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मकानों के नंबर नहीं, आखिर कैसे पहुंचे डाक

Thu, 13 Jun 2019 12:49 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jun 2019 12:49 AM IST
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मकानों के नंबर नहीं, आखिर कैसे पहुंचे डाक
सीतापुर। अगर आप सीतापुर में किसी को पत्राचार कर रहे हैं या किसी का प्रवेश पत्र या अन्य कागजात आने है तो शायद यह सही जगह पहुंचे।
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इसमें डाकिये की गलती नहीं है बल्कि नगर पालिका की लापरवाही है। शहर के अधिकतर मोहल्लों में मकान नंबर नहीं है। न ही गलियों के नाम है।

इससे जब कोई पत्राचार आता है तो पता न मिलने से वह वापस लौट जाता है। शहर में गली मोहल्ले भूलभुलैया बनकर रह गए हैं।

शहर में गली मोहल्लों के नाम व मकान नंबर देने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। लेकिन नगर पालिका अब तक सभी को मकान नंबर नहीं दे सका है।

नगर पालिका ने करीब दो साल पहले मकान नंबर देने के लिए एक कंपनी को ठेका दिया था। लेकिन कंपनी काम करने से पहले ही निकल गई।

ऐसे में शहर में बिना मकान नंबर व गली नंबर के मोहल्ले बसे हुए है। सबसे अधिक दिक्कत पत्राचार को लेकर आती है। अधिकतर लोग मोहल्ले का नाम डाल देते है अगर मोहल्ले का एरिया बड़ा है तो यह मिलना मुश्किल हो जाता है। इससे पत्राचार वापस चले जाते है।

टैक्स के बाद भी सुविधाएं नहीं
नगर पालिका की सूची में 24021 मकान है। इनसे प्रति वर्ष हाउस टैक्स की वसूली की जाती है। जबकि बिना हाउस टैक्स वाले करीब छह हजार मकान है। पिछले वित्तीय वर्ष में एक करोड़ दो लाख रुपये टैक्स के रूप में आए थे।
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टैक्स देने के बाद भी पालिका लोगों को सुविधाएं नहीं दे पा रही है। मकान व गली नंबर न होने से बाहर से आने वाले लोग भटकते रहते हैं।

ऑनलाइन निकला प्रवेश पत्र
रामसिंह लोनियनपुरवा के रहने वाले है। इनका बीएड परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र आना था। काफी समय से प्रवेश पत्र का इंतजार किया। परीक्षा के लिए दो दिन बचे तो ऑनलाइन तरीके से प्रवेश पत्र निकलवाया। अन्य सभी विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र घर पर पहुंचे चुके थे पर इनका प्रवेश पत्र नहीं पहुंच सका।
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मकान नंबर न होने से लौट गया अंकपत्र
विकास नगर निवासी सौरभ के स्नातक की मार्कशीट डाक से आनी थी। लेकिन यह समय बीतने के बावजूद नहीं पहुंची। यूनिवर्सिटी जाकर जानकारी हासिल की तो पता चला कि यहां से भेजी जा चुकी है। सौरभ का कहना है मकान नंबर है नहीं, केवल विकास नगर लिख दिया था। हो सकता है डाकिया पता न मिलने पर वापस कर दिया हो।

पता न होेेने से लौटा एटीएम कार्ड
नितिन अवस्थी ने बैंक में अकाउंट खुलवाया। एटीएम के लिए आवेदन किया। बैंक ने बताया कि एटीएम घर पहुंच जाएगा। जब एक माह से अधिक समय बीत गया तो नितिन को चिंता होने लगी। उन्होंने बैंक से संपर्क किया। उसके बाद उन्हें बैंक से एटीएम प्राप्त हो सका।


पत्र पर प्रतिष्ठित स्थान का करें जिक्र
पत्राचार करते समय निकट का कोई प्रतिष्ठित स्थान लिखे। अगर मकान व गली नंबर नहीं है तो कोई स्कूल, मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, का जिक्र करें। इससे पत्र घर पहुंच जाएगा। केवल मोहल्ले का नाम न लिखे बल्कि उसके पास के स्थान का जिक्र जरूर करें। ऐसा करने से डाकिये को पता ढूंढने में आसानी होगी।
- अनिल शुक्ला, पोस्ट मास्टर
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