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सबसे ज्यादा मतों से हरगोविंद तो सबसे कम अंतर से जीत दर्ज करने का रिकार्ड सूरजलाल के नाम
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1951 में कांग्रेस की उमा नेहरू व परागीलाल संयुक्त रूप से चुने गए थे सांसद
सीतापुर। संसदीय क्षेत्र सीतापुर को सन् 1951 में अपने पहले सांसद मिले थे। कांग्रेस के परागीलाल और उमा नेहरू संयुक्त रूप से यहां के पहले सांसद निर्वाचित किए गए थे। 1957 में भी इन्होंने कुर्सी पर कब्जा बरकरार रखा। 1960 के चुनाव में पहली बार मतदान कराया गया। तब कांग्रेस के बी. प्रसाद ने विजय पताका फहराई।
सीतापुर लोकसभा चुनाव के इतिहास में 1 लाख 9 हजार 975 मतों के भारी अंतर से अब तक की सबसे बड़ी जीत बीएलडी के हरगोविंद वर्मा ने दर्ज की है। जबकि सबसे कम मतों (3377) के अंतर से जनसंघ के सूरजलाल जीते थे। देश में 1950 को संविधान लागू होने के बाद सीतापुर संसदीय सीट के लिए पहली बार 1951 में सांसद चुने गए।
उस समय एक सामान्य वर्ग तथा एक अनुसूचित वर्ग का सांसद संयुक्त रूप से चुने जाने का प्रावधान था। पहले सांसद के रूप में कांग्रेस की उमा नेहरू को सामान्य वर्ग में जबकि परागीलाल को अनुसूचित वर्ग में सांसद निर्वाचित किया गया। फिर 1957 में भी संयुक्त रूप से इन्हीं दोनों को सांसद चुना गया।
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इसके बाद 1960 को पहली बार सांसदी का चुनाव मतदान के जरिए किया गया। कांग्रेस के बी. प्रसाद ने जनसंघ के गोकरन को 10 हजार 910 मतों से शिकस्त देकर जीत दर्ज की। 1962 में जनसंघ के सूरज प्रसाद कांग्रेस के दिनेश प्रताप सिंह को 3377 मतों से हराकर सांसद बने। अब तक की यह सबसे कम अंतर की जीत रही है।
1967 में भारतीय जनसंघ के शारदानंद दीक्षित ने कांग्रेस के जगन्नाथ को 95074 मतों से हराते हुए कुर्सी पर कब्जा जमाया। 1971 में कांग्रेस के जगदीश चंद्र दीक्षित ने भारतीय जनसंघ के जय नरायन राठी को 52232 मतों के अंतर से पराजित कर विजय पताका फहराई।
सीतापुर लोकसभा चुनाव के इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का रिकार्ड बीएलडी के हरगोविंद वर्मा के नाम है। 1977 में हरगोविंद ने कांग्रेस के जगदीश चंद्र दीक्षित को 1,09975 मतों के भारी अंतर से मात देते हुए जीत का परचम फहराया था।
1980 से 1989 तक कांग्रेस की राजेन्द्र कुमारी बाजपेई जबकि 1991 में भाजपा के जनार्दन प्रसाद मिश्र ने जीत दर्ज की। 1999 और 2004 में बसपा के राजेश वर्मा तथा 2009 में बसपा की कैसरजहां विजयी रहीं। जबकि 2014 में भाजपा के राजेश वर्मा जीत दर्ज कर सांसद निर्वाचित हुए हैं।
सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस का रहा कब्जा
सीतापुर संसदीय सीट पर सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। हांलाकि इसमें 1951 व 57 में सांसद मनोनीत किए गए थे। जबकि मतदान प्रक्रिया में कांग्रेस चार मर्तबा विजयी रही है। यहां भाजपा और बसपा ने तीन-तीन बार सीट पर कब्जा जमाया है। जबकि एक बार बीएलडी, दो बार जनसंघ व एक बार सपा का कब्जा रहा है।
छह बार महिला सांसद ने किया प्रतिनिधित्व
संसदीय क्षेत्र सीतापुर का प्रतिनिधित्व छह बार महिला सांसदों ने किया है। 1951 व 1957 में कांग्रेस की उमा नेहरू सांसद बनीं। 1980 से 1989 तक लगातार तीन बार कांग्रेस की राजेंद्र कुमारी बाजपेयी का इस सीट पर कब्जा रहा। वहीं, बसपा की कैसरजहां ने 2009 में जीत दर्ज कर सीतापुर लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया।
केन्द्रीय मंत्री भी रहीं राजेंद्र कुमारी बाजपेई
1984 से 1989 तक लगातार तीन बार जीत की हैट्रिक बनाने वाली राजेंद्र कुमारी बाजपेयी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बेहद करीबी मानी जाती थीं। केन्द्र सरकार में 1984 से 1986 तक वे केन्द्रीय सामाजिक कल्याण मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री रहीं।
1986 से 1987 तक श्रम मंत्रालय तथा 1987 से 1989 तक कल्याण मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री रहीं। 1995 से 1998 तक पांडिचेरी में लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में भी कार्य किया।
जनार्दन मिश्र का रहा सबसे कम कार्यकाल
भाजपा के जनार्दन प्रसाद मिश्र का सीतापुर लोकसभा सीट पर सबसे कम एक साल का कार्यकाल रहा है। 1998 में जनार्दन भाजपा के टिकट पर सांसद बने थे। इसके बाद 1999 में फिर से चुनाव होने पर उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। हालांकि जनार्दन प्रसाद मिश्र इससे पहले 1991 में भी सांसद रहे थे। इसके अलावा कांग्रेस के बी. प्रसाद और सपा के मुख्तार अनीस का कार्यकाल दो-दो साल रहा है।
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सीतापुर। संसदीय क्षेत्र सीतापुर को सन् 1951 में अपने पहले सांसद मिले थे। कांग्रेस के परागीलाल और उमा नेहरू संयुक्त रूप से यहां के पहले सांसद निर्वाचित किए गए थे। 1957 में भी इन्होंने कुर्सी पर कब्जा बरकरार रखा। 1960 के चुनाव में पहली बार मतदान कराया गया। तब कांग्रेस के बी. प्रसाद ने विजय पताका फहराई।
सीतापुर लोकसभा चुनाव के इतिहास में 1 लाख 9 हजार 975 मतों के भारी अंतर से अब तक की सबसे बड़ी जीत बीएलडी के हरगोविंद वर्मा ने दर्ज की है। जबकि सबसे कम मतों (3377) के अंतर से जनसंघ के सूरजलाल जीते थे। देश में 1950 को संविधान लागू होने के बाद सीतापुर संसदीय सीट के लिए पहली बार 1951 में सांसद चुने गए।
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उस समय एक सामान्य वर्ग तथा एक अनुसूचित वर्ग का सांसद संयुक्त रूप से चुने जाने का प्रावधान था। पहले सांसद के रूप में कांग्रेस की उमा नेहरू को सामान्य वर्ग में जबकि परागीलाल को अनुसूचित वर्ग में सांसद निर्वाचित किया गया। फिर 1957 में भी संयुक्त रूप से इन्हीं दोनों को सांसद चुना गया।
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इसके बाद 1960 को पहली बार सांसदी का चुनाव मतदान के जरिए किया गया। कांग्रेस के बी. प्रसाद ने जनसंघ के गोकरन को 10 हजार 910 मतों से शिकस्त देकर जीत दर्ज की। 1962 में जनसंघ के सूरज प्रसाद कांग्रेस के दिनेश प्रताप सिंह को 3377 मतों से हराकर सांसद बने। अब तक की यह सबसे कम अंतर की जीत रही है।
1967 में भारतीय जनसंघ के शारदानंद दीक्षित ने कांग्रेस के जगन्नाथ को 95074 मतों से हराते हुए कुर्सी पर कब्जा जमाया। 1971 में कांग्रेस के जगदीश चंद्र दीक्षित ने भारतीय जनसंघ के जय नरायन राठी को 52232 मतों के अंतर से पराजित कर विजय पताका फहराई।
सीतापुर लोकसभा चुनाव के इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का रिकार्ड बीएलडी के हरगोविंद वर्मा के नाम है। 1977 में हरगोविंद ने कांग्रेस के जगदीश चंद्र दीक्षित को 1,09975 मतों के भारी अंतर से मात देते हुए जीत का परचम फहराया था।
1980 से 1989 तक कांग्रेस की राजेन्द्र कुमारी बाजपेई जबकि 1991 में भाजपा के जनार्दन प्रसाद मिश्र ने जीत दर्ज की। 1999 और 2004 में बसपा के राजेश वर्मा तथा 2009 में बसपा की कैसरजहां विजयी रहीं। जबकि 2014 में भाजपा के राजेश वर्मा जीत दर्ज कर सांसद निर्वाचित हुए हैं।
सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस का रहा कब्जा
सीतापुर संसदीय सीट पर सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। हांलाकि इसमें 1951 व 57 में सांसद मनोनीत किए गए थे। जबकि मतदान प्रक्रिया में कांग्रेस चार मर्तबा विजयी रही है। यहां भाजपा और बसपा ने तीन-तीन बार सीट पर कब्जा जमाया है। जबकि एक बार बीएलडी, दो बार जनसंघ व एक बार सपा का कब्जा रहा है।
छह बार महिला सांसद ने किया प्रतिनिधित्व
संसदीय क्षेत्र सीतापुर का प्रतिनिधित्व छह बार महिला सांसदों ने किया है। 1951 व 1957 में कांग्रेस की उमा नेहरू सांसद बनीं। 1980 से 1989 तक लगातार तीन बार कांग्रेस की राजेंद्र कुमारी बाजपेयी का इस सीट पर कब्जा रहा। वहीं, बसपा की कैसरजहां ने 2009 में जीत दर्ज कर सीतापुर लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया।
केन्द्रीय मंत्री भी रहीं राजेंद्र कुमारी बाजपेई
1984 से 1989 तक लगातार तीन बार जीत की हैट्रिक बनाने वाली राजेंद्र कुमारी बाजपेयी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बेहद करीबी मानी जाती थीं। केन्द्र सरकार में 1984 से 1986 तक वे केन्द्रीय सामाजिक कल्याण मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री रहीं।
1986 से 1987 तक श्रम मंत्रालय तथा 1987 से 1989 तक कल्याण मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री रहीं। 1995 से 1998 तक पांडिचेरी में लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में भी कार्य किया।
जनार्दन मिश्र का रहा सबसे कम कार्यकाल
भाजपा के जनार्दन प्रसाद मिश्र का सीतापुर लोकसभा सीट पर सबसे कम एक साल का कार्यकाल रहा है। 1998 में जनार्दन भाजपा के टिकट पर सांसद बने थे। इसके बाद 1999 में फिर से चुनाव होने पर उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। हालांकि जनार्दन प्रसाद मिश्र इससे पहले 1991 में भी सांसद रहे थे। इसके अलावा कांग्रेस के बी. प्रसाद और सपा के मुख्तार अनीस का कार्यकाल दो-दो साल रहा है।