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Siddharthnagar News: जहां जेई के मरीज मिले थे, वहां भी नहीं है शुद्ध पानी

Thu, 07 Sep 2023 11:38 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 07 Sep 2023 11:38 PM IST
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Where JE patients were found, there is no pure water
भनवापुर के रमवापुर उर्फ नेबुआ मे मिले एईएस व एई के संदिग्ध मरीज नेहा के घर पर लगा देशी हैंड पंप
जेई, एईएस से प्रभावित गांवों में आज भी 35 फीट नीचे का पीना पी रहे लोग, गांव में लगा गंदगी का ढेर
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भनवापुर और, बढ़नी, बर्डपुर क्षेत्र के जेई, एईएस प्रभावित मरीजों के गांवों में दिखी बदहाली

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। पहले जेई, एईएस से प्रभावित हो चुके गांवों में भी स्वच्छता और शुद्ध पेयजल का अभाव है। ऐसी स्थिति में यह बीमारी बच्चों पर कहर बनकर टूटी तो बचाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। बरसात में गांवों की स्वच्छता कम होने और जगह-जगह जलभराव के कारण मच्छरजनित बीमारियां फैलने का खतरा है।
जब भनवापुर, बर्डपुर और बढ़नी ब्लॉक में जेई, एईएस के चिह्नित गांवों की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया। गांवों में गंदगी का अंबार मिला। 90 प्रतिशत परिवार के लोग 35 फीट वाले देसी नल से प्यास बुझा रहे हैं। गांवों को मात्र चिह्नित करने तक ही प्रशासन की जिम्मेदारी नजर आई। लोगों का कहना है कि जब सफाई और स्वच्छ पेयजल नहीं है तो कैसे बीमारी से इन्कार किया जा सकता है।
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भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के रमवापुर उर्फ नेबुआ व महतिनियां में जेई एईएस के संदिग्ध मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया और जांच के लिए रक्त का नमूना भेज दिया है। इसमें गांव निवासी जितेंद्र पुत्री नेहा (6) साल पिछले महीने एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थी। एक सप्ताह तक जब नेहा का बुखार ठीक नहीं हुआ तो पिता जितेंद्र 16 अगस्त को सीएचसी सिरसिया डॉक्टर को दिखाने लाए। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने सीएचसी सिरसिया के नेहा की रक्त की जांच कराई। जहां नेहा को जेई के लक्षंण दिखे। उसके बाद डॉक्टर ने नेहा की खून की जांच के लिए नमूना भेज दिया। उसी दिन ब्लॉक क्षेत्र के महतिनियां गांव निवासी मुशमैदा खातून (4) पुत्री मोहम्मद मुमर का रक्त जांच की गई, जिसे एईएस व जेई के लक्षण दिखने पर उसका भी रक्त जांच का नमूना भेज दिया गया।
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जब बीमार मिले बच्चों के घर को देखा गया तो यहां पर कोई व्यवस्था नहीं मिली। जेई, एईएस के संदिग्ध मरीज नेहा के घर के आसपास गंदगी मिली। इसके साथ ही जलभराव मिला। नाली साफ नहीं है। प्यास बुझाने के लिए घर में 35 फीट वाला देसी नल पाया गया। परिवार के लोगों ने बताया कि उसी नल से पानी पिया जाता है।
बढऩी ब्लॉक क्षेत्र का औदही कला गांव जेई, एईएस से प्रभावित रहा है। इस वर्ष गांव के निवासी दिलीप कुमार का एक माह का पुत्र जेई से पीडि़त मिला है। यह जानकारी गोरखपुर में हुई जांच में मिली है। परिजन उसका एक निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। गांव में पड़ताल की गई तो सफाई व्यवस्था बदहाल मिली। कई स्थानों पर नालियां जाम दिखीं। शुद्ध पेयजल के लिए टंकी लगाने का काम शुरू हुआ है, लेकिन अभी भी लोग वहां देसी हैंडपंप से पानी पीने को मजबूर हैं। कारण पूर्व में लगे अधिकांश इंडिया मार्का टू हैंडपंप खराब हो चुके हैं। गांव के लोगों ने कहा कि साफ.-सफाई तो होती है। लेकिन काफी समय से दवा का छिड़काव गांव में नहीं हुआ है।
इसी प्रकार बर्डपुर ब्लॉक क्षेत्र के महाडीह गांव में भी जेई से ग्रसित मरीज मिल चुका है। लेकिन गांव में सफाई और पेयजल व्यवस्था खराब है। गांव में देखा गया तो अधिकांश घरों में देसी नल लगा हुआ मिला। लोगों ने बताया कि वह इसी से पानी पीते हैं। उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 35 फीट पर नल लगा हुआ है। कोई साधन नहीं है और क्या करें। सभी ग्रामीण अपने-अपने नल से पानी पीते हैं। 90 प्रतिशत ग्रामीण 35 फीट नल से पानी पीते हैं। बाकी 10 प्रतिशत ग्रामीण 130 से लेकर 160 फीट नल से पानी पीते हैं। गांव के जाकिर हुसैन ने बताया कि हमारे घर पर 35 फीट का नल लगा हुआ है। उसी से हम सब पानी पीते हैं। ग्रामीण भुवाल मौर्य ने बताया कि मेरे घर पर 130 फीट का नल लगा हुआ है। जिससे पूरा परिवार पानी पीता है। हमारे गांव में नल ले अलावा पानी के लिए कोई अन्य साधन नहीं है।

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बोले गांव के लोग



गांव में काफी समय से शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए पानी की टंकी बननी थी, लेकिन गांव के बाहर पानी सप्लाई के लिए पाइप बिछा दिया गया है। लोग मजबूरन देशी नल से पानी पीने को मजबूर हैं।

रामदेव गुप्ता, औदही कला

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सफाईकर्मी तो सफाई करता है, लेकिन दवा का छिड़काव काफी दिनों से नहीं हुआ है। जिससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। कई बार शिकायत भी किया गया लेकिन दवा का छिड़काव नहीं किया गया।

अरुण कुमार, औदही कला

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घर के आसपास साफ सफाई व स्वच्छ पेयजल का करें उपयोग

भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के महतिनियां व रमवापुर उर्फ नेबुआ मे मिले दो संदिग्ध जेई, एईएस के मरीजों के परिजनों के घरों के आसपास फैले गंदगी व जलभराव है। परिजनों को घर के आसपास साफ-सफाई रखने, रूके पानी में जला मोबिल आयल, फिनायल, ब्लिचिंग पाउडर का झिड़काव करने व स्वच्छ पेयजल का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। मरीजों के रक्त जांच का रिपोर्ट आने पर सही बीमारी का पता चल सकेगा। स्वस्थ टीम हर संभव मदद के लिए तैयार है।


डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा, सीएचसी अधीक्षक भनवापुर
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चयनित करके करना है यह कार्य

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक जेई, एईएस से प्रभावित गांव चिह्नित किए जाने के बाद स्वास्थ्य और विकास विभाग की टीम संयुक्त रूप से गांव में कार्य करती है। इसमें मरीज मिलने के बाद संबंधित परिवार के सदस्यों के सेहत की जांच करते हैं। आसपास के लोगों की जांच करते हैं। गांव में नियमित फागिंग कराया जाता है। नालियों को जाम नहीं होने दिया जाता है। पानी शुद्ध करने के लिए क्लोरिन गोली हैंडपंप में डाली जाती है। अभियान चलाकर जागरूक किया जाता है और हर परिवार को ताजा भोजन करने, मच्छरदानी लगाकर ही सोने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके अलावा समय-समय में स्वास्थ्य शिविर लगाने का नियम है।
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