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मां कूष्मांडा की पूजा कर धन-धान्य का मांगा वरदान
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:20 AM IST
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मां कूष्मांडा की हुई आराधना, गूंजे देवी गीत
सीतापुर। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन रविवार को मां भगवती के चतुर्थ स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। प्रमुख मंदिरों व घरों में श्रद्धालुओं ने माता कूष्मांडा को माल-पुआ का भोग लगाकर धन-धान्य का आशीर्वाद मांगा।
सुबह से शुरू हुआ पूजा का क्रम देर शाम तक चलता रहा। आरती के दौरान माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
शहर के प्रसिद्ध आलमनगर के दुर्गा मंदिर, पराग डेरी के पड़ोस में स्थित मां काली मंदिर, आंख अस्पताल मार्ग स्थित संतोषी माता मंदिर व पंजाबी धर्मशाला स्थित दुर्गा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं।
विधिवत दर्शन-पूजन करने का सुबह से शुरू हुआ क्रम देर रात तक चलता रहा। भक्तों ने जगत जननी आदि शक्ति मां अंबे के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा की।
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मां कूष्मांडा को उनका प्रिय माल-पुआ का भोग लगाकर श्रद्धालुओं ने धन-धान्य का वरदान मांगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार था। तब मां दुर्गा ने अंड रूप में ब्रह्मांड की रचना की।
अपनी मंद हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने से इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। इनका यह रूप अन्नपूर्णा का है। यह प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री हैं। मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने पर साधक की आयु व धन वृद्धि की कामना पूरी होती है।
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सीतापुर। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन रविवार को मां भगवती के चतुर्थ स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। प्रमुख मंदिरों व घरों में श्रद्धालुओं ने माता कूष्मांडा को माल-पुआ का भोग लगाकर धन-धान्य का आशीर्वाद मांगा।
सुबह से शुरू हुआ पूजा का क्रम देर शाम तक चलता रहा। आरती के दौरान माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
शहर के प्रसिद्ध आलमनगर के दुर्गा मंदिर, पराग डेरी के पड़ोस में स्थित मां काली मंदिर, आंख अस्पताल मार्ग स्थित संतोषी माता मंदिर व पंजाबी धर्मशाला स्थित दुर्गा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं।
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विधिवत दर्शन-पूजन करने का सुबह से शुरू हुआ क्रम देर रात तक चलता रहा। भक्तों ने जगत जननी आदि शक्ति मां अंबे के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा की।
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मां कूष्मांडा को उनका प्रिय माल-पुआ का भोग लगाकर श्रद्धालुओं ने धन-धान्य का वरदान मांगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार था। तब मां दुर्गा ने अंड रूप में ब्रह्मांड की रचना की।
अपनी मंद हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने से इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। इनका यह रूप अन्नपूर्णा का है। यह प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री हैं। मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने पर साधक की आयु व धन वृद्धि की कामना पूरी होती है।