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पंचतत्व में विलीन हुए हनुमान प्रसाद
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स्वतंत्रता सेनानी हनुमान प्रसाद अवस्थी का बुधवार सुबह बीमारी के चलते निधन हो गया। वह 106 वर्ष के थे। निधन की खबर पाकर पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पैतृक गांव ब्रह्मावली में अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया।
एसडीएम शशिभूषण राय व तहसीलदार संजय यादव की मौजूदगी में उनका राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके छोटे पुत्र प्रदुम्न अवस्थी ने उन्हें मुखाग्नि दी।
गौरतलब है कि विकास खंड महोली के ब्रह्मावली के रहेन वाले हनुमान प्रसाद अवस्थी ने स्वतंत्रता आंदोलन में वर्ष 1941 में एक साल जेल में रहकर 20 रुपये का जुर्माना भरा था।
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1942 में नौ महीने के लिए नजरबंद भी रहे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। उनके निधन का समाचार पाकर क्षेत्रीय विधायक शशांक त्रिवेदी, पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रामलाल राही, विनीत दीक्षित, रामाश्रय अवस्थी, नीरज वर्मा, आशीष मिश्रा, इंद्र कुमार, सतीश अग्निहोत्री व अशोक दीक्षित आदि मौजूद रहे।
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एसडीएम शशिभूषण राय व तहसीलदार संजय यादव की मौजूदगी में उनका राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके छोटे पुत्र प्रदुम्न अवस्थी ने उन्हें मुखाग्नि दी।
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गौरतलब है कि विकास खंड महोली के ब्रह्मावली के रहेन वाले हनुमान प्रसाद अवस्थी ने स्वतंत्रता आंदोलन में वर्ष 1941 में एक साल जेल में रहकर 20 रुपये का जुर्माना भरा था।
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1942 में नौ महीने के लिए नजरबंद भी रहे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। उनके निधन का समाचार पाकर क्षेत्रीय विधायक शशांक त्रिवेदी, पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रामलाल राही, विनीत दीक्षित, रामाश्रय अवस्थी, नीरज वर्मा, आशीष मिश्रा, इंद्र कुमार, सतीश अग्निहोत्री व अशोक दीक्षित आदि मौजूद रहे।