। लेकिन कंट्रोल रूम से उन्हें कोई एंबुलेंस न होने की बात कहकर मना कर दिया गया। इसके बाद परिजन अपने निजी वाहन से घर पहुंचे।
कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से दिक्कतें हुईं हैं। छह एंबुलेंस इमरजेंसी के लिए तहसीलवार लगाई गई थी। आंदोलनकारियों से वार्ता की जा रही है। जल्द ही सार्थक नतीजा निकल आएगा।
- रवि श्रीवास्तव, जिला एंबुलेंस प्रभारी