{"_id":"5bedbf5abdec222f4e2681bd","slug":"111542307674-sitapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधिवक्ता पंचायत में सरकार को दी गई एक सप्ताह की मोहलत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधिवक्ता पंचायत में सरकार को दी गई एक सप्ताह की मोहलत
Updated Fri, 16 Nov 2018 12:17 AM IST
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23 नवंबर तक प्रदेश में न्यायिक कार्य न करने का लिया निर्णय, सीतापुर के डीएम व एसपी बदलने की उठाई मांग
सीतापुर। जिले में चल रहे पुलिस व अधिवक्ताओं के मध्य गतिरोध को प्रदेश व्यापी बनाने के लिए आयोजित अधिवक्ता महापंचायत में गुरुवार को भारी संख्या में अधिवक्ता जुटे। इस पंचायत में सीतापुर पुलिस और प्रशासन को आरोपों के कठघरे में खड़ा किया। साथ ही सर्वसम्मति से 23 नवंबर तक न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लेते हुए सीतापुर के डीएम और एसपी बदलने की मांग उठाई।
प्रदेश सरकार को चेताया अगर ये दोनों अफसर हटाए नहीं गए तो वकील जेल भरो आंदोलन के साथ लखनऊ में प्रदेश व्यापी महापंचायत कर मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे। वकीलों की यह महापंचायत जवाहरबाग स्थित सहगल धर्मशाला में हुई। इसकी अगुवाई बार कौंसिल के पूर्व अध्यक्ष अजय शुक्ला, परेश मिश्र, बार एसोसिएशन सीतापुर के कार्यवाहक अध्यक्ष आशीष मिश्र ने संयुक्त रूप से की।
पंचायत में परेश मिश्र ने कहा कि पुलिस का रवैया सामंती हो गया है। प्रदेश का मुखिया ही जब ठोको की बात करता है और सिपाही लखनऊ की सड़क पर निर्दोष का कत्ल करने के बाद थानों में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रकट करते हैं तो ऐसी सरकार से न्याय संगत कार्रवाई की मांग ही बेमानी है। अब यह लड़ाई आर-पार की होगी।
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अजय शुक्ल ने कहा कि अधिवक्ता पंचायत में उठी मांगें यदि सरकार ने समय रहते नहीं मानी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। यह आंदोलन अब तक तक जारी रहेगा जब तक पूरी समस्या का सम्मानजनक समाधान नही हो जाता। पंचायत में सर्वसम्मति से 9 प्रस्ताव पारित किए गए।
इनमें जेल में बंद अधिवक्ताओं सहित दर्ज मुकदमों में वकीलों को राहत तथा पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने की मांग भी की गई। डीएम व एसपी के अविलंब स्थानांतरण की मांग के अलावा जिला जज के भी तबादले को लेकर उच्च न्यायालय को पत्र प्रेषित करने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव हुआ।
अधिवक्ता पंचायत में राकेश शुक्ल, प्रभात शुक्ल, अवधेश सिंह, घनश्याम अग्निहोत्री, सुरेश सिंह सिकरवार, सुरेश पांडेय, ब्रजनाथ पाठक, सतीश चंद्र तिवारी, मुरारी लाल प्रजापति, सतीश शुक्ल, अरविंद खरे, अजय श्रीवास्तव, रामबाबू वर्मा, संतकुमार भारती, कृष्ण प्रताप सिंह, सोमेश त्रिपाठी व कुलभूषण सिंह व वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद माधव अवस्थी ने भी विचार रखे। पंचायत में लखनऊ समेत प्रदेश के 12 जिलों के वकील शामिल हुए।
क्या था मामला
मालूम हो, कि बीती 31 अक्तूबर को नगर के एक भवन पर बगैर किसी नोटिस अनाधिकृत रूप से कब्जा करने की प्रशासनिक कार्रवाई तथा इस मामले में दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं को हिरासत में लेकर वकीलों के विरुद्ध दर्ज किए गए चार अलग-अलग मुकदमों को लेकर वकीलों में जबर्दस्त आक्रोश है।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो वकीलों के साथ पुलिस अभिरक्षा में की गई बदसलूकी से भी अधिवक्ता समुदाय आहत है। वकीलों का कहना है कि जो एसपी किसी जिम्मेदार पद पर बैठे होने के बावजूद पूरे अधिवक्ता समुदाय पर गलत बयानी करने के साथ बगैर प्राथमिकी पहले ही उन्हें इनामिया घोषित कर एनएसए जैसी कार्रवाई करने का बयान जारी कर सकता है। उसे कानून की समझ होगी यह बात पूर्णतय: नाकाबिले एतबार है।
जनप्रतिनिधियों के रवैये से भी आहत दिखे वकील
महापंचायत में वकीलों का गुस्सा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी दिखाई दिया। जिले के सभी नौ विधायकों, चारों सांसदों व राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को समर्थन के लिए बुलाए जाने के बावजूद सत्ता पक्ष भाजपा, विपक्ष सपा व बसपा का कोई जिम्मेदार नेता अधिवक्ताओं की महापंचायत में नहीं पहुंचा।
जिस पर वकीलों ने रोष जताते हुए कहा कि अब मौका पड़ने पर इन जनप्रतिनिधियों को भी अधिवक्ता समाज मुंहतोड़ जवाब देगा। हालांकि पंचायत में शामिल हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनीत दीक्षित, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शमीम कौसर सिद्दीकी, पूर्व विधायक रामपाल यादव व रालोद के प्रदेश प्रवक्ता आरपी सिंह द्वारा दिए गए समर्थन की अधिवक्ताओं सराहना भी की।
कचहरी में सभा न कर पाने का भी रहा मलाल
डीएम द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में अधिवक्ता महापंचायत की अनुमति न दिए जाने तथा जिला जज द्वारा दीवानी कचहरी परिसर में न किए जाने के बार एसोसिएशन को दिए गए मौखिक निर्देशों की भी महापंचायत में जमकर भर्त्सना हुई।
अधिवक्ताओं ने कहा कि अनुमति के साथ शांतिपूर्वक सभा करने से रोकना भी वकीलों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। जिससे अधिवक्ता समुदाय न सिर्फ आहत है बल्कि इसे लेकर भविष्य में रणनीति बनाई जाएगी।
सीतापुर क्लब बन गया अब ऑफिसर्स हॉस्टल
फोटो
सीतापुर। बातें भले ही अधिवक्ता-पुलिस विवाद के जल्द निपटारे की चल रही हों, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों का रुख सामान्य रूप से झुकने वाली दिखाई नही दे रहा है। गुरुवार को अधिवक्ताओं ने जहां डीएम व एसपी को टॉरगेट करते हुए अपनी पंचायत में उन्हें जमकर खरीखोटी सुनाई।
वहीं, इस पूरे विवाद की जड़ में रहे सीतापुर क्लब के बोर्ड को हटाकर उस पर ऑफिसर्स हॉस्टल का बोर्ड लगाते हुए प्रशासन ने इस बात के संकेत दिए कि उसे फिलहाल जले पर नमक छिड़कने से कोई गुरेज नही है।
मालूम हो, कि सुबह अधिवक्ता पंचायत के दौरान ही आंख अस्पताल तिराहा स्थित विवादित स्थल पर सीतापुर क्लब का बोर्ड हटाकर वहां ऑफिसर्स हॉस्टल का बोर्ड लगा दिया गया।
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सीतापुर। जिले में चल रहे पुलिस व अधिवक्ताओं के मध्य गतिरोध को प्रदेश व्यापी बनाने के लिए आयोजित अधिवक्ता महापंचायत में गुरुवार को भारी संख्या में अधिवक्ता जुटे। इस पंचायत में सीतापुर पुलिस और प्रशासन को आरोपों के कठघरे में खड़ा किया। साथ ही सर्वसम्मति से 23 नवंबर तक न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लेते हुए सीतापुर के डीएम और एसपी बदलने की मांग उठाई।
प्रदेश सरकार को चेताया अगर ये दोनों अफसर हटाए नहीं गए तो वकील जेल भरो आंदोलन के साथ लखनऊ में प्रदेश व्यापी महापंचायत कर मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे। वकीलों की यह महापंचायत जवाहरबाग स्थित सहगल धर्मशाला में हुई। इसकी अगुवाई बार कौंसिल के पूर्व अध्यक्ष अजय शुक्ला, परेश मिश्र, बार एसोसिएशन सीतापुर के कार्यवाहक अध्यक्ष आशीष मिश्र ने संयुक्त रूप से की।
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पंचायत में परेश मिश्र ने कहा कि पुलिस का रवैया सामंती हो गया है। प्रदेश का मुखिया ही जब ठोको की बात करता है और सिपाही लखनऊ की सड़क पर निर्दोष का कत्ल करने के बाद थानों में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रकट करते हैं तो ऐसी सरकार से न्याय संगत कार्रवाई की मांग ही बेमानी है। अब यह लड़ाई आर-पार की होगी।
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अजय शुक्ल ने कहा कि अधिवक्ता पंचायत में उठी मांगें यदि सरकार ने समय रहते नहीं मानी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। यह आंदोलन अब तक तक जारी रहेगा जब तक पूरी समस्या का सम्मानजनक समाधान नही हो जाता। पंचायत में सर्वसम्मति से 9 प्रस्ताव पारित किए गए।
इनमें जेल में बंद अधिवक्ताओं सहित दर्ज मुकदमों में वकीलों को राहत तथा पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने की मांग भी की गई। डीएम व एसपी के अविलंब स्थानांतरण की मांग के अलावा जिला जज के भी तबादले को लेकर उच्च न्यायालय को पत्र प्रेषित करने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव हुआ।
अधिवक्ता पंचायत में राकेश शुक्ल, प्रभात शुक्ल, अवधेश सिंह, घनश्याम अग्निहोत्री, सुरेश सिंह सिकरवार, सुरेश पांडेय, ब्रजनाथ पाठक, सतीश चंद्र तिवारी, मुरारी लाल प्रजापति, सतीश शुक्ल, अरविंद खरे, अजय श्रीवास्तव, रामबाबू वर्मा, संतकुमार भारती, कृष्ण प्रताप सिंह, सोमेश त्रिपाठी व कुलभूषण सिंह व वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद माधव अवस्थी ने भी विचार रखे। पंचायत में लखनऊ समेत प्रदेश के 12 जिलों के वकील शामिल हुए।
क्या था मामला
मालूम हो, कि बीती 31 अक्तूबर को नगर के एक भवन पर बगैर किसी नोटिस अनाधिकृत रूप से कब्जा करने की प्रशासनिक कार्रवाई तथा इस मामले में दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं को हिरासत में लेकर वकीलों के विरुद्ध दर्ज किए गए चार अलग-अलग मुकदमों को लेकर वकीलों में जबर्दस्त आक्रोश है।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो वकीलों के साथ पुलिस अभिरक्षा में की गई बदसलूकी से भी अधिवक्ता समुदाय आहत है। वकीलों का कहना है कि जो एसपी किसी जिम्मेदार पद पर बैठे होने के बावजूद पूरे अधिवक्ता समुदाय पर गलत बयानी करने के साथ बगैर प्राथमिकी पहले ही उन्हें इनामिया घोषित कर एनएसए जैसी कार्रवाई करने का बयान जारी कर सकता है। उसे कानून की समझ होगी यह बात पूर्णतय: नाकाबिले एतबार है।
जनप्रतिनिधियों के रवैये से भी आहत दिखे वकील
महापंचायत में वकीलों का गुस्सा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी दिखाई दिया। जिले के सभी नौ विधायकों, चारों सांसदों व राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को समर्थन के लिए बुलाए जाने के बावजूद सत्ता पक्ष भाजपा, विपक्ष सपा व बसपा का कोई जिम्मेदार नेता अधिवक्ताओं की महापंचायत में नहीं पहुंचा।
जिस पर वकीलों ने रोष जताते हुए कहा कि अब मौका पड़ने पर इन जनप्रतिनिधियों को भी अधिवक्ता समाज मुंहतोड़ जवाब देगा। हालांकि पंचायत में शामिल हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनीत दीक्षित, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शमीम कौसर सिद्दीकी, पूर्व विधायक रामपाल यादव व रालोद के प्रदेश प्रवक्ता आरपी सिंह द्वारा दिए गए समर्थन की अधिवक्ताओं सराहना भी की।
कचहरी में सभा न कर पाने का भी रहा मलाल
डीएम द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में अधिवक्ता महापंचायत की अनुमति न दिए जाने तथा जिला जज द्वारा दीवानी कचहरी परिसर में न किए जाने के बार एसोसिएशन को दिए गए मौखिक निर्देशों की भी महापंचायत में जमकर भर्त्सना हुई।
अधिवक्ताओं ने कहा कि अनुमति के साथ शांतिपूर्वक सभा करने से रोकना भी वकीलों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। जिससे अधिवक्ता समुदाय न सिर्फ आहत है बल्कि इसे लेकर भविष्य में रणनीति बनाई जाएगी।
सीतापुर क्लब बन गया अब ऑफिसर्स हॉस्टल
फोटो
सीतापुर। बातें भले ही अधिवक्ता-पुलिस विवाद के जल्द निपटारे की चल रही हों, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों का रुख सामान्य रूप से झुकने वाली दिखाई नही दे रहा है। गुरुवार को अधिवक्ताओं ने जहां डीएम व एसपी को टॉरगेट करते हुए अपनी पंचायत में उन्हें जमकर खरीखोटी सुनाई।
वहीं, इस पूरे विवाद की जड़ में रहे सीतापुर क्लब के बोर्ड को हटाकर उस पर ऑफिसर्स हॉस्टल का बोर्ड लगाते हुए प्रशासन ने इस बात के संकेत दिए कि उसे फिलहाल जले पर नमक छिड़कने से कोई गुरेज नही है।
मालूम हो, कि सुबह अधिवक्ता पंचायत के दौरान ही आंख अस्पताल तिराहा स्थित विवादित स्थल पर सीतापुर क्लब का बोर्ड हटाकर वहां ऑफिसर्स हॉस्टल का बोर्ड लगा दिया गया।