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Siddharthnagar News: प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति...पराली-बायोवेस्ट से बनेगी बायो गैस
Tue, 12 Mar 2024 11:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 12 Mar 2024 11:36 AM IST
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सिद्धार्थनगर। पराली और बायो वेस्ट से होने वाले प्रदूषण से जल्द ही मुक्ति मिलेगी। क्योंकि किसानों के लिए संकट बन चुकी पराली और घर से निकलने वाले बायो वेस्ट का उपयोग अब बायोगैस बनाने में होगा। प्लांट लगाने के लिए एक निवेशक आया है। उसकी कागजी प्रक्रिया तेज हो गई है। जल्द ही यह उद्योग लगाने का काम शुरू हो जाएगा। 150 करोड़ रुपये के निवेश से यह प्लांट लगाया जाना है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
नेपाल बाॅर्डर से सटा होने के कारण जनपद की गिनती प्रदेश के तराई क्षेत्र में होती है। उद्योग के नजरिए से जनपद बहुत ही पीछे है। रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में लोगों को गैर प्रांत में रहना पड़ता है। लोगों को पलायन रुके और क्षेत्र के हिसाब से उद्योग लगे, इसके लिए सरकार इन्वेस्टर समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन करके उद्योग पतियों को हर जनपद में उद्योग के लिए आमंत्रित कर रही है। हाल ही में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी कार्यक्रम हुआ है। इसमें बड़े संख्या में निवेशकों ने ओएमयू पर हस्ताक्षर किया है। इस बीच एक नए निवेशक ने 150 करोड़ के निवेश पर इनवेस्ट यूपी के जरिए हस्ताक्षर किया है।
यह कंपनी बायोगैस बनाने का काम करेगी। किसानों के खेत से निकलने वाली पराली और घर व मंडियों से निकलने वाले सब्जी आदि के बायो वेस्ट से बायोगैस बनाने का काम करेंगे। इससे बायोवेस्ट और पराली से होने वाले प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी। वहीं, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा। उद्योग लगाए जाने की कागजी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जल्द ही इसके स्थापित होने की उम्मीद है।
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किसानों को मिलेगी बड़ी सहूलियत
जिले में लगभग सवा लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। कंबाइन मशीन से कटाई शुरू हुई तो पराली बड़ी समस्या बन गई। कारण धान हो या फिर गेहूं उसके अवशेष जल्द खत्म नहीं होते हैं। बुवाई जल्द हो सके, इसलिए किसान खेत में पराली को जला देते हैं। जिससे वायु प्रदूषण फैलता है। इस प्लांट के लग जाने से खेतों से पराली उठाने की व्यवस्था शुरू हो जाएगी तो किसानों को जलाना नहीं पड़ेगा। साथ ही कंपनी अपने हिसाब पराली का कीमत तय करके किसानों को भुगतान भी करेगी।
मंडी से खत्म हो जाएगा दुर्गंध
मंडी में सब्जी से मिलने वाले अवशेष के सड़ने से आसपास रहने वालों का दम घुटता है। साथ ही मंडी में आने वालों को भी दुर्गंध से परेशान होना पड़ता है। घरों से निकलने वाला बायो वेस्ट शहर में जगह-जगह सड़क पर लोग फेंक देते हैं। उसे भी उठाने की व्यवस्था की जाएगी। उसे लेकर जाकर बायो गैस बनाने में प्रयोग किया जाएगा।
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15 एकड़ पर लगेगा प्लांट
प्लांट लगाने के लिए 15 एकड़ भूमि की जरूरत है। जिसमें प्लांट लगेगा और स्टोर आदि की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए कागजी प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही जमीन देखने का कार्य चल रहा है। कुछ स्थानों पर जमीन भी देख ली गई है। जल्द ही जमीन भी फाइनल हो जाएगी।
किसानों के लिए पराली सबसे बड़ी समस्या है। कटाई के बाद तत्काल बुवाई की जरूरत होती है। ऐसे में विवश होकर किसानों को पराली जलानी पड़ती है। प्लांट लगेगा तो बड़ी राहत मिल जाएगी।
बलराम पांडेय, निवासी अंदुआ शनिचरा
पराली निस्तारण के लिए प्लांट लगने से किसानों को बड़ा लाभ होगा। इसके साथ ही घर से निकलने वाले बायोवेस्ट का भी उपयोग हो जाएगा। लोगों को रोजगार भी मिल जाएगा।
-शिवशंकर चौरसिया, निवासी सेमरा बनकसिया
पराली जलने से होता था बड़ा नुकसान
पराली जलाए जाने से कई प्रकार का नुकसान होता है। पहले तो खेत की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है। दूसरे जमीन में रहने वाले किसानों के मृत कीट भी मर जाते हैं। जो फसल को फायदा पहुंचाने वाले होते हैं। ऐसे उर्वरा शक्ति कम होने से फसल कमजोर होती है। ऐसे में किसान अधिक खाद डालते हैं। जिससे लागत बढ़ जाती है। अगर पराली निस्तारण की व्यवस्था हो जाएगी तो किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
-डॉ. एसके मिश्र, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र सोहना
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बायोगैस प्लांट लगाए जाने के लिए निवेश हुआ है। कागजी कार्रवाई तेजी से चल रही है। जमीन भी कई जगहों पर देखा गया है। जल्द ही योजना स्थापित कराने का कार्य शुरू होगा।
-दयाशंकर सरोज, उपायुक्त उद्योग जिला उद्योग केंद्र
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नेपाल बाॅर्डर से सटा होने के कारण जनपद की गिनती प्रदेश के तराई क्षेत्र में होती है। उद्योग के नजरिए से जनपद बहुत ही पीछे है। रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में लोगों को गैर प्रांत में रहना पड़ता है। लोगों को पलायन रुके और क्षेत्र के हिसाब से उद्योग लगे, इसके लिए सरकार इन्वेस्टर समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन करके उद्योग पतियों को हर जनपद में उद्योग के लिए आमंत्रित कर रही है। हाल ही में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी कार्यक्रम हुआ है। इसमें बड़े संख्या में निवेशकों ने ओएमयू पर हस्ताक्षर किया है। इस बीच एक नए निवेशक ने 150 करोड़ के निवेश पर इनवेस्ट यूपी के जरिए हस्ताक्षर किया है।
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यह कंपनी बायोगैस बनाने का काम करेगी। किसानों के खेत से निकलने वाली पराली और घर व मंडियों से निकलने वाले सब्जी आदि के बायो वेस्ट से बायोगैस बनाने का काम करेंगे। इससे बायोवेस्ट और पराली से होने वाले प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी। वहीं, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा। उद्योग लगाए जाने की कागजी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जल्द ही इसके स्थापित होने की उम्मीद है।
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किसानों को मिलेगी बड़ी सहूलियत
जिले में लगभग सवा लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। कंबाइन मशीन से कटाई शुरू हुई तो पराली बड़ी समस्या बन गई। कारण धान हो या फिर गेहूं उसके अवशेष जल्द खत्म नहीं होते हैं। बुवाई जल्द हो सके, इसलिए किसान खेत में पराली को जला देते हैं। जिससे वायु प्रदूषण फैलता है। इस प्लांट के लग जाने से खेतों से पराली उठाने की व्यवस्था शुरू हो जाएगी तो किसानों को जलाना नहीं पड़ेगा। साथ ही कंपनी अपने हिसाब पराली का कीमत तय करके किसानों को भुगतान भी करेगी।
मंडी से खत्म हो जाएगा दुर्गंध
मंडी में सब्जी से मिलने वाले अवशेष के सड़ने से आसपास रहने वालों का दम घुटता है। साथ ही मंडी में आने वालों को भी दुर्गंध से परेशान होना पड़ता है। घरों से निकलने वाला बायो वेस्ट शहर में जगह-जगह सड़क पर लोग फेंक देते हैं। उसे भी उठाने की व्यवस्था की जाएगी। उसे लेकर जाकर बायो गैस बनाने में प्रयोग किया जाएगा।
15 एकड़ पर लगेगा प्लांट
प्लांट लगाने के लिए 15 एकड़ भूमि की जरूरत है। जिसमें प्लांट लगेगा और स्टोर आदि की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए कागजी प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही जमीन देखने का कार्य चल रहा है। कुछ स्थानों पर जमीन भी देख ली गई है। जल्द ही जमीन भी फाइनल हो जाएगी।
किसानों के लिए पराली सबसे बड़ी समस्या है। कटाई के बाद तत्काल बुवाई की जरूरत होती है। ऐसे में विवश होकर किसानों को पराली जलानी पड़ती है। प्लांट लगेगा तो बड़ी राहत मिल जाएगी।
बलराम पांडेय, निवासी अंदुआ शनिचरा
पराली निस्तारण के लिए प्लांट लगने से किसानों को बड़ा लाभ होगा। इसके साथ ही घर से निकलने वाले बायोवेस्ट का भी उपयोग हो जाएगा। लोगों को रोजगार भी मिल जाएगा।
-शिवशंकर चौरसिया, निवासी सेमरा बनकसिया
पराली जलने से होता था बड़ा नुकसान
पराली जलाए जाने से कई प्रकार का नुकसान होता है। पहले तो खेत की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है। दूसरे जमीन में रहने वाले किसानों के मृत कीट भी मर जाते हैं। जो फसल को फायदा पहुंचाने वाले होते हैं। ऐसे उर्वरा शक्ति कम होने से फसल कमजोर होती है। ऐसे में किसान अधिक खाद डालते हैं। जिससे लागत बढ़ जाती है। अगर पराली निस्तारण की व्यवस्था हो जाएगी तो किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
-डॉ. एसके मिश्र, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र सोहना
बायोगैस प्लांट लगाए जाने के लिए निवेश हुआ है। कागजी कार्रवाई तेजी से चल रही है। जमीन भी कई जगहों पर देखा गया है। जल्द ही योजना स्थापित कराने का कार्य शुरू होगा।
-दयाशंकर सरोज, उपायुक्त उद्योग जिला उद्योग केंद्र