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चिंताजनक : मोबाइल पाकर चुप तो हो रहे मगर मां-बाप से दूर होते जा रहे बच्चे

Sun, 09 Mar 2025 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sun, 09 Mar 2025 12:03 AM IST
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Worrying: Children are becoming quiet after getting mobile phones but are getting away from their parents
सिद्धार्थनगर। बच्चा रोए न और दूध पीता रहे, इसके लिए उसे मोबाइल थमा देना नुकसानदेह साबित हो रहा है। बच्चे जब रोते हैं या किसी चीज के लिए जिद करते हैं तो अक्सर मां-बाप पीछा छुड़ाने के लिए बच्चों को मोबाइल या कोई और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट थमा देते हैं।
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यह ट्रेंड आजकल काफी आम हो गया है। इससे बच्चा शांत तो हो जाता है, लेकिन इससे उसे कई घंटे स्क्रीन के सामने बिताने की लत लग जाती है। इससे वह परिवार से भी दूरी बना रहा है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में इस तरह के भी केस आने शुरू हो गए हैं। बच्चे मोबाइल फोन में इतना व्यस्त हो गए हैं कि अपने परिवार से बात ही नहीं कर रहे हैं। धीरे-धीरे वह मोबाइल को ही अपना सब कुछ मान ले रहे हैं। ऐसे में यदि मां-बाप बच्चों से फोन छीन रहे हैं अथवा कम प्रयोग करने की नसीहत दे रहे हैं तो बच्चे खाना, पीना छोड़ दे रहे हैं।
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मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. मो अफजल ने बताया कि दुनिया भर में हुई कई रिसर्च बताती हैं कि कम उम्र में बच्चों को फोन थमाने से उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है। इतना ही नहीं मोबाइल, गैजेट्स और ज्यादा टीवी देखने की लत बच्चों का भविष्य खराब कर रहा है। इससे उनमें वर्चुअल ऑटिज्म का खतरा बढ़ रहा है। बच्चों को स्क्रीन एडिक्शन हो रहा है। उनके विकास, भाषा सीखने और फूड हैबिट की प्रक्रिया बाधित रही है।
मानसिक रोग विशेषज्ञ ने बताया कि भावनात्मक रूप से माता-पिता और बच्चे के बीच दूरी बढ़ रही है। बच्चे घर वालों के बजाय मोबाइल की भाषा अधिक समझ रहे हैं। कुछ बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म (सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होना) की समस्या हो गई।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में इस तरह एक दो केस प्रतिदिन आ जा रहे हैं। इनमें बच्चा फोन के बिना न ताे दूध पी रहा है और न ही कुछ खा रहा है। जबकि, इससे उन बच्चों को विकास भी प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि शून्य से पांच वर्ष की उम्र के बच्चों को मोबाइल स्क्रीन दूर रखना चाहिए, नहीं तो बच्चों में बोलने की क्षमता कम होने के साथ ही मानसिक विकास भी रुक जाएगा।
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