{"_id":"5c6afb58bdec2273970e537f","slug":"201550515032-sitapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रेनों की संख्या न बढ़ाने से सफर हो रहा खर्चीला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रेनों की संख्या न बढ़ाने से सफर हो रहा खर्चीला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर से लखनऊ के बीच महज तीन अप-डाउन ट्रेंनों का हो रहा संचालन
सीतापुर। पूर्वोत्तर रेलवे के नए सीतापुर-लखनऊ ब्रॉडगेज ट्रैक पर भले ही ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है, पर मुसाफिरों की दुश्वारी कम नहीं हुई है। कारण यह है कि इस रुट पर केवल तीन ही ट्रेनें अप और डाउन चलती हैं। जिसमें दो पैसेंजर व केवल एक एक्सप्रेस है।
वह भी ट्रेनों के समय के बीच काफी अधिक अंतर है। एक ट्रेन सुबह रवाना होती है तो दूसरी दोपहर को जाती है। इसकी वजह से मुसाफिरों को ट्रेनों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वह मजबूरी में रोडवेज बस व अन्य साधनों के जरिए अपना सफर पूरा करते हैं। इससे रोजाना करीब तीन हजार मुसाफिर प्रभावित होते हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ से पीलीभीत के बीच अमान परिवर्तन का करीब दो साल पहले काम शुरु हुआ था। पहले चरण में सीतापुर से लखनऊ के बीच ट्रैक तैयार हो गया था। नौ जनवरी को इस ट्रैक पर ट्रेनों का सफर शुरू कर दिया गया है।
विज्ञापन
दो साल तक ट्रैक बंद होने के बाद जब ट्रेनों की आवाजाही शुरू हुई तो मुसाफिरों को उम्मीद थी कि अब सस्ते में लखनऊ तक का सफर कर सकेंगे। महंगे रोडवेज बस के किराए से निजात मिलेगी। लेकिन एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद उनको राहत नहीं मिल सकी है।
अब भी वह रोडवेज बस से ही सफर कर रहे हैं। इसके पीछे कारण यह है कि इस ट्रैक पर केवल तीन ही अप डाउन ट्रेनें चल रही है। वह भी इनके बीच समय में काफी अंतर है। इससे जरुरतमंदों को समय पर ट्रेंने नहीं मिल पाती है। जिसकी वजह से उनको अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है।
यह है समय सारिणी
सीतापुर जंक्शन स्टेशन से पहली ट्रेन सुबह 7.15 बजे रवाना होती है। सुबह लखनऊ जाने वाले मुसाफिर इसका फायदा उठा लेते हैं। इसके बाद दूसरी ट्रेन करीब साढ़े पांच घंटे बाद 2.30 बजे रवाना होती है। आखिरी ट्रेन एक्सप्रेस है, वह शाम को 6.40 बजे रवाना होती है। इस ट्रेन के बीच में चार घंटे का अंतर है। इतना अधिक अंतर होने की वजह से मुसाफिरों को परेशानी हो रही है।
बढ़ जाएगी और समस्या
सीतापुर से लखीमपुर के बीच भी अमान परिवर्तन का काम लगभग पूरा हो चुका है। उम्मीद की जा रही है कि इस माह के अंत तक यहां पर सीआरएस हो जाएगा। मार्च के प्रथम सप्ताह में ट्रेनों का संचालन शुरु होने की आशंका जताई जा रही है। उस समय यही ट्रेनें लखनऊ से लखीमपुर के बीच दौड़ाई जाएगी। जब इनकी दूरी बढ़ जाएगी तो इसका प्रभाव समय सारिणी पर भी पड़ेगा। इससे यह व्यवस्था और बिगड़ सकती है।
बढ़ाई जाए संख्या
सीतापुर से लखनऊ के बीच रोजाना सफर करने वाले सौरभ का कहना है कि सुबह नौ बजे घर से निकलता हूं, 12 बजे लखनऊ पहुंचना होता है। लेकिन इस समय कोई ट्रेन नहीं है। इससे बस के जरिए जाते हैं। मोहित का कहना है कि दोपहर के बाद कोई ट्रेन नहीं है।
इससे दिक्कत होती है। वहीं सरकारी कर्मचारी संदीप का कहना है कि आफिस से पांच बजे छुट्टी मिल जाती है। उस समय कोई ट्रेन नहीं है। इसके लिए दो घंटे इंतजार करें तब तक बस के जरिए घर पहुंच जाते है। इसलिए इस रुट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए। हर एक घंटे बाद एक ट्रेन शुरु की जाए। तभी सहूलियत मिलेगी।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल से तय समय सारिणी के अनुसार ही यहां के ट्रैक पर कोच दौड़ाए जाए रहे हैं। ट्रेनों के संचालन में समय का काफी अंतर है, हालांकि सीमित संसाधनों के बीच ट्रैक पर ट्रेनें दौड़ाई जा रही हैं।
-एके शुक्ला, स्टेशन अधीक्षक, सीतापुर जंक्शन
विज्ञापन
सीतापुर। पूर्वोत्तर रेलवे के नए सीतापुर-लखनऊ ब्रॉडगेज ट्रैक पर भले ही ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है, पर मुसाफिरों की दुश्वारी कम नहीं हुई है। कारण यह है कि इस रुट पर केवल तीन ही ट्रेनें अप और डाउन चलती हैं। जिसमें दो पैसेंजर व केवल एक एक्सप्रेस है।
वह भी ट्रेनों के समय के बीच काफी अधिक अंतर है। एक ट्रेन सुबह रवाना होती है तो दूसरी दोपहर को जाती है। इसकी वजह से मुसाफिरों को ट्रेनों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वह मजबूरी में रोडवेज बस व अन्य साधनों के जरिए अपना सफर पूरा करते हैं। इससे रोजाना करीब तीन हजार मुसाफिर प्रभावित होते हैं।
विज्ञापन
पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ से पीलीभीत के बीच अमान परिवर्तन का करीब दो साल पहले काम शुरु हुआ था। पहले चरण में सीतापुर से लखनऊ के बीच ट्रैक तैयार हो गया था। नौ जनवरी को इस ट्रैक पर ट्रेनों का सफर शुरू कर दिया गया है।
विज्ञापन
दो साल तक ट्रैक बंद होने के बाद जब ट्रेनों की आवाजाही शुरू हुई तो मुसाफिरों को उम्मीद थी कि अब सस्ते में लखनऊ तक का सफर कर सकेंगे। महंगे रोडवेज बस के किराए से निजात मिलेगी। लेकिन एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद उनको राहत नहीं मिल सकी है।
अब भी वह रोडवेज बस से ही सफर कर रहे हैं। इसके पीछे कारण यह है कि इस ट्रैक पर केवल तीन ही अप डाउन ट्रेनें चल रही है। वह भी इनके बीच समय में काफी अंतर है। इससे जरुरतमंदों को समय पर ट्रेंने नहीं मिल पाती है। जिसकी वजह से उनको अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है।
यह है समय सारिणी
सीतापुर जंक्शन स्टेशन से पहली ट्रेन सुबह 7.15 बजे रवाना होती है। सुबह लखनऊ जाने वाले मुसाफिर इसका फायदा उठा लेते हैं। इसके बाद दूसरी ट्रेन करीब साढ़े पांच घंटे बाद 2.30 बजे रवाना होती है। आखिरी ट्रेन एक्सप्रेस है, वह शाम को 6.40 बजे रवाना होती है। इस ट्रेन के बीच में चार घंटे का अंतर है। इतना अधिक अंतर होने की वजह से मुसाफिरों को परेशानी हो रही है।
बढ़ जाएगी और समस्या
सीतापुर से लखीमपुर के बीच भी अमान परिवर्तन का काम लगभग पूरा हो चुका है। उम्मीद की जा रही है कि इस माह के अंत तक यहां पर सीआरएस हो जाएगा। मार्च के प्रथम सप्ताह में ट्रेनों का संचालन शुरु होने की आशंका जताई जा रही है। उस समय यही ट्रेनें लखनऊ से लखीमपुर के बीच दौड़ाई जाएगी। जब इनकी दूरी बढ़ जाएगी तो इसका प्रभाव समय सारिणी पर भी पड़ेगा। इससे यह व्यवस्था और बिगड़ सकती है।
बढ़ाई जाए संख्या
सीतापुर से लखनऊ के बीच रोजाना सफर करने वाले सौरभ का कहना है कि सुबह नौ बजे घर से निकलता हूं, 12 बजे लखनऊ पहुंचना होता है। लेकिन इस समय कोई ट्रेन नहीं है। इससे बस के जरिए जाते हैं। मोहित का कहना है कि दोपहर के बाद कोई ट्रेन नहीं है।
इससे दिक्कत होती है। वहीं सरकारी कर्मचारी संदीप का कहना है कि आफिस से पांच बजे छुट्टी मिल जाती है। उस समय कोई ट्रेन नहीं है। इसके लिए दो घंटे इंतजार करें तब तक बस के जरिए घर पहुंच जाते है। इसलिए इस रुट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए। हर एक घंटे बाद एक ट्रेन शुरु की जाए। तभी सहूलियत मिलेगी।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल से तय समय सारिणी के अनुसार ही यहां के ट्रैक पर कोच दौड़ाए जाए रहे हैं। ट्रेनों के संचालन में समय का काफी अंतर है, हालांकि सीमित संसाधनों के बीच ट्रैक पर ट्रेनें दौड़ाई जा रही हैं।
-एके शुक्ला, स्टेशन अधीक्षक, सीतापुर जंक्शन