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आठ साल में स्टीमेंट पहुंचा एक से सात करोड़, फिर भी नहीं बना नाला
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कई डीएम शासन को लिख चुके हैं पत्र, दो विधायकों ने भी लगाई गुहार, हर बार मिलती है निराशा
सीतापुर। शहर के आखिरी छोर पर बसे खूबपुर मोहल्ले की जलनिकासी का इंतजाम काफी प्रयास के बाद आठ साल में भी नहीं हो सका है। साल 2011-12 में तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज कुमार ने नाला निर्माण के लिए एक करोड़ पांच लाख का इस्टीमेट बनवाया था।
उसके बाद दोबारा यह कई बार बना। अब यह बढ़कर पौने सात करोड़ पहुंच गया है। फिर भी नाला निर्माण का बजट नहीं जारी हो सका है। इसके चलते मोहल्ले में जलभराव की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है। बारिश के मौसम में तो यहां पर समस्या और विकट हो जाती है।
नवविकसित कॉलोनी खूबपुर, विकासनगर, श्रीनगर, भार्गव कॉलोनी में जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं हैं। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज कुमार ने नाला निर्माण कराने की कवायद शुरु की थी। शुरुआती चरण में एक करोड़ पांच लाख का इस्टीमेट बनवाया गया था।
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नगर पालिका ने इतना अधिक बजट देने से इन्कार दिया। उसके बाद शासन को बजट स्वीकृत के लिए पत्र लिखा गया था। इसके बाद कई जिलाधिकारी आए और उन सभी ने मोहल्ले में जाकर निरीक्षण भी किया। कुछ साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. सारिका मोहन ने मोहल्ले में जाकर जलभराव देखा था।
उसके बाद दोबारा जलनिगम से इस्टीमेट बनवाया। अब यह पौने सात करोड़ तक पहुंच गया है। फिर से वही प्रयास हुए। शासन को बजट जारी करने के लिए जिलाधिकारी की तरफ से कई बार चिठ्ठी लिखी गई है। लेकिन सफलता आज तक नहीं मिल सकी।
इससे मोहल्ले में खाली पड़े प्लॉटों में जलभराव बना हुआ हैं। जिससे संक्रामक रोग फैलने का डर बना हुआ है। वहीं मार्ग पर गंदा पानी भरा होने से लोगों को आवागमन में दिक्कत होती हैं। मोहल्ले की करीब 50 हजार आबादी है।
पहले नगर पालिका पर लगते थे आरोप
मोहल्ले में नाला निर्माण के लिए यहां के बाशिंदों ने कई बार डीएम व निलंबित नगर पालिका अध्यक्ष राधेश्याम जायसवाल से शिकायत की। लेकिन राधेश्याम ने यह कहकर मामला टाल दिया इस इलाके से हमको वोट नहीं मिलता है।
इसी वजह से नाला नहीं बनवाऊंगा। यह बात वह कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी कही। हर बार जब भी निर्माण की कवायद शुरु होती तो नगर पालिका द्वारा इसमें कोई न कोई अड़चन डाल दी जाती।
किस काम के यह प्रतिनिधि
इस मोहल्लों में अधिकतर भाजपा समर्थक रहते हैं। जब प्रदेश में नई सरकार आई तो लोगों को उम्मीद थी कि यह नाला निर्माण हो जाएगा। आशा होती भी क्यों नहीं क्योंकि यहां पर सेवता विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश मिश्रा, शिक्षक नेता/राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. सुरेश तिवारी, सदर विधायक के कार्यालय प्रतिनिधि नरेश राठौर व सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव रहते हैं। लेकिन यह सब भी नाले की नींव तक नहीं रखवा सके। यहां के जलभराव से होकर ये खुद ही रोजाना निकलते हैं।
दो विधायक भी कर चुके है प्रयास
खूबपुर में नाला निर्माण के लिए सदर विधायक राकेश राठौर व सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने भी प्रयास किए है। इसके लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, मुख्यसचिव आदि से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन इनके प्रयास भी अपनी ही सरकार में नाकामयाब हो रहे हैं।
हो रहे हैं प्रयास
नाला निर्माण के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। इस्टीमेट अधिक था। डूडा की तरफ से इस इस्टीमेट को सूडा को भेजा जाएगा। उसके बाद ही इस पर आगे कार्रवाई बढ़ेगी।
-प्रेमप्रकाश उपाध्याय, सिटी मजिस्ट्रेट/प्रशासक नगर पालिका
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सीतापुर। शहर के आखिरी छोर पर बसे खूबपुर मोहल्ले की जलनिकासी का इंतजाम काफी प्रयास के बाद आठ साल में भी नहीं हो सका है। साल 2011-12 में तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज कुमार ने नाला निर्माण के लिए एक करोड़ पांच लाख का इस्टीमेट बनवाया था।
उसके बाद दोबारा यह कई बार बना। अब यह बढ़कर पौने सात करोड़ पहुंच गया है। फिर भी नाला निर्माण का बजट नहीं जारी हो सका है। इसके चलते मोहल्ले में जलभराव की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है। बारिश के मौसम में तो यहां पर समस्या और विकट हो जाती है।
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नवविकसित कॉलोनी खूबपुर, विकासनगर, श्रीनगर, भार्गव कॉलोनी में जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं हैं। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज कुमार ने नाला निर्माण कराने की कवायद शुरु की थी। शुरुआती चरण में एक करोड़ पांच लाख का इस्टीमेट बनवाया गया था।
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नगर पालिका ने इतना अधिक बजट देने से इन्कार दिया। उसके बाद शासन को बजट स्वीकृत के लिए पत्र लिखा गया था। इसके बाद कई जिलाधिकारी आए और उन सभी ने मोहल्ले में जाकर निरीक्षण भी किया। कुछ साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. सारिका मोहन ने मोहल्ले में जाकर जलभराव देखा था।
उसके बाद दोबारा जलनिगम से इस्टीमेट बनवाया। अब यह पौने सात करोड़ तक पहुंच गया है। फिर से वही प्रयास हुए। शासन को बजट जारी करने के लिए जिलाधिकारी की तरफ से कई बार चिठ्ठी लिखी गई है। लेकिन सफलता आज तक नहीं मिल सकी।
इससे मोहल्ले में खाली पड़े प्लॉटों में जलभराव बना हुआ हैं। जिससे संक्रामक रोग फैलने का डर बना हुआ है। वहीं मार्ग पर गंदा पानी भरा होने से लोगों को आवागमन में दिक्कत होती हैं। मोहल्ले की करीब 50 हजार आबादी है।
पहले नगर पालिका पर लगते थे आरोप
मोहल्ले में नाला निर्माण के लिए यहां के बाशिंदों ने कई बार डीएम व निलंबित नगर पालिका अध्यक्ष राधेश्याम जायसवाल से शिकायत की। लेकिन राधेश्याम ने यह कहकर मामला टाल दिया इस इलाके से हमको वोट नहीं मिलता है।
इसी वजह से नाला नहीं बनवाऊंगा। यह बात वह कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी कही। हर बार जब भी निर्माण की कवायद शुरु होती तो नगर पालिका द्वारा इसमें कोई न कोई अड़चन डाल दी जाती।
किस काम के यह प्रतिनिधि
इस मोहल्लों में अधिकतर भाजपा समर्थक रहते हैं। जब प्रदेश में नई सरकार आई तो लोगों को उम्मीद थी कि यह नाला निर्माण हो जाएगा। आशा होती भी क्यों नहीं क्योंकि यहां पर सेवता विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश मिश्रा, शिक्षक नेता/राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. सुरेश तिवारी, सदर विधायक के कार्यालय प्रतिनिधि नरेश राठौर व सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव रहते हैं। लेकिन यह सब भी नाले की नींव तक नहीं रखवा सके। यहां के जलभराव से होकर ये खुद ही रोजाना निकलते हैं।
दो विधायक भी कर चुके है प्रयास
खूबपुर में नाला निर्माण के लिए सदर विधायक राकेश राठौर व सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने भी प्रयास किए है। इसके लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, मुख्यसचिव आदि से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन इनके प्रयास भी अपनी ही सरकार में नाकामयाब हो रहे हैं।
हो रहे हैं प्रयास
नाला निर्माण के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। इस्टीमेट अधिक था। डूडा की तरफ से इस इस्टीमेट को सूडा को भेजा जाएगा। उसके बाद ही इस पर आगे कार्रवाई बढ़ेगी।
-प्रेमप्रकाश उपाध्याय, सिटी मजिस्ट्रेट/प्रशासक नगर पालिका