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जिम्मेदारों की शिथिलता से वरासत अभियान को झटका
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जिम्मेदारों की शिथिलता से वरासत अभियान को झटका
तय समय सीमा के बाद भी लेखपाल स्तर पर 240 आवेदन लंबित
ग्राम राजस्व समिति की बैठक न होने से अधर में 1693 आवेदन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भूमि विवाद से जुड़े मामलों को शत-प्रतिशत निस्तारण के लिए वरासत अभियान चल रहा है। शासन की प्राथमिकता में शामिल इस अभियान के बाद भी तय समय में निस्तारित करने में शिथिलता सामने आई है। निर्धारित समय सीमा के बाद भी लेखपाल स्तर पर 240 आवेदन लंबित पड़े हैं। जबकि ग्राम राजस्व समिति की बैठक के अभाव में 1693 आवेदन लंबित पड़े हैं।
संक्रमणीय भूमिधरी अधिकार और अविवादित वरासत दर्ज कराए जाने के लिए योगी सरकार 15 दिसंबर से 20 फरवरी तक वरासत अभियान चलाया जा रहा है। इस अवधि में तय तिथियों में लेखपाल से लगायत राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और उपजिलाधिकारी के स्तर से कार्रवाई की जानी है। शासन की प्राथमिकता में शामिल इस अभियान में भी विभिन्न स्तरों पर शिथिलता बरती जा रही है। मंडलायुक्त को भेजे जाने वाली दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक छह जनवरी तक ऑफलाइन एवं ऑनलाइन के माध्यम से वरासत के लिए प्राप्त आवेदन की संख्या 5013 है। जिले की सभी तहसीलों में ऑनलाइन दर्ज आवेदन पत्रों की संख्या 4788 है। निर्धारित समय सीमा अंतर्गत लेखपाल स्तर पर 1390 आवेदन लंबित पड़े हैं। सर्वाधिक शिथिलता लेखपाल के स्तर पर है। समय सीमा के बाद भी 240 आवेदन लंबित हैं। लेखपाल के स्तर से जांचोपरांत राजस्व निरीक्षकों को अग्रसारित आवेदन 3443 हैं। निस्तारित की संख्या 179 है। राजस्व समिति की बैठक में निस्तारित 1710 किए जा चुके हैं। ग्राम राजस्व समिति की बैठक न होने के कारण 1693 आवेदन अवशेष पड़े हुए हैं। लेखपाल और राजस्व समिति के स्तर पर शिथिलता के कारण संबंधित आवेदनकर्ताओं को अभियान की मंशा सफल होती नहीं दिखाई दे रही है। अपर जिलाधिकारी सीताराम गुप्ता ने बताया कि वरासत अभियान की मॉनिटरिंग शासन स्तर पर की जा रही है। समय सीमा पूर्ण होने के बावजूद जो आवेदन बचे रह गए हैं, उन्हें जल्द ही पूर्ण कराया जाएगा।
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तय समय सीमा के बाद भी लेखपाल स्तर पर 240 आवेदन लंबित
ग्राम राजस्व समिति की बैठक न होने से अधर में 1693 आवेदन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भूमि विवाद से जुड़े मामलों को शत-प्रतिशत निस्तारण के लिए वरासत अभियान चल रहा है। शासन की प्राथमिकता में शामिल इस अभियान के बाद भी तय समय में निस्तारित करने में शिथिलता सामने आई है। निर्धारित समय सीमा के बाद भी लेखपाल स्तर पर 240 आवेदन लंबित पड़े हैं। जबकि ग्राम राजस्व समिति की बैठक के अभाव में 1693 आवेदन लंबित पड़े हैं।
संक्रमणीय भूमिधरी अधिकार और अविवादित वरासत दर्ज कराए जाने के लिए योगी सरकार 15 दिसंबर से 20 फरवरी तक वरासत अभियान चलाया जा रहा है। इस अवधि में तय तिथियों में लेखपाल से लगायत राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और उपजिलाधिकारी के स्तर से कार्रवाई की जानी है। शासन की प्राथमिकता में शामिल इस अभियान में भी विभिन्न स्तरों पर शिथिलता बरती जा रही है। मंडलायुक्त को भेजे जाने वाली दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक छह जनवरी तक ऑफलाइन एवं ऑनलाइन के माध्यम से वरासत के लिए प्राप्त आवेदन की संख्या 5013 है। जिले की सभी तहसीलों में ऑनलाइन दर्ज आवेदन पत्रों की संख्या 4788 है। निर्धारित समय सीमा अंतर्गत लेखपाल स्तर पर 1390 आवेदन लंबित पड़े हैं। सर्वाधिक शिथिलता लेखपाल के स्तर पर है। समय सीमा के बाद भी 240 आवेदन लंबित हैं। लेखपाल के स्तर से जांचोपरांत राजस्व निरीक्षकों को अग्रसारित आवेदन 3443 हैं। निस्तारित की संख्या 179 है। राजस्व समिति की बैठक में निस्तारित 1710 किए जा चुके हैं। ग्राम राजस्व समिति की बैठक न होने के कारण 1693 आवेदन अवशेष पड़े हुए हैं। लेखपाल और राजस्व समिति के स्तर पर शिथिलता के कारण संबंधित आवेदनकर्ताओं को अभियान की मंशा सफल होती नहीं दिखाई दे रही है। अपर जिलाधिकारी सीताराम गुप्ता ने बताया कि वरासत अभियान की मॉनिटरिंग शासन स्तर पर की जा रही है। समय सीमा पूर्ण होने के बावजूद जो आवेदन बचे रह गए हैं, उन्हें जल्द ही पूर्ण कराया जाएगा।
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