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सोते रहे हाकिम व हुक्मरान, ग्रामीणों ने किवानी पर बना डाला लकड़ी का पुल
Updated Wed, 18 Jul 2018 12:17 AM IST
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थाना, ब्लॉक, अस्पताल व बाजार जाने की दूरी 20 किमी. से घटकर अब 6 किमी. रह गई
सकरन (सीतापुर)। हुक्मरान और हाकिम से मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने चंदा लगाया और श्रमदान कर किवानी नदी पर लकड़ी का अस्थाई पुल बना डाला। पुल बनने से अब ग्रामीणों को थाना, ब्लॉक व अस्पताल जाने के लिए 20 किलोमीटर का फासला तय नहीं करना पड़ेगा। यह दूरी अब महज 6 किलोमीटर में सिमट गई है।
बच्चों को भी स्कूल जाने में अब बेहद आसानी हो गई है। 80 हजार रुपये की लागत वाला यह पुल ग्रामीणों ने 15 दिन की कड़ी मेहनत से बनाया है। चंदे की रकम से ग्रामीणों ने ‘अपना हाथ, जगन्नाथ’ की तर्ज पर यह पुल बनाकर शासन-प्रशासन को आइना दिखा दिया है।
जिला मुख्यालय से करीब 55 किमी. की दूरी पर आबाद सकरन विकासखंड के ताजपुर सलौली गांव के करीब किवानी नदी बहती है। ताजपुर सलौली के ग्रामीणों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए किवानी नदी को पार करना पड़ता है। मसलन स्कूल, थाना, ब्लॉक, अस्पताल और साप्ताहिक बाजार सब किवानी नदी के दूसरी ओर हैं।
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किवानी नदी पर पुल बनाने की मांग यहां के बाशिंदे दशकों पहले से करते आ रहे हैं। बेपरवाही का आलम यह कि सरकार और उसके नुमाइंदे इस ओर ध्यान देने की जहमत नही उठा रहे हैं। नदी पार करने के लिए यहां नाव तक का इंतजाम नही है। गर्मी के मौसम में जब नदी का पानी घटता है तो ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी में उतरकर इसे पार करते हैं।
इसके अलावा दूसरा विकल्प यह कि मदनापुर व सांडा होते हुए 20 किमी. का चक्कर काटकर जाएं। हर साल बारिश के मौसम में नदी का पानी बढ़ने पर ग्रामीणों को मजबूरन 20 किमी. का फासला तय करना पड़ता है। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ती है। अबकी ग्रामीणों ने इस मुसीबत का हल खुद निकालने की सोची।
अपनी इस सोच को अमली जामा पहनाने में जुट गए। पहले चंदे से रकम जमा की। बाद में बांस-बल्लियों का पुल बनाने में जुट गए। सलौली में रहने वाले पूर्व प्रधान जयराम सिंह, मोले सिंह, परागी लाल, मनोहर लाल रामप्रकाश व जियाराम सहित करीब दो दर्जन ग्रामीणों ने 15 दिन की कड़ी मेहनत के बाद किवानी नदी पर लकड़ी का अस्थाई पुल बना डाला।
जयराम सिंह के मुताबिक, यह पुल बनाने में 80 हजार रुपये का खर्च आया है। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए इस पुल की इलाके में खूब चर्चा हो रही है।
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सकरन (सीतापुर)। हुक्मरान और हाकिम से मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने चंदा लगाया और श्रमदान कर किवानी नदी पर लकड़ी का अस्थाई पुल बना डाला। पुल बनने से अब ग्रामीणों को थाना, ब्लॉक व अस्पताल जाने के लिए 20 किलोमीटर का फासला तय नहीं करना पड़ेगा। यह दूरी अब महज 6 किलोमीटर में सिमट गई है।
बच्चों को भी स्कूल जाने में अब बेहद आसानी हो गई है। 80 हजार रुपये की लागत वाला यह पुल ग्रामीणों ने 15 दिन की कड़ी मेहनत से बनाया है। चंदे की रकम से ग्रामीणों ने ‘अपना हाथ, जगन्नाथ’ की तर्ज पर यह पुल बनाकर शासन-प्रशासन को आइना दिखा दिया है।
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जिला मुख्यालय से करीब 55 किमी. की दूरी पर आबाद सकरन विकासखंड के ताजपुर सलौली गांव के करीब किवानी नदी बहती है। ताजपुर सलौली के ग्रामीणों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए किवानी नदी को पार करना पड़ता है। मसलन स्कूल, थाना, ब्लॉक, अस्पताल और साप्ताहिक बाजार सब किवानी नदी के दूसरी ओर हैं।
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किवानी नदी पर पुल बनाने की मांग यहां के बाशिंदे दशकों पहले से करते आ रहे हैं। बेपरवाही का आलम यह कि सरकार और उसके नुमाइंदे इस ओर ध्यान देने की जहमत नही उठा रहे हैं। नदी पार करने के लिए यहां नाव तक का इंतजाम नही है। गर्मी के मौसम में जब नदी का पानी घटता है तो ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी में उतरकर इसे पार करते हैं।
इसके अलावा दूसरा विकल्प यह कि मदनापुर व सांडा होते हुए 20 किमी. का चक्कर काटकर जाएं। हर साल बारिश के मौसम में नदी का पानी बढ़ने पर ग्रामीणों को मजबूरन 20 किमी. का फासला तय करना पड़ता है। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ती है। अबकी ग्रामीणों ने इस मुसीबत का हल खुद निकालने की सोची।
अपनी इस सोच को अमली जामा पहनाने में जुट गए। पहले चंदे से रकम जमा की। बाद में बांस-बल्लियों का पुल बनाने में जुट गए। सलौली में रहने वाले पूर्व प्रधान जयराम सिंह, मोले सिंह, परागी लाल, मनोहर लाल रामप्रकाश व जियाराम सहित करीब दो दर्जन ग्रामीणों ने 15 दिन की कड़ी मेहनत के बाद किवानी नदी पर लकड़ी का अस्थाई पुल बना डाला।
जयराम सिंह के मुताबिक, यह पुल बनाने में 80 हजार रुपये का खर्च आया है। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए इस पुल की इलाके में खूब चर्चा हो रही है।