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बैराजों से 2.25 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया, उफनाएंगी नदियां
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रेउसा (सीतापुर)। तराई इलाके में बह रही शारदा व सरयू के जलस्तर में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी। कारण यह है कि 2.25 लाख क्यूसेक पानी लखीमपुर से इन नदियों में छोड़ा गया है। देर रात तक पानी जिले में पहुंचने की उम्मीद है। इसकी वजह से पहले से प्रभावित फौजदारपुरवा, चौकीपुरवा व परमेश्वरपुरवा पर खतरा अधिक बढ़ गया है। इस खतरे की आशंका को देखते हुए पांच परिवारों ने शुक्रवार को सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन कर दिया।
वहीं परमेश्वरपुरवा में एक घर नदी के मुहाने पर आने से कट गया है। जलस्तर बढ़ने की आशंका पर प्रशासन अलर्ट हो गया है। एसडीएम व अधिशाषी अभियंता शारदा नहर बराबर नजर बनाए हुए हैं। एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करके वहां के हालात देखे।
जिले के तराई इलाके से होकर शारदा व सरयू नदी गुजरती है। इन नदियों का पानी परमेश्वरपुरवा, चौकीपुरवा व फौजदारपुरवा गांव के समीप आ गया है। शुक्रवार को लखीमपुर से सरयू नदी में दो लाख क्यूसेक व शारदा नदी में 25 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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जिले में ये दोनों नदियां एक में मिलते हुए तबाही मचाती है। यह पानी देर रात तक जिले में पहुंच जाएगा। इससे इन तीन गांवों पर खतरा अधिक बढ़ गया है। इस खतरे को देखते हुए ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही प्रशासन भी बराबर नजर बनाए हुए है।
शुक्रवार को परमेश्वरपुरवा के निर्मल, भगौती व रमेश ने अपने परिवार को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया है। अब ये लोग अपने मकान तोड़ने की प्लानिंग कर रहे हैं। यहीं के धीरा व गयादीन झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। नदी के कटान के कारण इनकी आधी झोपड़ी कटान में चली गई है। ये लोग भी पलायन कर गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शुक्रवार को नदी ने फौजदारपुरवा में करीब 10 मीटर, चौकीपुरवा व परमेश्वरपुरवा में 20-20 मीटर कटान किया है। इसकी वजह से पूरे गांव के लोग दहशत में आ गए हैं। अब सभी ने पलायन की तैयारी कर ली है।
जलस्तर बढ़ने की आशंका को लेकर एसडीएम बिसवां अनुपम मिश्रा ने शुक्रवार को प्रभावित गांवों का दौरा किया। वहां चल रहे निर्माण कार्यों को देखा और ग्रामीणों को हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिया।
एसडीएम नगीनापुरवा गांव पहुंचे। यहां पर अभी नदी का पानी गांव से करीब 20 मीटर दूर बह रहा है। नगीनापुरवा में इंद्रल, सूर्जलाल व गया प्रसाद के घर पर खतरा मंडराने लगा है क्योंकि इनके मकान गांव के किनारे बने होने के कारण पानी करीब 20 मीटर दूर बचा है। इससे ये लोग भी पलायन की तैयारी करने लगे हैं।
रेउसा इलाके के चहलारी घाट पुल में कई जगहों पर गड्ढ़े हो गए थे जबकि इस पुल पर हर समय आवागमन बना रहता है। छोटे से लेकर बड़े भारी वाहन गुजरते रहते हैं। पुल पर गड्ढ़े होने से खतरा बना हुआ था। एक जगह पर तो सरिया भी दिखाई दे रही थी। इसकी खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इस पर शुक्रवार को यहां निर्माण कार्य शुरू हो गया। पुल के गड्ढ़ों को भरने का काम दिनभर चलता रहा।
खानी हुसैनपुर व लालपुर के बीच एक सोतिया नाला बहता है लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने से अब पानी नाले में पहुंच गया है। ग्रामीणों ने बताया कि इस नाले से करीब तीन किलोमीटर दूर नदी बहती थी। अब पानी नाले में पहुंच गया है। हालांकि अभी नाला उफनाया नहीं है। केवल सतह पर ही पानी पहुंचा है। वहीं चहलारी घाट के पुल के समीप त्यागी जी महराज के आश्रम के किनारे तक भी पानी पहुंच गया है।
नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने से कटान शुरू हो गया है। अब बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। अमर उजाला ने दो दिन पहले जब प्रमुखता से बाढ़ की खबर प्रकाशित की तो जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। गुरुवार को डीएम, एसपी, एसडीएम मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
अब लोग पलायन करना शुरू कर दिए हैं लेकिन इनको राहत सामग्री मिल नहीं पा रही है। भले ही पीड़ितों की संख्या कम हो लेकिन उनको मदद की दरकार है। अभी तक केवल फाइलों में ही टेंडर प्रक्रिया चल रही थी। टेंडर हो जाने के बाद भी अभी तक वर्क-आर्डर जारी नहीं हो सका है।
अब जब बाढ़ का खतरा आया है तो वर्क-आर्डर की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस लेटलतीफी के कारण राहत सामग्री भेजने में देरी हो रही है। यानि प्रशासन बढ़ा आने का इंतजार कर रहा था। जब बाढ़ का खतरा बढ़ा तो काम शुरू किया गया है।
जिला प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को लेकर महमूदाबाद, बिसवां व लहरपुर तहसील में कंट्रोल रूम बना दिया है। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित रहेगा। इस पर कोई भी प्रभावित शिकायत करके मदद पा सकता है। कलेक्ट्रेट परिसर में बने कंट्रोल रूम का नंबर 05862-245753 है।
इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1077 जारी किया गया है। लहरपुर तहसील का 05862-254654, महमूदाबाद तहसील का 05862- 282928 व बिसवां तहसील का 05862-233234 नंबर है।
शारदा नहर के अधिशाषी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि लखीमपुर से नदियों में सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह रात तक सीतापुर पहुंच जाएगा। परमेश्वरपुरवा व फौजदारपुरवा में कटान रोकने के लिए निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। जूनियर इंजीनियर दिन-रात वहीं पर रुककर बंबू पायलिंग व बंबू क्रेट में बोरियां भरवाकर नदी के किनारे लगवा रहे हैं जिससे कटान को नियंत्रित किया जा सके।
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वहीं परमेश्वरपुरवा में एक घर नदी के मुहाने पर आने से कट गया है। जलस्तर बढ़ने की आशंका पर प्रशासन अलर्ट हो गया है। एसडीएम व अधिशाषी अभियंता शारदा नहर बराबर नजर बनाए हुए हैं। एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करके वहां के हालात देखे।
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जिले के तराई इलाके से होकर शारदा व सरयू नदी गुजरती है। इन नदियों का पानी परमेश्वरपुरवा, चौकीपुरवा व फौजदारपुरवा गांव के समीप आ गया है। शुक्रवार को लखीमपुर से सरयू नदी में दो लाख क्यूसेक व शारदा नदी में 25 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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जिले में ये दोनों नदियां एक में मिलते हुए तबाही मचाती है। यह पानी देर रात तक जिले में पहुंच जाएगा। इससे इन तीन गांवों पर खतरा अधिक बढ़ गया है। इस खतरे को देखते हुए ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही प्रशासन भी बराबर नजर बनाए हुए है।
शुक्रवार को परमेश्वरपुरवा के निर्मल, भगौती व रमेश ने अपने परिवार को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया है। अब ये लोग अपने मकान तोड़ने की प्लानिंग कर रहे हैं। यहीं के धीरा व गयादीन झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। नदी के कटान के कारण इनकी आधी झोपड़ी कटान में चली गई है। ये लोग भी पलायन कर गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शुक्रवार को नदी ने फौजदारपुरवा में करीब 10 मीटर, चौकीपुरवा व परमेश्वरपुरवा में 20-20 मीटर कटान किया है। इसकी वजह से पूरे गांव के लोग दहशत में आ गए हैं। अब सभी ने पलायन की तैयारी कर ली है।
जलस्तर बढ़ने की आशंका को लेकर एसडीएम बिसवां अनुपम मिश्रा ने शुक्रवार को प्रभावित गांवों का दौरा किया। वहां चल रहे निर्माण कार्यों को देखा और ग्रामीणों को हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिया।
एसडीएम नगीनापुरवा गांव पहुंचे। यहां पर अभी नदी का पानी गांव से करीब 20 मीटर दूर बह रहा है। नगीनापुरवा में इंद्रल, सूर्जलाल व गया प्रसाद के घर पर खतरा मंडराने लगा है क्योंकि इनके मकान गांव के किनारे बने होने के कारण पानी करीब 20 मीटर दूर बचा है। इससे ये लोग भी पलायन की तैयारी करने लगे हैं।
रेउसा इलाके के चहलारी घाट पुल में कई जगहों पर गड्ढ़े हो गए थे जबकि इस पुल पर हर समय आवागमन बना रहता है। छोटे से लेकर बड़े भारी वाहन गुजरते रहते हैं। पुल पर गड्ढ़े होने से खतरा बना हुआ था। एक जगह पर तो सरिया भी दिखाई दे रही थी। इसकी खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इस पर शुक्रवार को यहां निर्माण कार्य शुरू हो गया। पुल के गड्ढ़ों को भरने का काम दिनभर चलता रहा।
खानी हुसैनपुर व लालपुर के बीच एक सोतिया नाला बहता है लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने से अब पानी नाले में पहुंच गया है। ग्रामीणों ने बताया कि इस नाले से करीब तीन किलोमीटर दूर नदी बहती थी। अब पानी नाले में पहुंच गया है। हालांकि अभी नाला उफनाया नहीं है। केवल सतह पर ही पानी पहुंचा है। वहीं चहलारी घाट के पुल के समीप त्यागी जी महराज के आश्रम के किनारे तक भी पानी पहुंच गया है।
नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने से कटान शुरू हो गया है। अब बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। अमर उजाला ने दो दिन पहले जब प्रमुखता से बाढ़ की खबर प्रकाशित की तो जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। गुरुवार को डीएम, एसपी, एसडीएम मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
अब लोग पलायन करना शुरू कर दिए हैं लेकिन इनको राहत सामग्री मिल नहीं पा रही है। भले ही पीड़ितों की संख्या कम हो लेकिन उनको मदद की दरकार है। अभी तक केवल फाइलों में ही टेंडर प्रक्रिया चल रही थी। टेंडर हो जाने के बाद भी अभी तक वर्क-आर्डर जारी नहीं हो सका है।
अब जब बाढ़ का खतरा आया है तो वर्क-आर्डर की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस लेटलतीफी के कारण राहत सामग्री भेजने में देरी हो रही है। यानि प्रशासन बढ़ा आने का इंतजार कर रहा था। जब बाढ़ का खतरा बढ़ा तो काम शुरू किया गया है।
जिला प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को लेकर महमूदाबाद, बिसवां व लहरपुर तहसील में कंट्रोल रूम बना दिया है। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित रहेगा। इस पर कोई भी प्रभावित शिकायत करके मदद पा सकता है। कलेक्ट्रेट परिसर में बने कंट्रोल रूम का नंबर 05862-245753 है।
इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1077 जारी किया गया है। लहरपुर तहसील का 05862-254654, महमूदाबाद तहसील का 05862- 282928 व बिसवां तहसील का 05862-233234 नंबर है।
शारदा नहर के अधिशाषी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि लखीमपुर से नदियों में सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह रात तक सीतापुर पहुंच जाएगा। परमेश्वरपुरवा व फौजदारपुरवा में कटान रोकने के लिए निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। जूनियर इंजीनियर दिन-रात वहीं पर रुककर बंबू पायलिंग व बंबू क्रेट में बोरियां भरवाकर नदी के किनारे लगवा रहे हैं जिससे कटान को नियंत्रित किया जा सके।