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Siddharthnagar News: अपने पराए एक जैसे, कैसे सुरक्षित रहे बचपन

Thu, 08 Feb 2024 01:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 08 Feb 2024 01:34 AM IST
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Your strangers are alike, how to keep your childhood safe
सिद्धार्थनगर। बच्चे मन के सच्चे होते हैं, उन्हें कोई भी बहला और फुसला सकता है। अपने पराए एक जैसे हो गए हैं, जिसकी पहचान अब मुश्किल हो रही है। कौन क्या कर देगा, इसका कोई अंदाजा नहीं है। इसलिए बच्चों की सुरक्षा के प्रति खुद को जागरूक होने की जरूरत है। क्योंकि मानवता दम तोड़ रही है। अपने और जानने वाले ही बच्चों पर जुर्म ढा रहे हैं। जैसा कि तीन दिन पहले कठेला समय माता थाना क्षेत्र के एक गांव में 12 वर्षीय बालक के साथ हुआ।
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दरिंदगी में असफल होने पर उसी बच्चे को गला दबाकर मार डाला। खेत की रखवाली के लिए जिसे नियमित लेकर जाते थे। गांव के होने के साथ ही करीबी भी थे। इसलिए मां को उनपर विश्वास था। वह ऐसा कर डालेंगे शायद इस बात से वह अनजान थीं। अपनों का शिकार पहले भी बच्चे हो चुके हैं। यहां बचपन असुरक्षित है और कौन अपना और कौन पराए यह समझ पाना मुश्किल है। समाजशास्त्री और विधि विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक पतन और अशिक्षा इस अपराध की मूल वजह है। जागरूकता के साथ ही कानून का कड़ाई से पालन कराने की जरूरत है।
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दुष्कर्म के बाद मार डाला

जोगिया कोतवाली क्षेत्र में लगभग दो वर्ष पहले एक गांव की एक लगभग सात लड़की गांव में हो रहे कार्यक्रम को देखने गई थी। इसी बीच पड़ोस में रहने वाला एक युवक उसे टॉफी देने के बहाने एक सुनसान स्थान पर ले गए, जहां उसके साथ दरिंदगी की और सच उजागर न हो इसके लिए उसे मार डाला था। पड़ोस का था, इसलिए बच्ची चली गई थी और जान से हाथ धो देना पड़ा था।
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छेड़खानी से परेशान होकर लगा लिया मौत को गले

डेढ़ वर्ष पहले जोगिया कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी 14 वर्षीय किशोरी से गांव के ही रहने वाले युवक छेड़खानी कर रहे थे। लगातार परेशान थी, परिवार ने भी अनसुना कर दिया। और किसी से कुछ बता नहीं पा रही थी, अंत में उसने आत्महत्या कर ली।

जानने वालों ने ही की दरिंदगी

बीते वर्ष अगस्त में पथरा थाना क्षेत्र के एक गांव में एक बालक और किशोर के साथ छह लोगों ने दरिंदगी की। साथ ही नाजुक अंग में मिर्ची डाली, पेट्रोल का इंजेक्शन लगाया। जबकि दोनों छोड़ दो की गुहार लगाते रहे। गांव के ही चौराहे के लोग थे, जहां बच्चे घूमते हुए पहुंच जाते थे। किसी की उम्मीद नहीं थी कि दुकानदार सहयोगियों के साथ मिलकर यह कृत्य करेगा।

विधि विशेषज्ञ बोले

ऐसा अपराध करने वालों पर कार्रवाई होती है। कानून इतना सख्त है कि उन्हें कड़ी सजा मिल भी रही है। लेकिन ऐसी घटनाएं नहीं रुक रही हैं। इसके पीछे अशिक्षा और सामाजिक जागरूकता का अभाव है। बच्चों के बड़े होने के साथ ही परिवार को संस्कार और अपने-पराए के बारे में जागरूक करना होगा। वहीं, पुलिस और प्रशासन को जागरूकता कार्यक्रम करने की जरूरत हैं।


-संजय कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता अपराध जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर

अपराध करने वालों पर केस दर्ज करने के साथ ही पुलिस कड़ी कार्रवाई करती है। अभियान चलाकर ऐसे अपराधियों को सजा भी पुलिस दिलवा रही है। साथ ही चौपाल के माध्यम से पुलिस महिलाओं को कानून से जुड़ी जानकारी भी दे रही है। लोगों में जागरूकता फैलाया जा रहा है।

-प्राची सिंह, पुलिस अधीक्षक
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