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Siddharthnagar News: गांव-गांव निगरानी... मिलेगा पीने का साफ पानी
Sun, 31 May 2026 01:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 31 May 2026 01:59 AM IST
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सिद्धार्थनगर। ग्रामीण इलाकों में दूषित पानी से होने वाली बीमारियां लोगों को परेशान नहीं करेंगी। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों और इंडिया मार्का हैंडपंपों के पानी की नियमित गुणवत्ता जांची जाएगी।
सभी 1136 ग्राम पंचायतों में प्रशिक्षित टीमें फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) के जरिये पानी की जांच कर रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेंगी। किसी भी स्थान पर पानी में खतरनाक तत्व मिलने पर तत्काल जांच और सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिससे लोगों को साफ पानी मिल सके और हजारों लोगों को जलजनित बीमारियों से बचाया जा सकेगा।
जनपद नेपाल बाॅर्डर से लगा हुआ है, जिसकी गिनती प्रदेश के तराई इलाके में होती है। मौजूदा समय में जनपद की आबादी करीब 28 से 29 लाख के करीब पहुंच गई होगी। इसमें दो नगर पालिका और नगर पंचायत शामिल है। इसके अलावा 1136 ग्राम पंचायत हैं, यहां साफ पानी की समस्या है। अधिकांश मोहल्ले में पानी पीने से बीमार होने की बात तो सामने आती रही है, लेकिन बीमार पड़ने वालों को यह समझ नहीं पाते हैं कि पानी पीने से यह समस्या उत्पन्न हुई है। वहीं, कुछ मामलों में जब स्थिति बिगड़ने पर जब स्वास्थ्य टीम गांव तक पहुंचती है तो पता चलता है कि बीमारी का कारण कहीं न कहीं पानी है। इसके बाद जांच पड़ताल शुरू होती है।
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ऐसी समस्याएं सामने न आएं और उससे पहले से निपटा जा सके, इसके लिए अब गांव स्तर पर जल की जांच करने की व्यवस्था की गई है। इसमें विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र पर लगे हैंडपंप, सबमर्सिबल और पाइपलाइन से सप्लाई होने वाले पानी के साथ ही अन्य इंडिया मार्का हैंडपंप की जांच की व्यवस्था की गई है। ग्राम पंचायतों की पानी गुणवत्ता की जांच के लिए स्पेशल टीम बनाई गई है जो ग्राम पंचायत स्तर पर काम करेगी।
जनपद की सभी 1136 ग्राम पंचायतों में पांच-पांच सदस्यीय विशेष टीमों को सक्रिय कर दिया गया है, जिनकी जिम्मेदारी गांवों में लोगों तक पहुंच रहे पानी की गुणवत्ता पर नजर रखना है। जांच के बाद ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड रिपोर्ट के आधार पर जिला और राज्य स्तर के अधिकारी भी वास्तविक समय में स्थिति की निगरानी कर सकेंगे। गड़बड़ी मिलने पर तीन चरणों में जांच : पानी की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए त्रिस्तरीय जांच प्रणाली लागू की गई है। सबसे पहले ग्राम पंचायत स्तर की एफटीके टीम परीक्षण करेगी। इसकी मॉनिटरिंग जनपद और राज्य स्तर पर की जाएगी। अगर कहीं पानी की गुणवत्ता खराब या कोई घातक तत्व या किसी तत्व की मात्रा अधिक मिलती है तो उसकी फिर क्रॉस जांच होगी। यदि पानी में किसी प्रकार की गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं तो नमूना जिला मुख्यालय स्थित प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। जिला प्रयोगशाला में जांच के बाद भी समस्या की पुष्टि होने पर नमूना राज्य स्तरीय लैब भेजा जाएगा।
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सभी 1136 ग्राम पंचायतों में प्रशिक्षित टीमें फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) के जरिये पानी की जांच कर रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेंगी। किसी भी स्थान पर पानी में खतरनाक तत्व मिलने पर तत्काल जांच और सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिससे लोगों को साफ पानी मिल सके और हजारों लोगों को जलजनित बीमारियों से बचाया जा सकेगा।
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जनपद नेपाल बाॅर्डर से लगा हुआ है, जिसकी गिनती प्रदेश के तराई इलाके में होती है। मौजूदा समय में जनपद की आबादी करीब 28 से 29 लाख के करीब पहुंच गई होगी। इसमें दो नगर पालिका और नगर पंचायत शामिल है। इसके अलावा 1136 ग्राम पंचायत हैं, यहां साफ पानी की समस्या है। अधिकांश मोहल्ले में पानी पीने से बीमार होने की बात तो सामने आती रही है, लेकिन बीमार पड़ने वालों को यह समझ नहीं पाते हैं कि पानी पीने से यह समस्या उत्पन्न हुई है। वहीं, कुछ मामलों में जब स्थिति बिगड़ने पर जब स्वास्थ्य टीम गांव तक पहुंचती है तो पता चलता है कि बीमारी का कारण कहीं न कहीं पानी है। इसके बाद जांच पड़ताल शुरू होती है।
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ऐसी समस्याएं सामने न आएं और उससे पहले से निपटा जा सके, इसके लिए अब गांव स्तर पर जल की जांच करने की व्यवस्था की गई है। इसमें विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र पर लगे हैंडपंप, सबमर्सिबल और पाइपलाइन से सप्लाई होने वाले पानी के साथ ही अन्य इंडिया मार्का हैंडपंप की जांच की व्यवस्था की गई है। ग्राम पंचायतों की पानी गुणवत्ता की जांच के लिए स्पेशल टीम बनाई गई है जो ग्राम पंचायत स्तर पर काम करेगी।
जनपद की सभी 1136 ग्राम पंचायतों में पांच-पांच सदस्यीय विशेष टीमों को सक्रिय कर दिया गया है, जिनकी जिम्मेदारी गांवों में लोगों तक पहुंच रहे पानी की गुणवत्ता पर नजर रखना है। जांच के बाद ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड रिपोर्ट के आधार पर जिला और राज्य स्तर के अधिकारी भी वास्तविक समय में स्थिति की निगरानी कर सकेंगे। गड़बड़ी मिलने पर तीन चरणों में जांच : पानी की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए त्रिस्तरीय जांच प्रणाली लागू की गई है। सबसे पहले ग्राम पंचायत स्तर की एफटीके टीम परीक्षण करेगी। इसकी मॉनिटरिंग जनपद और राज्य स्तर पर की जाएगी। अगर कहीं पानी की गुणवत्ता खराब या कोई घातक तत्व या किसी तत्व की मात्रा अधिक मिलती है तो उसकी फिर क्रॉस जांच होगी। यदि पानी में किसी प्रकार की गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं तो नमूना जिला मुख्यालय स्थित प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। जिला प्रयोगशाला में जांच के बाद भी समस्या की पुष्टि होने पर नमूना राज्य स्तरीय लैब भेजा जाएगा।